सरना धर्म कोड प्रकृति पूजकों की पहचान : विधायक

Updated at : 22 May 2025 9:21 PM (IST)
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सरना धर्म कोड प्रकृति पूजकों की पहचान : विधायक

आदिवासियों की मांग को नजर अंदाज नहीं कर सकती है केंद्र सरकार

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सिमडेगा. जिला कांग्रेस कार्यालय में सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा व कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने प्रेसवार्ता कर सरना धर्म कोड लागू करने पर बल दिया. विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि सरना धर्म कोड प्रकृति पूजकों की पहचान है. झारखंड समेत अन्य पड़ोसी राज्यों में रहने वाले आदिवासी की मांग को केंद्र सरकार नजर अंदाज नहीं कर सकती है. भारत सरकार ने जातीय जनगणना में सातवां कॉलम ही नहीं रखा है. अन्य धर्म के कॉलम के लिए हम सातवें में कॉलम में सरना धर्म कोड की मांग करते हैं. हमारी सरकार ने चुनाव में किये गये वादे के अनुसार सरना धर्म कोड का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा है. आज देश में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या लगभग 10 से 15 करोड़ है. इतनी बड़ी आबादी अपने अस्तित्व के पहचान के लिए जूझ रही है. सरना धर्म कोड आवंटित कर सरकार को उन्हें पहचान देनी होगी. विधायक भूषण बाड़ा ने कहा कि यह जनगणना 2021 से लंबित जनगणना होने जा रहा है. कांग्रेस के दबाव पर जाति का जनगणना का निर्णय सरकार ने लिया है. 2011 की जनगणना में झारखंड ओड़िशा समेत अन्य राज्यों के 50 लाख लोगों ने सरना धर्म कोड अपने धर्म के कॉलम में लिखा था. जातिगत जनगणना हमारे नेता राहुल गांधी व श्री खड़गे जी के संघर्षों की जीत है और हम इसको लेकर रहेंगे. आदिवासी समुदाय अपनी पहचान के लिए लगातार सरना धर्म कोड की मांग उठा रहे हैं. सरना धर्म कोड जल, जंगल, जमीन से जुड़ा आदिवासी समुदाय की पहचान और अस्तित्व की मांग है. जैसे सभी धर्म का अपना कोड है, इसी तरह सरना धर्म कोड के लिए भी कॉलम होना चाहिए. वर्तमान जनगणना में अतिरिक्त सातवें कॉलम सरना धर्म कोड जोड़ने की मांग को लेकर 26 मई 2025 को राजभवन के समझ प्रदर्शन किया जायेगा. इसमें सिमडेगा जिला कांग्रेस की भागीदारी रहेगी.

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