चक्रधरपुर में मुर्गामहादेव स्टेशन के पास मालगाड़ी बेपटरी, वंदे भारत समेत कई ट्रेनें प्रभावित

मुर्गामहादेव स्टेशन के पास बेपटरी हुई मालगाड़ी (बाएं) और रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करते रेलकमी. फोटो: प्रभात खबर
Chakradharpur Train Derail: झारखंड के चक्रधरपुर में मुर्गामहादेव स्टेशन के पास कोयला लदी मालगाड़ी बेपटरी हो गई, जिससे कई ट्रेनें प्रभावित हुईं. वंदे भारत समेत कई ट्रेनों को रोका, रद्द या डायवर्ट किया गया. रेलवे द्वारा राहत कार्य जारी है और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
चक्रधरपुर से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट
Chakradharpur Train Derail: झारखंड में चक्रधरपुर रेल मंडल के मुर्गामहादेव रोड स्टेशन पर सोमवार दोपहर करीब 12 बजे कोयले से लदी मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गये. इस कारण देवझर-बांसपानी रेलखंड के अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया. हादसे के कारण टाटा-गुवा ट्रेन को रद्द कर दिया गया, जबकि कई ट्रेनों को बीच रास्ते से लौटाया गया है. खुर्दा रोड-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस को बांसपानी में रोकना पड़ा
युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी, एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन पहुंची
हादसे की सूचना मिलते ही रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया. चक्रधरपुर से 140 टन की क्रेन और डांगुवापोसी से एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन को तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना किया गया. रेलवे अधिकारियों के अनुसार मालगाड़ी कोयले से पूरी तरह लदी हुई है, इस कारण बेपटरी डिब्बों को वापस ट्रैक पर लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी है. यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक खुद चक्रधरपुर रेल मंडल के दौरे पर हैं. इस मार्ग के बाधित होने से रेलवे के माल लदान के लक्ष्यों पर सीधा असर पड़ने की संभावना है.
बीच रास्ते में फंसी ‘वंदे भारत’ और ‘जनशताब्दी’
मालगाड़ी बेपटरी होने से बांसपानी रेलखंड में अप व डाउन दोनों लाइन जाम है. कई महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनें बीच सेक्शन में ही फंस गईं. खुर्दारोड-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस को बांसपानी में रोकना पड़ा, जबकि पुरी-बड़बिल इंटरसिटी भी बीच रास्ते में ही फंसी रही. विशाखापटनम एक्सप्रेस को टाटानगर में ही खड़ा कर दिया गया, जिससे यात्रियों को भीषण गर्मी और असुविधा का सामना करना पड़ा. इसके अलावे पुरी-बड़बिल इंटरसिटी ट्रेन भी बीच सेक्शन में फंसी है. मुर्गामहादेव रोड स्टेशन देवझर-बांसपानी के बीच स्थित है. यह चक्रधरपुर रेल मंडल का सर्वाधिक व्यवस्तम रेल मार्ग है. इस रेलखंड में सर्वाधिक मालगाड़ियां चलती हैं.
ट्रेन बेपटरी होने का प्रभाव
- बांसपानी रेलखंड में ट्रेनों का परिचालन ठप.
- बांसपानी रेलखंड लौह-अयस्क क्षेत्र का सबसे व्यस्ततम रूट है.
- मालगाड़ी पर कोयला लदे रहने के कारण बेपटरी डिब्बों को ट्रैक पर लाने में परेशानी हो रही.
- टाटा-गुवा ट्रेन रद्द, कई ट्रेनों को बीच रास्ते से लौटाया गया.
- खुर्दा रोड-टाटा वंदे भारत एक्सप्रेस को बांसपानी में रोकना पड़ा.
रद्द की गई ट्रेनें
- 68003/68004 टाटा-गुवा -टाटा मेमू ट्रेन को रद्द कर दी गयी.
- 18416 पुरी-बड़बिल एक्सप्रेस जरुली में यात्रा समाप्त की, जरुली से बड़बिल के बीच सेवा रद्द.
- 18415 बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस देवझर में यात्रा समाप्त की, देवझर से पुरी के बीच ट्रेन रद्द.
शॉर्ट टर्मिनेट ट्रेनें
- 12021 हावड़ा-बड़बिल जनशताब्दी को टाटा में शॉर्ट टर्मिनेट किया गया.
- 12022 बड़बिल-हावड़ा एक्सप्रेस को टाटा से वापस हावड़ा भेज दिया गया.
- 20892 पुरी-टाटा वंदे भारत को बांसपानी में शॉर्ट टर्मिनेट किया गया.
- 18415 बड़बिल-पुरी एक्सप्रेस देवझर में यात्रा समाप्त कर दी.
- 20891 टाटा- ब्रह्मपुर को रीशिड्यूल कर रात 8.20 बजे की गयी.
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डायवर्ट की गईं लंबी दूरी की ट्रेनें
- 20815 टाटा-विशाखापटनम को परिवर्तित मार्ग चक्रधरपुर-राउरकेला-झारसुगुड़ा-संबलपुर-टिटलागढ़ होते हुए चलाया गया.
- 18428 आनंद बिहार टर्मिनल-पुरी को परिवर्तित मार्ग चांडिल-कांड्रा-टाटा-हिजली-पुरी होकर चलाया गया.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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