मनरेगा से नक्सली दस्ते को नहीं मिल रहे नये सदस्य
Updated at : 01 Mar 2017 1:06 AM (IST)
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माओवादी संगठन के समक्ष मैनपावर की कमी सबसे बड़ी परेशानी, कान्हू मुंडा ने किये कई खुलासे माओवादी संगठन के समक्ष मैनपावर की कमी सबसे बड़ी परेशानी, कान्हू मुंडा ने किये कई खुलासे किशन दा की मौत से वर्चस्व को लेकर दस्तों के बीच टकराव की स्थिति अब गिरफ्तार नक्सली को जेल से बाहर निकालने के […]
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माओवादी संगठन के समक्ष मैनपावर की कमी सबसे बड़ी परेशानी, कान्हू मुंडा ने किये कई खुलासे
माओवादी संगठन के समक्ष मैनपावर की कमी सबसे बड़ी परेशानी, कान्हू मुंडा ने किये कई खुलासे
किशन दा की मौत से वर्चस्व को लेकर दस्तों के बीच टकराव की स्थिति
अब गिरफ्तार नक्सली को जेल से बाहर निकालने के लिए दे रहे आवेदन
जेल से निकलते ही दस्ता में शामिल होने के लिए नक्सली करते हैं संपर्क
चाईबासा : मनरेगा समेत सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के कारण नक्सली दस्ते में लोग शामिल नहीं हो रहे हैं. संगठन में नयी बहाली ठप हो गयी है. रोजगार नहीं मिलने के कारण पूर्व में सुदूर इलाके के युवा दस्ते में शामिल हो रहे थे.
विगत कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से शुरू की गयी योजनाओं ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है. यह दावा बीते 15 फरवरी को सरेंडर करने वाले 25 लाख की इनामी नक्सली कान्हू मुंडा से मिली जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने किया है. झारखंड-ओड़िशा सीमा क्षेत्र से नक्सलियों के सफाये की मुहिम में जुटी पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के उच्चाधिकारियों ने नक्सली कान्हू मुंडा से पूछताछ की. सुरक्षा बलों के सवाल पर कान्हू ने नक्सली संगठन की गतिविधियों के बारे में कई अहम खुलासे किये.
किशन दा की मौत से संगठन बिखर जायेगा
नक्सली कान्हू मुंडा ने कहा कि नक्सली नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा उर्फ निर्मल उर्फ काजल की मौत से झारखंड के साथ-साथ सीमावर्ती ओड़िशा में नक्सलियों का साम्राज्य बिखर सकता है. अलग-अलग हिस्सों में संगठन का कामकाज देख रहे कमांडरों को अब तक किशन दा ने एक सूत्र में पिरोये रखा था. उनके नहीं रहने पर आसपास के क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर संगठन के अलग-अलग दस्तों के बीच टकराव की स्थिति हो सकती है. लिहाजा इस मसले पर पूरी तरह मंथन के बाद नक्सली संगठन आगे की रणनीति बनायेंगे.
नक्सली नहीं कर पा रहे अंतर जिला बैठक
नक्सली कान्हू ने पुलिस को बताया कि पश्चिमी सिंहभूम में संगठन का कामकाज देखने वाले नेता संदीप से बस एक बार संगठन की बैठक में मिला है.
पहले नक्सलियों के अंतर जिला बैठक वर्ष में दो बार होती थी. सुरक्षा कैंपों की लगातार बढ़ती संख्या, संगठन की विचारधारा को निचले स्तर तक पहुंचाने में समर्थ नेतृत्व की कमी और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के कारण दस्ते कमजोर हुए हैं. हाल के कुछ दिनों में सुरक्षा कारणों की वजह से नक्सली दस्तों के बीच नियमित संवाद की गति थम गयी है.
माओवादियों ने नियमों में किया संशोधन
जंगलों में अपना अस्तित्व बचाने के लिए भाकपा माओवादी संगठन ने अपने पूर्व के कुछ नियमों में संशोधन कर दिया है. इसमें पकड़े गये नक्सलियों का बेल आवेदन करने और जेल से छूटने पर तत्काल दस्ते में शामिल करने का नियम शामिल है. हालांकि पूर्व में गिरफ्तार नक्सली अपनी सजा काट कर ही जेल से निकलते थे.
इसके बावजूद उन्हें दो से तीन साल तक पार्टी से निलंबित रखा जाता था. नये सदस्यों की कमी झेल रहे संगठन के लोग अब जेल से छूटने वाले साथियों से संपर्क कर तत्काल दस्ते में शामिल कराने के प्रयत्न में लग गये हैं.
नक्सली नेता कान्हू मुंडा ने खुलासा किया है कि मनरेगा सहित सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के कारण नक्सली दस्ते को नये सदस्य नहीं मिल रहे. माइंस बंद होने से संगठन असलाह बारूद की कमी से जूझ रहा है. नक्सली नेता किशन दा की मौत से संगठन के बिखरने की आशंका जतायी है.
मनीष रंजन, एएसपी (अभियान)
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