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गांव-गांव घूमकर बच्चों को फुटबॉल सिखा रहीं कुचाई की नंदिनी, सुब्रतो कप में दिखाया जौहर

Updated at : 08 Mar 2026 9:38 AM (IST)
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Womens Day Special

गांव के बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग देने वाली कुचाई की नंदिनी लागुरी. फोटो: प्रभात खबर

Womens Day Special: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड की नंदिनी लागुरी गांव के बच्चों को फुटबॉल की ट्रेनिंग देकर नई प्रतिभाएं तैयार कर रही हैं. सुब्रतो कप, जूनियर और सीनियर नेशनल में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर चुकी नंदिनी रोज सुबह 60 से अधिक बच्चों को ड्रिब्लिंग, पासिंग और बॉल कंट्रोल जैसी तकनीक सिखाती हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Womens Day Special: सरायकेला-खरसावां जिले के कुचाई प्रखंड के मरांगहातु गांव की नंदिनी लागुरी आज गांव के बच्चों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. अगर जुनून और समर्पण हो, तो छोटे गांव से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं. 25 साल की नंदिनी लागुरी गांव-गांव जाकर बच्चों को फुटबॉल के गुर सिखा रही हैं और नई पीढ़ी को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं. नंदिनी लागुरी सुब्रतो कप फुटबॉल टूर्नामेंट में झारखंड का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं.

ग्रामीण बच्चों दे रही हैं सही दिशा

नंदिनी लागुरी का लक्ष्य सिर्फ खेल सिखाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को सही दिशा देना भी है. वे चाहती हैं कि गांव के बच्चे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलकर अपने क्षेत्र का नाम रोशन करें. यही वजह है कि वह हर दिन मैदान में बच्चों के साथ मेहनत करती हैं और उन्हें खेल की बारीकियां समझाती हैं.

13 साल की उम्र से शुरू किया फुटबॉल का सफर

नंदिनी लागुरी ने बताया कि उनका फुटबॉल से जुड़ाव बहुत कम उम्र में ही हो गया था. उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में फुटबॉल खेलना शुरू कर दिया था. खेल के प्रति उनके जुनून और मेहनत को देखते हुए उन्हें आगे प्रशिक्षण लेने का मौका मिला. उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुवा के फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके साथ ही, रांची में भी उन्होंने बतौर खिलाड़ी फुटबॉल की ट्रेनिंग ली. लगातार अभ्यास और मेहनत के दम पर नंदिनी ने अपने खेल को निखारा और धीरे-धीरे वह एक प्रतिभाशाली फुटबॉलर के रूप में पहचान बनाने लगीं.

राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में किया झारखंड का प्रतिनिधित्व

नंदिनी लागुरी ने सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि बड़े मंचों पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है. उन्होंने जूनियर नेशनल और सीनियर नेशनल फुटबॉल प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया. इसके अलावा, देश की प्रतिष्ठित सुब्रतो कप फुटबॉल प्रतियोगिता में भी वह झारखंड की ओर से खेल चुकी हैं. इस प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिलना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. नंदिनी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से यह मुकाम हासिल किया और अपने जिले तथा राज्य का नाम रोशन किया.

अब कोच बनकर तैयार कर रहीं नई प्रतिभाएं

एक खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने के बाद अब नंदिनी लागुरी ने अपने अनुभव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का फैसला किया है. वर्ष 2024 से वह कुचाई प्रखंड के विभिन्न गांवों के बच्चों को फुटबॉल का प्रशिक्षण दे रही हैं. छोटा सोगोई, तिलोपदा, अरुवां और मरांगहातु पंचायत के छोटे-छोटे बच्चे हर दिन सुबह मैदान में पहुंचते हैं, जहां नंदिनी उन्हें फुटबॉल की बुनियादी तकनीक सिखाती हैं. इस समय करीब 60 से 70 बच्चे नियमित रूप से उनके पास प्रशिक्षण लेने आते हैं.

फुटबॉल की बारीकियों का कराती हैं अभ्यास

नंदिनी बच्चों को सिर्फ खेलना ही नहीं सिखातीं, बल्कि फुटबॉल की हर छोटी-बड़ी तकनीक पर ध्यान देती हैं. वह बच्चों को बॉल कंट्रोल, ड्रिब्लिंग और पासिंग जैसी बुनियादी तकनीकों का अभ्यास कराती हैं. इसके अलावा, स्टेपओवर, मैजिक स्पिन, जगलिंग और डिफेंडर को छकाने वाली स्किल्स का भी नियमित अभ्यास करवाती हैं. इन तकनीकों की मदद से बच्चे फुटबॉल के खेल में धीरे-धीरे निपुण होते जा रहे हैं. नंदिनी का मानना है कि सही प्रशिक्षण और लगातार अभ्यास से ही खिलाड़ी बेहतर बन सकता है.

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कुचाई से निकलेंगे देश के खिलाड़ी

नंदिनी लागुरी को पूरा भरोसा है कि अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो गांवों से भी बेहतरीन खिलाड़ी निकल सकते हैं. वह चाहती हैं कि कुचाई क्षेत्र के बच्चे भी बड़े मंचों तक पहुंचें. वे अपने जिले और राज्य का नाम रोशन करें. उनका कहना है कि कई बच्चे अब तेजी से खेल सीख रहे हैं और मैदान में अच्छा प्रदर्शन भी कर रहे हैं. नंदिनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में कुचाई से भी कई प्रतिभाशाली फुटबॉलर निकलेंगे, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएंगे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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