सारंडा के बीहड़ में खुल गई विकास की पोल, कोल्हान रक्षा संघ की बैठक में लगी समस्याओं की झड़ी

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :24 Mar 2026 12:34 PM (IST)
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Saraikela News

नोवामुंडी प्रखंड के पोखरिया गांव में आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ बात करते कोल्हान रक्षा संघ के पदाधिकारी. फोटो: प्रभात खबर

Saraikela News: सारंडा के पोखरिया गांव में कोल्हान रक्षा संघ की बैठक में आदिवासियों ने विकास की पोल खोल दी. वन पट्टा, कुपोषण, पेंशन और रोजगार जैसी समस्याएं उजागर हुईं. योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी दिखी. बैठक में कई सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सारंडा से अनिल तिवारी की रिपोर्ट

Saraikela News: सारंडा के बीहड़ों में विकास कार्यों की कलई उस समय खुल गई, जब कोल्हान रक्षा संघ ने नोवामुंडी प्रखंड के पोखरिया गांव में आदिवासियों के साथ बैठक की. इस बैठक में गांव के निवासियों ने संघ के अधिकारियों के सामने समस्याओं की झड़ी लगा दी. इस बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष हस पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डिबार जोंकों ने की. इस बैठक में संघ के सचिव के साथ काफी संख्या में मुंडा-माणकी समुदाय के लोग पहुंचे थे.

वन पट्टा और संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी

बैठक के दौरान सबसे गंभीर मुद्दा वन पट्टा नहीं मिलने का उठा. ग्रामीणों ने बताया कि राजस्व गांव होने के बावजूद आज तक उन्हें वन अधिकार नहीं मिला है. पांचवीं अनुसूची में आने वाले इस क्षेत्र में अधिकारों से वंचित होना संविधान की भावना के विपरीत बताया गया. लोगों ने इस पर गहरा आक्रोश जताया.

कुपोषण और पोषाहार योजना की विफलता

गांव में कुपोषण की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई. महिलाओं और बच्चों ने बताया कि पोषाहार केंद्र से उन्हें नियमित पोषण आहार नहीं मिल रहा है. उनके शरीर पर कुपोषण के लक्षण साफ दिखाई रहे थे. यह स्थिति बताती है कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका लाभ नहीं पहुंच पा रहा.

मंईयां सम्मान योजना में भारी गड़बड़ी

बैठक में मंईयां सम्मान योजना की खामियां भी सामने आईं. करीब 300 महिलाओं में से केवल एक महिला को इस योजना का लाभ मिला था. इससे साफ है कि योजना का क्रियान्वयन बेहद कमजोर है और पात्र लाभार्थियों तक सुविधा नहीं पहुंच रही.

कम होती औसत आयु और स्वास्थ्य संकट

ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में औसत आयु काफी कम है. हजारों की भीड़ में केवल 48 वर्ष के 12 लोग ही मौजूद थे. इससे यह संकेत मिलता है कि कुपोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों की उम्र कम हो रही है. यह एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है.

पेंशन और रोजगार की समस्याएं

वृद्धावस्था पेंशन योजना कई महीनों से बंद पड़ी है, जिससे बुजुर्गों को भारी परेशानी हो रही है. रोजगार के नाम पर लोग जंगल से पत्ता, दातुन और लकड़ी बेचकर जीवन यापन कर रहे हैं. लेकिन वन विभाग की कार्रवाई के डर से यह भी जोखिम भरा काम बन गया है.

शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति

शिक्षा के क्षेत्र में भी हालात बेहद खराब हैं. पोखरिया गांव में एकमात्र विद्यालय है, जो केवल एक पारा शिक्षक के भरोसे चल रहा है. यह स्थिति ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाती है.

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बैठक में शामिल प्रमुख लोग

इस बैठक की अध्यक्षता कोल्हान रक्षा संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी डिबार जोंको ने की. इस दौरान मानसिंह हेंब्रम, रविंद्र मंडल, जयसिंह हेंब्रम, पूनम मेम्बरम, शिवानंद किस्कू, सुमित्रा जोंकों, मंगल सिंह लागुरी और राउतु गागराई सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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