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PHOTOS: झारखंड का वो गांव, जहां से अंग्रेजों ने भगवान बिरसा मुंडा को किया गिरफ्तार

Updated at : 02 Jun 2025 2:36 PM (IST)
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Birsa Munda Tourist Circuit News

बंदगांव के संकरा गांव की वो जगहें, जहां भगवान बिरसा ने अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनायी. फोटो : अनिल तिवारी

Birsa Munda News, Birsa Munda 125th Death Anniversary: बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ ‘उलगुलान’ का ऐलान किया था. तीन-धनुष को हथियार बनाकर अंग्रेजों से लड़ा. अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा की गिरफ्तारी का ऐलान किया और उनकी गिरफ्तारी पर इनाम की घोषणा की, तो उनकी तलाश बहुत तेजी से होनी लगी. इस दौरान शंकरा गांव में रहकर बिरसा मुंडा अंग्रेजों की साजिश के खिलाफ रणनीति बनाने लगे. इसी गांव से 2 फरवरी 1900 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. भगवान बिरसा की 125वीं पुण्यतिथि पर पढ़ें ये विशेष रिपोर्ट.

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Birsa Munda 125th Death Anniversary|Birsa Munda News| बंदगांव (पश्चिमी सिंहभूम), अनिल तिवारी : पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव प्रखंड का शंकरा गांव भी कुछ दिनों के लिए भगवान बिरसा मुंडा का कार्यस्थल था. इसी गांव से अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा को आखिरी बार गिरफ्तार किया था. पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय से रांची की ओर जाने वाली मुख्य सड़क के अंतिम छोर पर है बंदगांव प्रखंड. खूंटी जिला से सटा यह प्रखंड घने जंगलों से घिरा है. नक्सल प्रभावित है. कभी यही प्रखंड अंग्रेजों के छक्के छुड़ा देने वाले बिरसा मुंडा का कार्यस्थल हुआ करता था. बिरसा मुंडा की गिरफ्तारी के 125 साल बाद अब यह गांव वीरान नजर आता है.

कहां है बिरसा मुंडा को पनाह देने वाला शंकरा गांव?

पश्चिमी सिंहभूम के जिला मुख्यालय चाईबासा से 65 किलोमीटर और चक्रधरपुर से 40 किलोमीटर की दूरी पर बंदगांव प्रखंड के टेबो पंचायत में है शंकरा गांव. एनएच-75 (ई) से पश्चिम की ओर 15 किलोमीटर जाने के बाद घने जंगलों में आपको शंकरा गांव मिलेगा. घने जंगलों के बीच बसे इस गांव के चारों ओर पहाड़ हैं. गांव में तकरीबन 350 लोग रहते हैं. सभी अनुसूचित जनजाति (एसटी) के हैं. भगवान बिरसा के द्वारा चलाये गये धर्म बिरसाइत को मानने वाले 50 प्रतिशत लोग हैं इस गांव में. गांव में कुल 40 परिवार हैं. इस गांव में 217 मतदाता हैं.

इस पेड़ के नीचे बैठकें करते थे बिरसा मुंडा. फोटो : प्रभात खबर

अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए बिरसा ने शंकरा गांव को चुना

बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ ‘उलगुलान’ का ऐलान किया था. तीन-धनुष को हथियार बनाकर अंग्रेजों से लड़ा. अंग्रेजों ने बिरसा मुंडा की गिरफ्तारी का ऐलान किया और उनकी गिरफ्तारी पर इनाम की घोषणा की, तो उनकी तलाश बहुत तेजी से होनी लगी. इस दौरान शंकरा गांव में रहकर बिरसा मुंडा अंग्रेजों की साजिश के खिलाफ रणनीति बनाने लगे. इसी गांव से 2 फरवरी 1900 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

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साहू मुंडा के घर रहकर अंग्रेजों के खिलाफ बनाते थे रणनीति

