व्हाट्सएप ने दूर की दूरियां

जैंतगढ़ : पांच वर्ष पूर्व मानसिक विक्षिप्तता के कारण अपनों से बिछड़ गये जितेंद्र तिवारी सोशल मीडिया व जैंतगढ़ के समाजसेवी मुन्ना पोद्दार के प्रयास से अपना परिवार मिल गया. दरअसल 50 वर्षीय जितेंद्र तिवारी बीते एक वर्ष से जैंतगढ़ की सड़कों के किनारे रह रहा था. वह हाथ में एक माला लेकर अजीब हरकत […]
जैंतगढ़ : पांच वर्ष पूर्व मानसिक विक्षिप्तता के कारण अपनों से बिछड़ गये जितेंद्र तिवारी सोशल मीडिया व जैंतगढ़ के समाजसेवी मुन्ना पोद्दार के प्रयास से अपना परिवार मिल गया. दरअसल 50 वर्षीय जितेंद्र तिवारी बीते एक वर्ष से जैंतगढ़ की सड़कों के किनारे रह रहा था. वह हाथ में एक माला लेकर अजीब हरकत करता रहता था.
जो कुछ मिलता वही खा कर रह जाता था. कड़ाके की ठंड फुटपाथ पर बीता दी. हालांकि उसकी भाषा व बात करने का तरीका सभ्य परिवार का लगता था. एक दिन मुन्ना पोद्दार ने उससे बात की. उसकी भाषा बिहार के गोपालगंज जिले से मिलजुल रही थी. उन्होंने उसकी फोटो खींच कर बिहार के व्हाट्स एप ग्रुप में डाल दिया.
पटना शहर के सेवानिवृत्त एसपी आरके पोद्दार (पहले गोपालगंज में पदस्थापित थे) ने पोस्ट को अन्य ग्रुप में छोड़ दिया. इससे गोपालगंज जिला अंतर्गत मांझाघाट उन्होने इसकी खबर उसके परिजनों को दी.के मुखिया ने उसकी पहचान जितेंद्र तिवारी के रूप में की. जितेंद्र के दामाद व परिजन पहले जमशेदपुर पहुंचे.
यहां से मुन्ना पोद्दार के व्हाट्स एप नंबर पर संपर्क कर जैंतगढ़ पहुंचे. इसके बाद एक घंटा तक परिश्रम के बाद जितेंद्र को ढूंढ निकाला. उसे देख परिजनों की आंखें भर आयी. लोगों ने सकुशल जितेंद्र को उनके परिवार को सौंप दिया. उनके परिजनों ने मुन्ना पोद्दार की प्रशंसा की. परिजनों ने कहा कि पांच वर्ष पूर्व जितेंद्र घर से भाग गया था. हमलोग पूरी तरह से निराश हो चुके थे. वे जितेंद्र को ले कर अपने गांव चले गये.
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