बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर बरसे चंपाई सोरेन, बोले- जमीनी हकीकत कुछ और, कागजों पर चल रही योजनाएं

पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन
Champai Soren: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. गढ़वा में एंबुलेंस नहीं मिलने पर एक बेटा अपनी घायल मां को ठेले पर लादकर अस्पताल ले जाने को मजबूर हुआ. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने इस खबर को साझा करते हुए सरकार पर तीखा प्रहार किया है. उन्होंने पूछा कि आखिर कब तक राज्य की जनता ठेले और खाट के भरोसे रहेगी? पढ़ें, पूरी रिपोर्ट.
Champai Soren, सरायकेला : पूर्व मुख्यमंत्री सह सरायकेला से भाजपा विधायक चंपाई सोरेन ने एक बार फिर राज्य की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने ‘प्रभात खबर’ में प्रकाशित एक खबर को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए झारखंड की मौजूदा स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. चंपाई सोरेन ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
गढ़वा की घटना ने पेश की शर्मनाक तस्वीर
दरअसल, यह पूरा मामला गढ़वा जिले का है, जहां एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है. तस्वीर में साफ दिख रहा है कि एंबुलेंस जैसी प्राथमिक सुविधा नहीं मिलने के कारण एक बेबस बेटा अपनी घायल बुजुर्ग मां को ठेले पर बैठाकर अस्पताल ले जा रहा है. जानकारी के अनुसार, महिला सोमवार शाम सड़क पार करने के दौरान घायल हो गई थी. समय पर एंबुलेंस के लिए कॉल किया गया, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी वाहन नहीं पहुंचा, जिसके बाद परिजनों को यह कदम उठाना पड़ा.
व्यवस्था को दिखाया आईना, लगाया अनदेखी का आरोप
इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि यह तस्वीर झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को आईना दिखाने के लिए काफी है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव बेहद चिंताजनक है और यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता है. उन्होंने अफसोस जताया कि आए दिन मरीजों को ठेले या खाट पर अस्पताल ले जाने की तस्वीरें आती रहती हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.
अस्पतालों में संसाधनों की कमी का दावा
विधायक चंपाई सोरेन ने केवल एंबुलेंस ही नहीं, बल्कि अस्पतालों की आंतरिक स्थिति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में न तो पर्याप्त दवाइयां हैं, न जांच की समुचित सुविधा है और न ही डॉक्टरों की पर्याप्त संख्या है. उन्होंने सरकार पर बेपरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि आम जनता के स्वास्थ्य को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है और सरकार केवल कागजी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में व्यस्त है.
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By समीर उरांव
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