चांडिल.
चांडिल बाजार स्थित श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति इस वर्ष 153वां दुर्गा उत्सव मना रही है. वर्ष 1872 से चली आ रही इस परंपरा को अब भी बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार भव्य रूप में निभाया जा रहा है. यह पूजा क्षेत्र की सबसे प्राचीन और विशिष्ट दुर्गा पूजा में से एक मानी जाती है. इस बार पूजा को खास और भव्य बनाने के लिए पश्चिम बंगाल के चंदनपुर से आकर्षक विद्युत सजावट मंगाई गयी है. पूरे चांडिल बाजार को लाइटिंग से सजाया गया है, जिससे शाम ढलते ही पूरा क्षेत्र जगमगा उठता है. लाइट देखने के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे हैं.महिलाएं निभा रही हैं नेतृत्व की भूमिका
पूजा आयोजन में चांडिल बाजार की बेटियां, बहुएं और महिलाएं भी पूरी सक्रियता से भाग ले रही हैं. महिलाओं ने एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर आपसी संवाद और आर्थिक सहयोग से आयोजन को सफल बनाने की जिम्मेदारी ली है. पिछले 30 वर्षों से इस दुर्गा पूजा समिति का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं, जो एक प्रेरणादायी पहल है.
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भरमार
इस वर्ष पूजा के दौरान कई सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. सप्तमी को मां दुर्गा के आगमन पर भगवान शिव-पार्वती की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता और डांडिया नृत्य होगा. अष्टमी को बच्चों के बीच डांस प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी. नवमी को संगीत और नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन होगा. विजया दशमी के दिन महिलाएं विसर्जन जुलूस निकालेंगी.पूजा पर खर्च होंगे 10 लाख रुपये
लाइटिंग पर लगभग 7 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि पूरे आयोजन का अनुमानित बजट 10 लाख रुपये से अधिक है. आयोजन को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए समिति के सदस्य पूरी निष्ठा और उत्साह के साथ जुटे हुए हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

