सिमरिया सब-डिवीजन को पहली बार मिले स्थायी एलआरडीसी, लंबित मामलों के निष्पादन की बढ़ी उम्मीद

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 28 May 2026 6:16 PM

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पदभार ग्रहण करते सिमरिया के नए एलआरडीसी मनौव्वर हुसैन (बाएं). फोटो: प्रभात खबर

Chatra News: चतरा के सिमरिया अनुमंडल में पहली बार स्थायी एलआरडीसी की नियुक्ति होने से लोगों में खुशी है. भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, जमाबंदी और म्यूटेशन के लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है. ग्रामीणों ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे किसानों और आम लोगों के लिए राहत बताया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से दीनबंधू और धर्मेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया अनुमंडल कार्यालय में पहली बार स्थायी रूप से भूमि सुधार उपसमाहर्ता (एलआरडीसी) मनौव्वर हुसैन की नियुक्ति होने के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल है. लंबे समय से यह पद रिक्त पड़ा हुआ था, जिसके कारण भूमि एवं राजस्व से जुड़े मामलों का निष्पादन प्रभावित हो रहा था. अब स्थायी एलआरडीसी की पदस्थापना होने से लोगों को लंबित मामलों के समाधान की उम्मीद जगी है.

महीनों से प्रभावित थी न्यायालय की कार्यवाही

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन एसडीओ सह एलआरडीसी शनि राज का एक जनवरी 2026 को स्थानांतरण हो गया था. इसके बाद से एलआरडीसी न्यायालय की कार्यवाही काफी हद तक प्रभावित हो गयी थी. नियमित सुनवाई नहीं होने के कारण दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, जमाबंदी सुधार और भूमि विवाद से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले लंबित होते चले गये. पद रिक्त रहने के कारण आम लोगों को न्यायालय और कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे थे. इससे ग्रामीणों को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.

पांच प्रखंडों के लोगों को हो रही थी परेशानी

एलआरडीसी का पद खाली रहने से सबसे ज्यादा परेशानी सिमरिया अनुमंडल क्षेत्र के सिमरिया, टंडवा, लावालौंग, पत्थलगड्डा और गिद्धौर प्रखंड के लोगों को हो रही थी. इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग भूमि संबंधी मामलों के समाधान के लिए अनुमंडल कार्यालय पहुंचते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि ऑनलाइन पंजी-2 में त्रुटि, रैयती भूमि विवाद, दाखिल-खारिज और जमाबंदी सुधार जैसे मामलों की सुनवाई लंबे समय से बाधित थी. कई लोगों की जमीन से जुड़े कार्य अधर में लटके हुए थे, जिससे खेती-किसानी और अन्य प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे थे.

स्थायी नियुक्ति से बढ़ी नई उम्मीद

अब सरकार द्वारा स्थायी एलआरडीसी की नियुक्ति किये जाने के बाद स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों में नई उम्मीद जगी है. लोगों का मानना है कि नियमित रूप से न्यायालय संचालन होने पर लंबित मामलों का तेजी से निष्पादन होगा और आम लोगों को राहत मिलेगी. स्थानीय नागरिकों ने कहा कि सिमरिया अनुमंडल मुख्य रूप से ग्रामीण और कृषि आधारित क्षेत्र है, जहां भूमि विवादों की संख्या अधिक रहती है. ऐसे में एलआरडीसी न्यायालय का नियमित संचालन बेहद जरूरी है.

किसानों और ग्रामीणों को मिलेगा लाभ

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थायी पदस्थापन से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आयेगी और राजस्व विभाग से जुड़े मामलों का समयबद्ध समाधान हो सकेगा. इससे किसानों को काफी राहत मिलेगी. बानासाडी पंचायत के पूर्व मुखिया करम साहू ने कहा कि अनुमंडल कार्यालय में एलआरडीसी की नियुक्ति होने से भूमि संबंधी समस्याओं के निष्पादन में तेजी आयेगी. दाखिल-खारिज के मामलों का समाधान होगा और इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा.

रेल परियोजना से जुड़े विवादों के समाधान की उम्मीद

इचाक खुर्द गांव के किसान गणेश दांगी और मोती दांगी ने कहा कि पहली बार अनुमंडल कार्यालय में एलआरडीसी की नियुक्ति होने से किसानों के भूमि संबंधी मामलों का निष्पादन आसान होगा और अब उन्हें चतरा नहीं जाना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से शिव कठौतिया न्यू बिजी रेल लाइन परियोजना में जा रही जमीन से संबंधित कई समस्याएं लंबित हैं. अब उम्मीद है कि इन मामलों का भी समाधान हो सकेगा और रैयतों को राहत मिलेगी.

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जटिल भूमि मामलों के समाधान की जगी आस

डाड़ी गांव के किसान गोपाल महतो ने कहा कि एलआरडीसी के पदस्थापन से डाड़ी पंचायत के जटिल भूमि मामलों के समाधान की उम्मीद बढ़ी है. उन्होंने कहा कि लंबे समय से कई भूमि विवाद लंबित पड़े थे, जिनके निष्पादन में अब तेजी आने की संभावना है. स्थानीय लोगों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रहित में महत्वपूर्ण कदम बताया है. लोगों को उम्मीद है कि नए एलआरडीसी के नेतृत्व में भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन मजबूत होगा तथा ग्रामीणों को त्वरित और निष्पक्ष न्याय मिल सकेगा. इससे सिमरिया अनुमंडल क्षेत्र के विकास कार्यों को भी गति मिलेगी.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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