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जगन्नाथपुर हाट में भटका मिला बच्चा, ‘बाल सुरक्षा’ अभियान के तहत परिजनों से मिलाया गया

Updated at : 06 Mar 2026 12:44 PM (IST)
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Jagannathpur Missing Child

चाईबासा डालसा की ओर से परिजनों को सौंपा गया बच्चा. फोटो: प्रभात खबर

Jagannathpur Missing Child: जगन्नाथपुर साप्ताहिक हाट में भटके मिले एक छोटे बच्चे को जिला विधिक सेवा प्राधिकार चाईबासा ने “प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा” के तहत सुरक्षित उसके परिजनों से मिला दिया. पारा लीगल वालंटियर और पुलिस की तत्परता से बच्चे की पहचान हुई और विधिक प्रक्रिया पूरी कर उसे पिता के सुपुर्द कर दिया गया. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

Jagannathpur Missing Child: पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर साप्ताहिक हाट क्षेत्र में एक छोटा बच्चा भटकता हुआ मिला, जिसके बाद प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार की तत्परता से उसे सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचा दिया गया. बच्चा अपने माता-पिता या गांव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था, जिससे शुरुआत में उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया. स्थानीय लोगों ने जब बच्चे को अकेले घूमते देखा तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों और पुलिस को दी.

डीएलएसए चाईबासा ने की त्वरित कार्रवाई

पश्चिमी सिंहभूम जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), चाईबासा द्वारा माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर अहमद के मार्गदर्शन तथा सचिव रवि चौधरी के नेतृत्व में इस मामले में तुरंत कार्रवाई की गई. सूचना मिलते ही बच्चे को सुरक्षित रूप से जगन्नाथपुर थाना लाया गया, ताकि उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उसके परिजनों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके. अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, ताकि बच्चे को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

बच्चे का कराया गया स्वास्थ्य परीक्षण

बच्चे की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए उसका प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया गया. यह सुनिश्चित किया गया कि बच्चा पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है. इसके बाद मामले की जानकारी संबंधित विभागों को दी गई और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को भी इस घटना से अवगत कराया गया. प्रशासन का उद्देश्य था कि बच्चे की पहचान जल्द से जल्द सुनिश्चित की जा सके और उसे सुरक्षित माहौल में रखा जा सके.

सूचना प्रसार के लिए मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा

बच्चे के परिजनों तक सूचना पहुंचाने के लिए प्रशासन ने विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया. स्थानीय समाचार माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी बच्चे के बारे में जानकारी साझा की गई. इससे कम समय में व्यापक स्तर पर सूचना लोगों तक पहुंच सकी. प्रशासन का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में जनसहयोग और सूचना का तेज प्रसार बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

पारा लीगल वालंटियर की रही अहम भूमिका

इस पूरी प्रक्रिया में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के पारा लीगल वालंटियर (पीएलवी) उमर सादिक ने सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए बच्चे की जानकारी को व्यापक स्तर पर प्रसारित कराने में मदद की. उनकी पहल से आवश्यक कार्रवाई समय पर पूरी हो सकी और बच्चे के परिजनों तक सूचना पहुंचाना संभव हो पाया.

सूचना मिलते ही थाने पहुंचे परिजन

सूचना प्रसारित होने के कुछ ही समय बाद बच्चे के परिजन जगन्नाथपुर थाना पहुंच गए. पुलिस और प्रशासन ने पहले बच्चे की पहचान की पुष्टि की और इसके बाद आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी की गई. सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद बच्चे को सुरक्षित रूप से उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया. बच्चे को परिवार से मिलते देख सभी ने राहत की सांस ली.

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‘प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा’ के तहत सराहनीय पहल

डीएलएसए चाईबासा द्वारा की गई यह त्वरित और मानवीय पहल “बाल सुरक्षा” अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. हाल के दिनों में बच्चा चोरी से जुड़े मामलों को देखते हुए झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) ने रांची में पिछले सप्ताह “प्रोजेक्ट बाल सुरक्षा” की शुरुआत की है. इस परियोजना का उद्देश्य भटके या असहाय बच्चों की तत्काल सहायता करना और जरूरत पड़ने पर उनके पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करना है. प्रशासन का कहना है कि इस तरह की पहल से जरूरतमंद बच्चों को समय पर सुरक्षा और सहारा मिल सकेगा.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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