जमाकर्ताओं को लगायी चपत

चेतना प्राइवेट लिमिटेड में गोइलकेरा के लोगों ने किया था निवेश, कार्यालय बंदगोइलकेरा : चिट फंड कंपनी चेतना प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा गोइलकेरा में कार्यालय खोलकर एजेंटों के माध्यम से लाखों रुपये की उगाही करने के बाद अब निवेशकों के पैसे वापस नहीं करने का मामला प्रकाश में आया है. जिससे निवेशक परेशान चल रहे […]
चेतना प्राइवेट लिमिटेड में गोइलकेरा के लोगों ने किया था निवेश, कार्यालय बंद
गोइलकेरा : चिट फंड कंपनी चेतना प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा गोइलकेरा में कार्यालय खोलकर एजेंटों के माध्यम से लाखों रुपये की उगाही करने के बाद अब निवेशकों के पैसे वापस नहीं करने का मामला प्रकाश में आया है.
जिससे निवेशक परेशान चल रहे हैं. जमाकर्ता दो वर्ष से उक्त कंपनी के चाईबासा स्थित कार्यालय में जाकर जमा राशि की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसका उन्हें कोई फायदा नहीं मिल रहा है. गोइलकेरा के पेट्रोल पंप रोड स्थित पुराने कैनरा बैंक भवन में चिट फंड कंपनी ने अपना कार्यालय खोला था तथा सात साल में राशि को दोगुना कर देने का वादा करते हुए कारोबार आरंभ किया.
इसके लिए एजेंट्स बहाल किये गये और उन्हें बतौर कमीशन करीब आठ से 0 फीसदी देने के प्रलोभऩ दिये गये. इस तरह से तैयार एजेंटों के नेटवर्क के माध्यम से गोइलकेरा से लाखों रुपये की वसूली की गयी. सैकड़ों लोग कंपनी के प्रलोभन में आकर अपनी गाढ़ी कमाई कंपनी के पास जमा करायी.
इसके बाद से वहां से कंपनी चंपत हो गयी. इसका पता तब चला जब जमाकर्ताओं की राशि दो गुना होने की अवधि पूरी हो गयी. जब उनके बारे में पता करने की कोशिश की गयी तो वह वहां से चंपत हो चुके थे. इस तरह से जमा करनेवाले दोगुनी राशि तो नहीं पा सके अपनी मूल कमाई से भी हाथ धो बैठे. सात साल में दोगुना राशि पाने की चाह रखने वाले जमाकर्ता अब भी राशि की खोज में उनके प्रधान कार्यालय तक जा रहे हैं, लेकिन दो वर्षो से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है.
अब वे इससे तंग आ गये हैं तथा न्यायालय में जाने की तैयारी में हैं. उक्त चिट फंड कंपनी से सिर्फ घोड़ाडूबा गांव के ही करीब 19 लोगों के करीब 34 हजार रुपए से अधिक की राशि डूबी है. जबकि इसकी जद में और भी गांव के लोग हैं. इस बाबत ग्रा़मीण मथुरा सामड कहते हैं कि उनकी 2104 रुपये की राशि जमा की थी जिसकी पूर्ण होने की तिथि छह अक्टूबर 2010 थी, लेकिन आज तक राशि नहीं मिली और न ही मिलने के आसार दिख रहे हैं.
उसी तरह घोड़ाडूबा गांव के भरत कुमार नायक (मेच्योरिटी तारीख 13 सितंबर2010, रुपये 2014), लालजी गागराई (4 अपप्रैल 2010,412 रुपये), मनीषा सामड (8 नवंबर 2010, 1908 रुपये) आदि ऐसे करीब 19 जमाकत्र्ता हैं जिनकी राशि दो वर्ष बाद भी डूबने के कगार पर है.
इनके जमा का भी पता नहीं
डूबराज पूत्तिर्, पांडू गागराई,चांदू सामड, पेलांग सुरीन, हरिश्चंद्र बांकिरा, रंजीता नायक, रामो केराई, अंजना गोप, सिंधु केराई,अवधेश सिंह,लेमसा बोदरा, रविना गोप, महेश होनहागा, चांदमुनी होनहागा, दुर्गावती होनहागा आदि हैं.
कहते हैं जमाकर्ता
चिट फंड कंपनी के संदर्भ में जमाकर्ता मथुरा सामड कहते हैं कि वह अब तक कंपनी के प्रधान कार्यालय में सात से आठ बार गये. हर बार आश्वासन दिया जाता है. इस तरह से दो वर्ष बाद भी राशि नहीं मिल रही है. कंपनी वर्तमान में मधु बाजार में एक छोटे से कमरे में है जहां कंपनी का कोई बोर्ड नहीं लगा है. उसमें भी सिर्फ एक से दो ही कर्मचारी मिलते हैं.
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