Seraikela Kharsawan News : मंदिरों से लेकर पूजा पंडालों में कल पूजे जायेंगे विघ्नहर्ता

Edited by AKASH
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सरायकेला-खरसावां में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारी शुरू हो गयी है. जिले में एक हजार से अधिक स्थानों पर भगवान गणेश की पूजा होगी.

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खरसावां.

सरायकेला-खरसावां में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारी शुरू हो गयी है. जिले में एक हजार से अधिक स्थानों पर भगवान गणेश की पूजा होगी. इस वर्ष 27 अगस्त को गणेश चतुर्थी है. दोपहर को पूजा का शुभारंभ होगा. इस दौरान घर, मंदिर और पंडालों में गणेश उत्सव धूमधाम से मनायी जायेगी. भादो मास की चौथ को जब विघ्नहर्ता गणेश के जयकारे गूंजेंगे, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठेगा. इसके तीन दिन बाद भाव-विह्वल माहौल में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जायेगा.

आस्था और कला का अनोखा संगम

गणेश उत्सव को लेकर जिला में विघ्नहर्ता की प्रतिमाओं का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा है. कारीगर अब प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं. कच्ची मिट्टी से लेकर प्लास्टर तक, हर मूर्ति में आस्था और कला का अनोखा संगम झलक रहा है. इस बार पांच फीट से लेकर नौ फीट की प्रतिमाओं के ऑर्डर मिले हैं. भले ही बारिश से थोड़ी परेशानी हुई हो, लेकिन मूर्तिकारों का कहना है कि सभी प्रतिमाएं समय पर रंग-बिरंगी सजावट के साथ तैयार हो जायेंगी. ऑर्डर पर बाजार में डेढ़ हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक की मूर्तियां तैयार की गयी है.

पूजा को लेकर बाजार में रौनक, 12 से 36 इंच की रेडीमेड मूर्तियां सबसे ज्यादा बिक रहीं

गणेश पूजा को लेकर पूजा सामग्री की दुकानों में भी चहल-पहल बढ़ गयी है. दुकानदारों के अनुसार, 12 से 36 इंच की रेडीमेड मूर्तियां सबसे ज्यादा बिक रहीं हैं. मिट्टी की मूर्तियों की भी खास डिमांड है, क्योंकि इन्हें पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है. साधारण मूर्ति की कीमत 150 रुपये से शुरू है. भक्त अपने-अपने घरों में पूजा के लिए धोती, वस्त्र, मुकुट, माला और मोदक का इंतजाम कर रहे हैं. समितियां भी तीन, सात और दस दिनों की पूजा विधि-विधान से कराने की तैयारी में जुटी हैं. गणेश चतुर्थी के दिन हर पंडाल में रोशनी, सजावट और भक्ति गीतों की गूंज से माहौल आनंदमय होगा.

गणेश चतुर्थी पर दो-तीन साल के बच्चे करेंगे विद्यारंभ

गणेश चतुर्थी पर नन्हें बच्चे विद्यारंभ करेंगे. इसे स्थानीय भाषा में ””खड़ी छुंआ”” कहा जाता है. इसमें दो-तीन साल के बच्चे बुद्धिदाता भगवान गणेश की पूजा कराने के बाद विधिवत रूप से लिखने पढ़ने की शुरुआत करते हैं. बच्चे चोक व स्लेट पर लिख कर विद्यारंभ करते हैं. गणेश चतुर्थी या बसंत पंचमी के दिन विद्यारंभ करना काफी शुभ माना जाता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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