एक दिन की छुट्टी लेकर गये बीडीओ ने नौ दिन बाद धनबाद कोर्ट में किया सरेंडर
Updated at : 02 Mar 2017 5:14 AM (IST)
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मनोहरपुर बीडीओ देवेंद्र कुमार पर फरजी कंपनी बना अवैध खनन का भी है आरोप चाईबासा : मनोहरपुर बीडीओ देंवेंद्र कुमार ने एक दिन की छुट्टी लेकर नौ दिन बाद धनबाद कोर्ट में सरेंडर किया.उन्होंने 20 फरवरी को छुट्टी ली थी. छुट्टी के आवेदन में कहा था कि उन्हें कोर्ट में उपस्थित होना है. इसलिए उसे […]
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मनोहरपुर बीडीओ देवेंद्र कुमार पर फरजी कंपनी बना अवैध खनन का भी है आरोप
चाईबासा : मनोहरपुर बीडीओ देंवेंद्र कुमार ने एक दिन की छुट्टी लेकर नौ दिन बाद धनबाद कोर्ट में सरेंडर किया.उन्होंने 20 फरवरी को छुट्टी ली थी. छुट्टी के आवेदन में कहा था कि उन्हें कोर्ट में उपस्थित होना है. इसलिए उसे छुट्टी दी जाये. मगर वह नहीं लौटे, तो जिला प्रशासन की ओर से उनसे संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल लगातार स्विच ऑफ आ रहा था. मनोहरपुर बीडीओ ने भी जिला प्रशासन को नहीं आने के बारे में कोई सूचना नहीं दी.
साथ ही जानकारी के अनुसार देवंेद्र कुमार 17 फरवरी को प्रशासन के सभी वाट्सएेप ग्रुप से लेफ्ट कर गये हैं. डीडीसी सीपी कश्यप ने 25 फरवरी को डीसी को पत्र भेजकर बीडीओ के प्रखंड कार्यालय से गायब होने की सूचना दी. डीसी डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि ने 25 फरवरी को ही प्रशिक्षु उप समाहर्ता जीतेंद्र पांडेय को बीडीओ का प्रभार देने का पत्र जारी कर दिया. हालांकि जीतेंद्र पांडेय ने 28 फरवरी को मनोहरपुर बीडीओ का प्रभार ग्रहण किया.
धनबाद कोर्ट में पेशी के नाम पर ली थी छुट्टी
बीडीओ देवेंद्र कुमार ने 16 फरवरी को डीसी को छुट्टी का आवेदन दिया था. जिसमें बीडीओ ने लिखा था कि झारखंड हाइकोर्ट ने उन्हें धनबाद के विशेष सत्र न्यायालय में 15 दिनों के अंदर पेश होने का आदेश दिया है. इस कारण वे 20 फरवरी को धनबाद के विशेष सत्र न्यायालय में पेश होने जा रहे हैं. बीडीओ देवेंद्र ने अपनी अनुपस्थिति में मनोहरपुर सीओ को बीडीओ का प्रभार देने का आग्रह डीसी से किया था .
बीपीओ ने कहा : नहीं आ रहे हैं बीडीओ
बीडीओ ने 20 फरवरी को धनबाद के विशेष सत्र न्यायालय में पेश होने के लिए छुट्टी ली थी. मगर 25 फरवरी तक वे मनोहरपुर कार्यालय में नहीं आये. 25 फरवरी को डीडीसी सीपी कश्यप ने मामले की छानबीन की. उसी दिन डीडीसी ने डीसी को बताया कि बीडीओ नहीं आ रहे हैं. साथ ही उनका मोबाइल स्वीच अॉफ आ रहा है. मनोहरपुर बीपीओ ने डीडीसी को बताया कि बीडीओ 20 फरवरी से कार्यालय नहीं आ रहे हैं.
अवैध खनन कराने के आरोपी हैं बीडीओ
बीडीओ देवेंद्र कुमार पर मनोहरपुर में अवैध खनन कराने का आरोप है. जांच में भी अवैध खनन कराने की पुष्टि हो गयी है. इसके बाद डीसी डॉ शांतनु कुमार अग्रहरि ने अगस्त 2016 में बीडीओ देवेंद्र कुमार पर प्रपत्र क गठित किया था. इस मामले में सरकार से बीडीओ पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की गयी है.
शो-कॉज के बाद जमा करायी थी रॉयल्टी
फर्जी कंपनी को संरक्षण देकर अवैध खनन मामले में दोषी पाये जाने के बाद बीडीओ को एसडीओ ने शो- कॉज किया था. आनन-फानन में बीडीओ ने दोनों कंस्ट्रक्शन कंपनियों से फाइन के साथ रॉयल्टी जमा करवाने का प्रयास किया था. जांच रिपोर्ट में भी इस तथ्य का जिक्र है.
देवघर में जमीन घोटाले के भी आरोपी हैं
चाईबासा डीसी ने प्रपत्र क गठित करते हुए सरकार को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है.
जिसमें कहा गया है कि मनोहरपुर बीडीओ पर देवघर जमीन घोटाले का मामला चल रहा है. तब, देवेंद्र कुमार देवघर में सीओ थे.
बीडीओ की पत्नी अनुराधा कुमारी सीकेपी में है दंडाधिकारी, खेलारी निवासी हैं बीडीओ: बीडीओ देवेंद्र कुमार की पत्नी अनुराधा कुमारी चक्रधरपुर में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. वह चार माह से मातृत्व अवकाश पर हैं. बीडीओ रांची के खेलारी निवासी हैं.
20 फरवरी को बीडीओ देवेंद्र कुमार ने ली थी छुट्टी
नौ दिन बाद भी नहीं लौटे प्रखंड मुख्यालय
25 को डीसी ने डीडीसी की रिपोर्ट पर लिया संज्ञान
प्रशिक्षु उप समाहर्ता जीतेंद्र पांडेय ने 28 को लिया प्रभार
अवैध खनन मामले में डीसी ने बीडीओ पर गठित किया है प्रपत्र क
दो फरजी कंपनी बनाकर खनन करवा रहे थे
मनोहरपुर बीडीओ के खिलाफ अवैध खनन कराने की शिकायत मुख्यमंत्री जनसंवाद में की गयी थी. इसी शिकायत के आधार पर तत्कालीन डीडीसी ने चक्रधरपुर के तत्कालीन एसडीओ से मामले की जांच करायी थी. जांच में पता चला था कि मनोहरपुर बीडीओ देवी कंस्ट्रक्शन व मेसर्स शिव गुरु कंस्ट्रक्शन नाम से फरजी कंपनी बनवाकर मिट्टी, मूरुम तथा पत्थर का अवैध खनन करवा रहे हैं. एसडीओ ने जांच रिपोर्ट में बताया था कि मनोहरपुर प्रखंड कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत शिक्षक अशोक सिन्हा की पत्नी के नाम पर दोनों फर्जी कंपनियां बीडीओ के संरक्षण में चल रही हैं. दोनों कंपनियों का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है. गिट्टी, मूरुम, पत्थर की सरकारी योजना में सप्लाई की जाती थी. जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि दोनों कंपनियां सरकार को रॉयल्टी भी नहीं दे रही थी.
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