सरायकेला के पतपत के टोला वरगी फुट में नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

Anti Drug Awareness Program: झारखंड के सरायकेला स्थित पतपत के टोला वरगी फुट गांव में जिला विधिक सेवा प्राधिकार सरायकेला-खरसावां के निर्देश पर नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों को नशे के दुष्परिणाम, उससे होने वाली सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं तथा नशा मुक्त भारत अभियान की जानकारी दी. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट
Anti Drug Awareness Program: झारखंड के सरायकेला पतपत के टोला वरगी फुट गांव में शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार सरायकेला-खरसावां के सचिव महोदय के आदेशानुसार नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में अधिकार मित्र हरि कुंभकार एवं दिनेश कुंभकार ने ग्रामीणों को नशे से होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और सभी से नशे से दूर रहने की अपील की.
नशे के दुष्परिणामों पर जागरूकता
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि किसी एक व्यक्ति की नशे की लत पूरे परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. नशे की सामग्री व्यक्ति को शुरुआत में उत्तेजित करती है लेकिन धीरे-धीरे वह उसे मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बना देती है. इससे आत्मविश्वास में कमी आती है, जीवन में निराशा बढ़ती है और चिड़चिड़ापन उत्पन्न होता है. यह आदत व्यक्ति की सफलता और रोजमर्रा के कार्यों में बाधा बनती है. नशे से दूर रहना ही इसका सर्वोत्तम उपचार है और इसकी आदत छोड़ने के लिए सकारात्मक सोच रखने वाले तथा नशामुक्त लोगों के साथ अधिक समय बिताना आवश्यक है.
नशा मुक्त भारत अभियान की जानकारी
इस अवसर पर वर्ष 2020 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा प्रारंभ किए गए नशा मुक्त भारत अभियान की भी विस्तृत जानकारी दी गई. यह अभियान मादक द्रव्यों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है जो जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श सेवाएं और पुनर्वास के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्चक्र से बाहर निकालने का प्रयास करता है.
अभियान के उद्देश्य और महत्व
ग्रामीणों को बताया गया कि अभियान का उद्देश्य नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाना, तस्करी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना और निर्माण तथा बिक्री को नियंत्रित करना है. साथ ही जो लोग पहले से नशे के आदी हैं उन्हें परामर्श, पुनर्वास केंद्र और दवा के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है. अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य समाज में जागरूकता फैलाना है ताकि लोग समझ सकें कि नशीले पदार्थ उनके स्वास्थ्य और जीवन के लिए कितने हानिकारक हैं. परिवारों, समुदायों और धार्मिक नेताओं की भागीदारी से ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है जहां नशे का दबाव न हो और जरूरत पड़ने पर सहायता आसानी से उपलब्ध हो सके.
स्वस्थ समाज का निर्माण करती है नशामुक्त जीवनशैली
भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास के संदर्भ में यह अभियान अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि नशामुक्त जीवनशैली स्वस्थ समाज के निर्माण में सहायक है, इससे उत्पादक कार्यबल का विकास होता है, सामाजिक सद्भाव मजबूत होता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की सकारात्मक छवि बनती है.
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कार्यक्रम में ये भी रहे उपस्थिति
इस मौके पर ग्रामीण जनता के साथ ग्राम के वार्ड सदस्य राजकिशोर हांसदा भी उपस्थित थे. कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को नशा मुक्ति के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया गया.
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By Kumarvishwat Sen
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