गिरफ्तारी से पहले बिरसा मुंडा एक लकड़हारे के साथ मिलकर मुंशी का काम कर रहे थे. शंकरा के साहू मुंडा के घर पर रहते थे. साहू मुंडा के भाई जावरा मुंडा के साथ मिलकर अंग्रेजों की साजिशों को नाकाम करने में लगे रहते थे. दोनों घर के बरामदे में ही रात गुजारते थे. जावरा मुंडा की छोटी बहन कैरी मुंडा दोनों को भोजन कराती थी. भाइयों के साथ-साथ वह बिरसा का भी ख्याल रखती थी.

इसी घर में रहकर अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे भगवान बिरसा मुंडा. फोटो : अनिल तिवारी

जब अंग्रेजों ने बिरसा से ही बिरसा मुंडा के बारे में की पूछताछ

एक बार अंग्रेजी फौज शंकरा गांव आ धमकी. जवानों ने बिरसा मुंडा से ही बिरसा के बारे में पूछताछ शुरू कर दी. बिरसा मुंडा गांव के विशालकाय इमली वृक्ष के नीचे लगे अखाड़ा में मांदर बजा रहे थे. बिरसा ने पुलिस वालों से कह दिया कि इस गांव में बिरसा नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता. अंग्रेज सिपाही बिरसा मुंडा को पहचानते नहीं थे. इसलिए बैरंग लौट गये.

इसके बाद भी अंग्रेजों की फौज और सिपाही बार-बार शंकरा गांव आती रही. ग्रामीणों को धमकी देती रही. कई बार लोगों के घर उजाड़ दिये गये. धान की फसलों को नष्ट कर दिया. लोगों को यातनाएं देकर बिरसा मुंडा के बारे में पूछते. मजबूरन गांव के लोग अपनी फसल को पहाड़ पर ले जाकर रखते. वहीं, ओखली पर धान की कुटाई करते थे. आज उस स्थान को सेलकुटी नाम से जाना जाता है. आज भी गांव के खतियान में वही नाम दर्ज है.

बिरसा मुंडा की गिरफ्तारी की याद में की गयी पत्थलगड़ी. फोटो : प्रभात खबर

Birsa Munda 125th Death Anniversary: अंग्रेजों ने शंकरा जंगल से किया गिरफ्तार

अंग्रेजों को शक था कि बिरसा शंकरा गांव में ही है. लेकिन ग्रामीण उसकी जानकारी नहीं दे रहे है. फिर कूटनीतिक तरीका अपनाकर बिरसा की जानकारी हासिल की और शंकरा के जंगल से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद बिरसा मुंडा को बंदगांव डाक बंगला में एक रात रखने के बाद दूसरे दिन खूंटी ले जाया गया. उस समय खूंटी, रांची जिला में पड़ता था. बिरसा मुंडा की गिरफ्तारी से ग्रामीण काफी मायूस हुए.

अंग्रेजों ने इसी जंगल से बिरसा मुंडा को किया था गिरफ्तार. फोटो : प्रभात खबर

बिरसाइयत धर्म को मानने वाले हर रविवार करते हैं विशेष प्रार्थना सभा

बिरसा धर्म को मानने वाले लोग आज भी स्वयं भोजन तैयार करके ग्रहण करते हैं. दूसरों के हाथों से तैयार भोजन नहीं खाते. उस जमाने में बिरसा भगवान को लोग सीधे जोहार नहीं करते थे, बल्कि जिस स्थान पर वह बैठते या जहां ध्यान करते, लोग उस स्थान को प्रणाम करते और चूमते थे. भगवान बिरसा की एक खासियत यह थी कि वो जिस जानवर को आवाज देते, वह पास आ जाता था. कोटागाड़ा, जोंकोपाई, रोगोद, हलमद, बांडुकोचा आदि गांवों में आज भी हजारों लोग बिरसाईत धर्म को मानते हैं. प्रत्येक रविवार को इनकी प्रार्थना सभा होती है, जिसमें लोग अपनी गलतियों की माफी मांगते हैं.

