आरटीइ के तहत 25 % सीटों पर शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करें : उपायुक्त

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 May 2026 10:08 PM

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निजी स्कूलों की फीस, हॉस्टल व्यवस्था और अतिरिक्त शुल्क वसूली पर जिला प्रशासन सख्त

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सिमडेगा. जिले में आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ) के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण पहल की है. उपायुक्त कंचन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में वर्ष 2026-27 सत्र के लिए आरटीइ के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर नामांकन, शुल्क निर्धारण और निजी विद्यालयों में संचालित हॉस्टलों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गयी. उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और किसी पात्र बच्चे को आर्थिक कारणों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित नहीं रखा जा सकता. उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला शिक्षा अधीक्षक को निर्देश दिया कि आरटीइ के तहत आरक्षित सीटों पर शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित किये जायें. शिविरों में सभी संबंधित निजी विद्यालयों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए पात्र बच्चों का चयन कर समयबद्ध तरीके से नामांकन कराने को कहा गया. समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में आरटीइ अंतर्गत नौ निजी विद्यालयों का चयन किया गया है. इनमें डीएवी पब्लिक स्कूल, सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा, रामरेखाधाम सरस्वती शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय सरखुटोली, संत जॉन्स स्कूल इंग्लिश मीडियम फरसाबेड़ा, हिलव्यू पब्लिक स्कूल, संत मेरीज इंग्लिश मीडियम स्कूल सामटोली, उर्सुलाइन प्राथमिक विद्यालय जामपानी (ठेठईटांगर), संत उर्सुला प्राथमिक विद्यालय गरजा तथा डॉन बॉस्को स्कूल जामटोली शामिल हैं. उपायुक्त ने सभी विद्यालयों में आरटीइ के तहत उपलब्ध सीटों की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी सीट को रिक्त नहीं छोड़ा जाये. बैठक में निजी विद्यालयों द्वारा लिए जा रहे शुल्क की भी समीक्षा की गयी. उपायुक्त ने कहा कि जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित शुल्क के अतिरिक्त किसी प्रकार की फीस वसूली स्वीकार्य नहीं होगी. उन्होंने कहा कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालना नियमों का उल्लंघन है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि ली गयी है, तो उसे अभिभावकों को वापस करना होगा. बैठक में जानकारी दी गयी कि जिले के 58 विद्यालयों द्वारा निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूली गयी थी, जिनमें से 44 निजी विद्यालय अतिरिक्त शुल्क वापस कर चुके हैं. जांच के दौरान कई विद्यालय नियमों के अनुरूप पाये गये, जबकि शेष विद्यालयों को एक सप्ताह के अंदर राशि लौटाने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने निजी विद्यालयों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि विद्यार्थियों व अभिभावकों पर किसी विशेष दुकान से ड्रेस, पुस्तक, कॉपी या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने का दबाव नहीं बनाया जाये. साथ ही किसी छात्र से री-एडमिशन शुल्क लेने पर रोक लगाने की बात भी कही. बैठक के दौरान राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियमों, शुल्क नियंत्रण प्रावधानों तथा उल्लंघन की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रस्तुतीकरण (पीपीटी) के माध्यम से दी गयी. निजी विद्यालयों द्वारा संचालित हॉस्टलों की व्यवस्थाओं की भी गहन समीक्षा की गयी. उपायुक्त ने कहा कि जो बच्चे अपने माता-पिता से दूर रहकर विद्यालय के हॉस्टल में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा और समुचित देखभाल की जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की है. उन्होंने निर्देश दिया कि हॉस्टलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था, नियमित स्वास्थ्य जांच, मेडिकल सुविधा, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, पर्याप्त आवासीय व्यवस्था तथा अध्ययन के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाये. बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी मिथिलेश केरकेट्टा, जिला शिक्षा अधीक्षक दीपक राम, शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी तथा जिले के निजी विद्यालयों के प्रतिनिधि एवं प्रधानाध्यापक उपस्थित थे.

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