Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम में अचानक नहर में छोड़ा गया पानी, 3000 एकड़ में धान की फसल बर्बाद

Published by : Sameer Oraon Updated At : 01 Dec 2024 8:50 PM

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Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम में जल संसाधन विभाग के द्वारा अचानक पानी छोड़े जाने से धान की फसल बर्बाद हो गयी है. किसानों ने विभाग से क्षतिपूर्ति की मांग की है.

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पश्चिमी सिंहभूम : चक्रधरपुर प्रखंड के आसनतलिया पंचायत की नहर में जल संसाधन विभाग द्वारा अचानक पानी छोड़ दिये जाने से कृष्णापुर, लांडुपोदा, इंदकांटा, ठसकपुर, रामचंद्रपुर, टिकरचांपी, कोटुवा गांव के खेतों में पानी घुस गया है. इससे 3000 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बाद हो गयी है. रविवार को दर्जनों किसानों ने खेतों में उतरकर जल संसाधन विभाग के प्रति आक्रोश जताया. किसानों ने विभाग से क्षतिपूर्ति की मांग की है.

किसानों ने क्षतिपूर्ति की मांग की, नहीं तो करेंगे एनएच जाम

खेत में पानी घुसने से किसान तैयार धान की फसल की कटाई भी नहीं कर पा रहे हैं. धान की खेतों में पानी भर गया है. इससे खेत कीचड़मय हो गया है. कई खेतों में घुटने भर पानी भर गया है. ऐसे में धान की कटाई मुश्किल हो गयी है. वहीं, नहर के किनारे वाले खेतों से किसान धान काटकर मेड़ पर सुखा रहे हैं. धान सूखने के बाद उसे खलिहान तक ले जायेंगे. किसानों का कहना है कि शनिवार को अचानक नहर में पानी छोड़ दिया गया है. जब खेत में पानी की जरूरत रहती है, तब नहर में पानी नहीं छोड़ा जाता है. अब जब धान की फसल पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है, धान कटनी भी शुरू हो गयी है, तब नहर में पानी छोड़ा जा रहा है. नहर में पानी छोड़ने की सूचना किसानों को नहीं दी जाती है. किसानों ने कहा कि हमलोगों का सालों भर की मेहनत बर्बाद हो गयी है. किसान क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं. किसानों ने कहा कि मांग पूरी नहीं होने पर संबंधित विभाग एवं एनएच जाम करेंगे.

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क्या कहते हैं किसान

किसानों ने आठ बिघा में धान की खेती की थी. इसमें 70 हजार रुपये खर्च हुए थे. 50 हजार रुपये लोन लिये हैं. अचानक नहर में पानी छोड़ देने के कारण सालों भर की कमाई बर्बाद हो गयी. विभाग इसकी क्षतिपूर्ति दें. अन्यथा उग्र आंदोलन किया जायेगा.

विजय लमाय, इंदकांटा

किसानों ने सात बिघा में धान की खेती की थी. इसमें 65 हजार रुपये खर्च हुए हैं. धान पक कर तैयार हो गया था. अचानक नहर में पानी छोड़ देने से धान पूरी तरह भींग गया. इससे उत्पादन पर काफी प्रभाव पड़ेगा. विभाग क्षतिपूर्ति करे, नहीं तो सड़क जाम किया जायेगा.

विजय महतो, इंदकांटा

छह बिघा में धान की खेती करने के लिए 70 हजार रुपये खर्च हुए थे. खेत में अचानक पानी भर जाने से सालों भर की मेहनत बर्बाद हो गयी है. किसानों को जल संसाधन विभाग यथाशीघ्र मुआवजा दे, नहीं विभाग का घेराव किया जायेगा.

सुदर्शन महतो, इंदकांटा

चार बिघा में 50 हजार रुपये खर्च कर धान की खेती की थी. विभाग की लापरवाही के कारण अचानक खेतों में पानी भर गया है. इससे धान की कटाई करने में मुश्किल हो रही है. मेरा परिवार भूखे मरने की स्थिति में है. विभाग मुआवजा दे.

चामरा सामड, इंदकांटा

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लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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