घने जंगलों के बीच बसे शंकरा गांव में लगी भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा. फोटो : प्रभात खबर

शंकरा गांव में नहीं मूलभूत सुविधाएं, 2013 से बंद है स्कूल

भगवान बिरसा मुंडा जिस शंकरा गांव में अंग्रेजों के खिलाफ रणनीति बनाते थे, आज वह गांव वीरान सा है. अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है. यहां एक उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय था. यह विद्यालय वर्ष 2013 से बंद है. स्कूल के बंद होने की वजह यह है कि यहां के शिक्षक को नक्सली गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया. तब से स्कूल शिक्षकविहीन है. बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है. 3 किलोमीटर दूर कोटागाड़ा में एक स्कूल है, जहां कोई जाना नहीं चाहता. दिन भर बच्चे मवेशी चराते हैं.

वर्ष 2013 से बंद है शंकरा गांव का स्कूल. फोटो : प्रभात खबर

Birsa Munda News: शंकरा में नहीं आते सरकारी पदाधिकारी

अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण शंकरा गांव में कोई सरकारी अफसर या जनप्रतिनिधि नहीं आते. इसलिए गांव का विकास नहीं हो पा रहा. ग्रामीणों की मानें, तो पंचायत के मुखिया भी कभी-कभी ही गांव आते हैं. गांव में एक भी सरकारी योजना नहीं चल रही. शंकरा के लोग आज भी चुआं खोदकर पानी पीते हैं. नलकूप खराब है. गांव में लगी सोलर जलमीनार खराब है. आंगनबाड़ी भवनहीन है. सोलर आधारित बिजली की व्यवस्था 5 साल पहले की गयी थी. एक साल बाद वह भी खराब हो गयी.

पिछले 4 साल से गांव में बिजली नहीं है. स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने के कारण बीमार पड़ने वाले लोगों को इलाज के लिए 40 किलोमीटर दूर चक्रधरपुर जाना पड़ता है. गांव में किसी को अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला. बकरी शेड भी नहीं बना है. मिट्टी के घर में लोग रह रहे हैं. टेबो-शंकरा सड़क निर्माण अभी शुरू हुआ है.

इसी चुआं का पानी पीते थे बिरसा मुंडा. आज भी लोगों के लिए पेयजल का यही स्रोत है. फोटो : प्रभात खबर

विधायक सुखराम ने लगवायी बिरसा मुंडा की प्रतिमा

चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव ने गांव में बिरसा मुंडा की एक आदमकद प्रतिमा स्थापित करवायी है. वर्ष 2021 में यह प्रतिमा गांव में लगायी गयी थी. इसी प्रतिमा स्थल पास हर साल 2 फरवरी को बिरसा गिरफ्तारी दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन होता है. इसमें ग्रामीण मेला लगाते हैं. यहां भगवान बिरसा मुंडा की पूजा-अर्चना की जाती है.

चक्रधरपुर के विधायक सुखराम के प्रयास से गांव में लगी बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा. फोटो : अनिल तिवारी

शंकरा को आदर्श ग्राम बनायें : ग्रामीण मुंडा

शंकरा गांव के ग्रामीण मुंडा सुखराम मुंडा ने कहा है कि शंकरा एक ऐतिहासिक गांव है. इसे आदर्श ग्राम का दर्जा दिया जाना चाहिए. पेयजल, सड़क, प्रारंभिक शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक भवन और आवास योजना का लाभ अविलंब उपलब्ध कराया जाना चाहिए. विधवा, विकलांग और बुजुर्ग बड़ी संख्या में इस गांव में हैं. उन्हें पेंशन तक नहीं मिलती. गांव में कैंप लगाकर गांव वालों की सुध ली जानी चाहिए. सबसे पहले बंद स्कूल को खोला जाये.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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