श्रमदान से ग्रामीण बना रहे बांध

Updated at : 12 May 2016 8:03 AM (IST)
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श्रमदान से ग्रामीण बना रहे बांध

परेशानी. बांध के टूट जाने से किसान नहीं कर पा रहे थे खेती वर्ष 2013 में टूटा था बांध, आवागमन भी हो गया था बाधित ठेठइटांगर(सिमडेगा) : प्रखंड के राजाबासा पंचायत के केसरा गांव में केसरा बांध वर्ष 2013 में ही अत्यधिक वर्षा के कारण टूट गया था. इससे लगभग 100 एकड़ खेत में लगी […]

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परेशानी. बांध के टूट जाने से किसान नहीं कर पा रहे थे खेती
वर्ष 2013 में टूटा था बांध, आवागमन भी हो गया था बाधित
ठेठइटांगर(सिमडेगा) : प्रखंड के राजाबासा पंचायत के केसरा गांव में केसरा बांध वर्ष 2013 में ही अत्यधिक वर्षा के कारण टूट गया था. इससे लगभग 100 एकड़ खेत में लगी फसल बरबाद हो गयी थी. साथ ही पिछले तीन साल से खेतों में किसान फसल नहीं उगा पा रहे थे. परिणाम स्वरूप क्षेत्र के किसान खासे परेशान थे. यहां के ग्रामीण कई बार प्रशासनिक पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया था, किंतु इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया.
बांध के टूट जाने से घुटबहार पंचायत के लोदरोटोली व कंटासारू एवं राजाबासा पंचायत के केसरा ,लुगूनटोली , महतोटोली , भोगता टोली, जितियाटोली आदि गांव के किसान प्रभावित हो रहे थे. विवश होकर किसानों ने श्रमदान से ही बांध का निर्माण करने का निर्णय लिया.
ग्रामीणों ने बैठक कर श्रमदान एवं धन दान से बांध बनाने का संकल्प लिया. प्रत्येक परिवार से चार सौ रुपये के हिसाब से चंदा किया गया. श्रमदान के लिए भी ग्रामीण तैयार हुए. इसके बाद बांध निर्माण का काम शुरू किया गया. एक माह से श्रमदान से बांध निर्माण का कार्य किया जा रहा है.
बांध निर्माण अब अंतिम चरण में है. बांध का निर्माण हो जाने से लगभग 100 एकड़ में बरबाद हो रही खेती को बचाया जा सकेगा. जिन खेतों में खेती नहीं हो पा रही थी, उसमें अब फसल लहलहाने की संभावना बन गयी है. किसानों ने जो धन संग्रह किया है, उससे जेसीबी मशीन व ट्रैक्टर आदि का उपयोग किया जा रहा है. बांध की लंबाई लगभग एक सौ फीट है. बांध के टूट जाने से आवागमन भी बाधित हो गया था. बांध के उपर से ही लोग आना जाना करते थे.
बच्चों को 20 किमी तय कर जाना पड़ता है स्कूल
बांध के टूट जाने से छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी हो रही थी. बरसात के दिनों में बच्चों को लगभग 20 किलाेमीटर दूरी तय कर स्कूल जाना पड़ रहा था. बच्चे जलडेगा रोड, पंडरीपानी व ठेठइटांगर होते हुए जोराम व जामपानी जाते थे. प्रत्येक दिन बच्चों को आने जाने में लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही थी. बांध के बन जाने से स्कूली बच्चों को मात्र 10 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी.
गार्ड वाल निर्माण के लिए उपायुक्त से मिलेंगे ग्रामीण
ग्रामीण श्रमदान से बांध का निर्माण तो कर रहे हैं, किंतु बिना गार्डवाल के बांध कमजोर पड़ जायेगा. ग्रामीणों के पास इतनी राशि नहीं है कि वह गार्डवाल का निर्माण करा सकें. इसके लिये ग्रामीणों ने उपायुक्त एवं जिला परिषद अध्यक्ष से मिल कर गार्डवाल निर्माण के लिए ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है. ग्रामीणों ने बताया कि एक-दो दिन के अंदर उपायुक्त व जिप अध्यक्ष से मिल कर गार्डवाल निर्माण की गुहार लगायेंगे.
प्रशासनिक उपेक्षा के कारण करना पड़ा श्रमदान
श्रमदान से बांध का निर्माण कर रहे घुटबहार एवं राजाबासा पंचायत के ग्रामीणों का कहना है कि बांध निर्माण को लेकर कई बार प्रशासनिक पदाधिकारियों से गुहार लगायी. निवर्तमान उपायुक्त ने बांध का निरीक्षण करते हुए बांध निर्माण का आश्वासन दिया था, किंतु इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी.
इस संबंध में केसरा निवासी कोमल डांग का कहना है कि बांध के टूट जाने से हम अपने खेतों में खेती नहीं कर पा रहे थे. खेतों में पानी भर जाता था. कुसुमटोली निवासी जयमसीह समद ने कहा कि पिछले कई साल से हम खेती नहीं कर पा रहे थे. परिणाम स्वरूप हम भुखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं. लुगूनटोली निवासी जुनाथन लुगून, कलन लुगून, केसरा निवासी समसोन लुगून , ललित समद, घुटबहार लोदरोटोली निवासी ओलिभ बागे आदि का कहना है कि प्रशासनिक उपेक्षा से हम परेशान हो चुके थे.
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