तुपुडांग गांव के चड़क मेले में अनोखा प्रदर्शन, पीठ में लोहे की कील घोंप भगवान शिव के प्रति दिखाई आस्था

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चड़क मेले में पीठ में लोहे की कील घोंपकर घूमते श्रद्धालु. फोटो: प्रभात खबर

Jamshedpur News: जमशेदपुर के तुपुडांग गांव में चड़क मेले के दौरान भक्तों ने पीठ में लोहे की कील घोंपकर भगवान शिव के प्रति आस्था दिखाई. 144 साल पुरानी रजनी फोड़ा परंपरा में श्रद्धालु खंभे से लटककर नृत्य करते हैं. इस अनोखे आयोजन को देखने दूर-दूर से लोग पहुंचे और पूजा-अर्चना की. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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तुपुडांग से दशमत सोरेन की रिपोर्ट

Jamshedpur News: झारखंड के जमशेदपुर के परसुडीह क्षेत्र स्थित तुपुडांग गांव में बुधवार को श्री श्री चड़क पूजा कमेटी ओर से आयोजित चड़क मेले में श्रद्धा और भक्ति का एक अद्भुत संगम देखने को मिला. यहां भगवान शंकर के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हुए भक्तों ने 144 साल पुरानी रोंगटे खड़े कर देने वाली रजनी फोड़ा परंपरा का निर्वहन किया.

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भगवान शिव की आराधना

इस अनुष्ठान के दौरान भक्तों ने अपनी पीठ पर लोहे की नुकीली कीलें (हुक) चुभवाईं और फिर गमछे के सहारे खुद को करीब 50 फीट ऊंचे लकड़ी के खंभे से बांधकर हवा में लटकते हुए नृत्य किया. लकड़ी के खंभे के ऊपर भक्तों को खंभे के चारों ओर तीन चक्कर घुमाया गया. इस अद्भुत नृत्य को देखने के लिए कोल्हान के विभिन्न कोनों से सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे. रजनी फोड़ा में भोक्ताओं ने अपनी पीठ में लोहे की कील घोंप कर भगवान शिव की आराधना की. मिथुन लोहार और महेश लोहार नामक भोक्ताओं ने अपनी पीठ में लोहे की कील घोंप कर शिव के प्रति आस्था दिखाई.

मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व जिप उपाध्यक्ष मौजूद

मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह मौजूद थे. उन्होंने कहा कि मान्यता है कि तुपुडांग चड़क पूजा मेले में भगवान शिव का आशीर्वाद मिलने से हर मनोकामना पूरी होती है. इसी आशा व विश्वास के साथ श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है. वे खुद पिछले 16-17 सालों से लगातार भगवान शिव की आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आ रहे हैं. इस अवसर पर श्री श्री चड़क पूजा कमेटी भीमसेन भूमिज, सूरज महतो समेत अन्य मौजूद थे.

घाव में लगाते हैं सिंदूर, 10-12 दिनों में हो जाता है ठीक

महेश लोहार ने बताया कि वे पिछले 14 सालों से रजनी फोड़ा में शामिल हो रहे हैं. वे हर साल अपनी पीठ पर लोहे के कील लगवाते हैं. कील लगाते समय थोड़ा सा दर्द होता है. उसके बाद कोई परेशानी नहीं होती है. रजनी फोड़ा परंपरा का निर्वाह के बाद जब लोहे के कील को निकाल देते हैं. उसमें किसी तरह का कोई दवा का उपयोग नहीं करते हैं. वे भगवान शिव की पूजा में उपयोग किये गये सिंदूर को पीठ के घाव में लगाते हैं. 10-12 दिन के बाद घाव पूरी तरह से भर जाता है. उन्होंने बताया कि इतने सालों में कभी उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई. भगवान शिव पर आस्था है, इसलिए वे परेशानी के लिए बारे में तो सोचते तक नहीं हैं.

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मन्नत मांगने के लिए श्रद्धालुओं की लगी लंबी कतार

तुपुडांग चड़क मेले में कोल्हान के विभिन्न हिस्सों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. शिव मंदिर में आयोजित चड़क पूजा में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. मंदिर के पास स्थित तालाब में भोक्ताओं व श्रद्धालुओं ने स्नान कर पूजा-अर्चना की. कई भोक्ता व श्रद्धालु तपती दोपहरी में जमीन पर लोटते हुए मंदिर पहुंचे. सभी भोक्ताओं ने मंदिर की परिक्रमा कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और अपने परिवार के कुशल-मंगल जीवन के लिए आशीर्वाद मांगा. लोगों की आस्था है कि यहां मन्नत मांगने से उनकी मनोकामना पूरी होती है. इस वजह से दूर-दराज से लोग परिवार सहित चड़क मेले में पहुंचे थे.

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