Lockdown effect : नगर परिषद से आवंटित सरकारी दुकानों का किराया माफ करने की दुकानदारों ने की मांग

Updated at : 19 May 2020 7:15 PM (IST)
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Lockdown effect : नगर परिषद से आवंटित सरकारी दुकानों का किराया माफ करने की दुकानदारों ने की मांग

शहरी क्षेत्र में नगर परिषद द्वारा आवंटित दुकानदारों के समक्ष रोजी- रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. लाॅकडाउन के कारण लगातार दो माह से दुकान नहीं खुलने के कारण एक और जहां उनके समक्ष रोजी-रोटी की स्थिति उत्पन्न हो गई है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद द्वारा आवंटित सरकारी दुकानदारों से पूरा भाड़ा वसूला जा रहा है. यहां तक कि लेट फाईन भी काटा जा रहा है. इस संबंध में दुकानदारों ने स्थानीय प्रशासन समेत राज्य सरकार से किराफा माफ करने की मांग की है.

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सिमडेगा : शहरी क्षेत्र में नगर परिषद द्वारा आवंटित दुकानदारों के समक्ष रोजी- रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. लाॅकडाउन के कारण लगातार दो माह से दुकान नहीं खुलने के कारण एक और जहां उनके समक्ष रोजी-रोटी की स्थिति उत्पन्न हो गई है, वहीं दूसरी ओर नगर परिषद द्वारा आवंटित सरकारी दुकानदारों से पूरा भाड़ा वसूला जा रहा है. यहां तक कि लेट फाईन भी काटा जा रहा है. इस संबंध में दुकानदारों ने स्थानीय प्रशासन समेत राज्य सरकार से किराफा माफ करने की मांग की है.

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जानकारी के मुताबिक, नगर परिषद द्वारा 250 से भी ज्यादा दुकान लाभुकों को आवंटित किया गया है. लॉकडाउन के कारण वे सभी दुकानें बंद हो गयी. दुकान बंद होने के कारण दुकानदारों को लाखों का नुकसान हुआ है, दुकान का भाड़ा मांगे जाने पर काफी परेशान हैं. दुकानदारों का कहना है कि लॉकडाउन के कारण दुकान बंद है. ऐसी स्थिति में दुकानदारों ने उपायुक्त एवं झारखंड सरकार से मांग की है कि लॉकडाउन अवधि तक का दुकान का भाड़ा माफ किया जाये. लोगों ने जिले के दोनों विधायक से भी दुकान भाड़ा माफ कराने की गुहार लगायी है.

दुकानदारों का कहना है कि इस समय हम दुकानदार एक साथ दो-दो संकट को झेल रहे हैं. एक तो कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के कारण दुकान बंद है, वहीं दूसरी ओर सरकारी आवंटित दुकानों के किराये देने के फरमान से खासे परेशान हैं. इस संकट की घड़ी में हम दुकानदारों को सहयोग करने कोई नहीं आ रहा है.

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आदेश का पालन किया जायेगा

सिमडेगा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी देव कुमार राम ने कहा कि सरकारी दुकान का भाड़ा वे अपने स्तर से माफ नहीं कर सकते हैं. विभाग के पास यही राजस्व का जरिया है. इस संबंध में वरीय पदाधिकारियों की ओर से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है. हालांकि, वरीय पदाधिकारियों की ओर से जैसा आदेश मिलेगा, उस आदेश का पालन किया जायेगा.

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