पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अनादर पर गरजे अर्जुन मुंडा, ममता सरकार पर तीखा हमला

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा. फाइल फोटो
Arjun Munda Statement: पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ हुए कथित अपमानजनक व्यवहार को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद, आदिवासी समाज और लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक घटना है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Arjun Munda Statement: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने पश्चिम बंगाल सरकार और वहां की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है. अर्जुन मुंडा ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की बात करने वाले लोगों द्वारा राष्ट्रपति का अपमान किया जाना पूरे देश के लिए चिंता का विषय है.
राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर : अर्जुन मुंडा
अर्जुन मुंडा ने कहा कि राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होते हैं और उनका पद किसी भी प्रकार की राजनीतिक सीमाओं से ऊपर होता है. इसलिए इस पद का सम्मान हर परिस्थिति में किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक मतभेद के बावजूद राष्ट्रपति के प्रति सम्मान और मर्यादा बनाए रखना सभी दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति की पीड़ा और नाराजगी से देश के करोड़ों लोग आहत और दुखी हैं.
आदिवासी महिला का अपमान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं. ऐसे में उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाना केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है. उन्होंने कहा कि यह घटना देश की गरिमा और लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंचाने वाली है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती हैं.
लोकतंत्र में मतभेद संभव, लेकिन मर्यादा जरूरी
अर्जुन मुंडा ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों और नीतियों को लेकर मतभेद होना स्वाभाविक है. अलग-अलग दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी होती है, लेकिन इसके बावजूद मर्यादा और सम्मान की सीमाएं कभी नहीं टूटनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पूरे राष्ट्र की प्रतीक होती हैं और उनके प्रति असम्मानजनक व्यवहार हमारी लोकतांत्रिक संस्कृति पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं से देश की छवि पर भी असर पड़ता है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर अर्जुन मुंडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने पोस्ट में पश्चिम बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बंगाल में जिस कुत्सित मानसिकता के साथ राष्ट्रपति के साथ व्यवहार किया गया है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की मानसिकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए.
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पूरे देश में नाराजगी का माहौल
अर्जुन मुंडा ने कहा कि राष्ट्रपति के साथ हुए इस व्यवहार को लेकर पूरे देश में नाराजगी और दुख का माहौल है. लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाले लोग इस घटना से बेहद निराश हैं. उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचती है. इसलिए सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो और देश की संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान हमेशा सर्वोपरि बना रहे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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