रामनवमी पर अखाड़ा, वादन व झांकी प्रतियोगिता की समृद्ध परंपरा, 1982 से जारी भव्य आयोजन
Published by : VIKASH NATH Updated At : 23 Mar 2026 9:14 PM
रामनवमी के अवसर पर सिमडेगा में आयोजित होने वाली अखाड़ा, वादन एवं झांकी प्रतियोगिता की परंपरा वर्ष 1982 से लगातार चली आ रही है.
युवा संगम के बैदन तले 1928 में शुरू हुआ था आयोजन 1982 में एसडीओ उमाकांत प्रसाद को बनाया गया था मुख्य अतिथि अजय अखौरी की अध्यक्षता में शुरू हुआ था कार्यक्रम रविकांत साहू सिमडेगा. रामनवमी के अवसर पर सिमडेगा में आयोजित होने वाली अखाड़ा, वादन एवं झांकी प्रतियोगिता की परंपरा वर्ष 1982 से लगातार चली आ रही है. इसकी शुरुआत युवा संगम संस्था के बैनर तले हुई थी, जिसका नेतृत्व संस्थापक अध्यक्ष अजय अखौरी ने कुछ उत्साही युवाओं के साथ मिलकर किया. उस समय सिमडेगा अनुमंडल हुआ करता था और तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी उमाकांत प्रसाद इस प्रतियोगिता के पहले मुख्य अतिथि बने. प्रारंभिक वर्षों में ही इस आयोजन ने अपनी अलग पहचान बना ली थी, जिसमें सिमडेगा के विभिन्न अखाड़ों के साथ-साथ गुमला जिले के प्रतिभागियों ने भी भाग लेकर आकर्षक प्रदर्शन किया. इस आयोजन की सफलता में अजय अखौरी के साथ नागेंद्र प्रसाद, ब्रज किशोर प्रसाद, स्व. मनमोहन लाल, स्व. त्रिलोकी प्रसाद, स्व. रामू अग्रवाल, अशोक गोयल, राजकिशोर प्रसाद सहित कई लोगों का योगदान रहा. उद्घोषक के रूप में स्व. संतोष अकेला ने अपने प्रभावी संचालन से कार्यक्रम को जीवंत बनाये रखा. बाद के वर्षों में इसकी जिम्मेदारी श्री रामनवमी प्रबंधक समिति ने संभाली, जिसके तहत प्रतियोगिताएं और भी भव्य रूप लेने लगीं. इस क्रम में ओमप्रकाश पिथारिया, श्याम लाल शर्मा सहित अन्य लोगों ने सक्रिय सहयोग देकर आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. वर्तमान में कई वर्षों से अध्यक्ष लल्लु शर्मा के नेतृत्व में यह आयोजन किया जा रहा है. आज रामनवमी के अवसर पर होने वाली इन प्रतियोगिताओं को देखने के लिए शहर से बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं. अखाड़ा प्रदर्शन, वादन और झांकियों की भव्यता लोगों को आकर्षित करती है और यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है.
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