सरायकेला-खरसावां में जनवरी 2025 से अब तक 85 आगजनी की घटनाएं, अग्निशमन विभाग ने निभाई अहम भूमिका

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :14 Apr 2026 12:24 PM (IST)
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Seraikela News

सरायकेला-खरसावां में खड़ी दमकल विभाग की गाड़ी और इनसेट में फायर ऑफिसर. फोटो: प्रभात खबर

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले में जनवरी 2025 से 13 अप्रैल तक 85 आगजनी घटनाएं दर्ज की गई हैं. अग्निशमन विभाग ने त्वरित कार्रवाई कर बड़े नुकसान को रोका. 14 से 20 अप्रैल तक अग्निशमन सेवा सप्ताह मनाया जाएगा, जिसमें जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण और सुरक्षा उपायों की जानकारी आम जनता को दी जाएगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश और धीरज कुमार की रिपोर्ट

Seraikela News: सरायकेला-खरसावां जिले में जनवरी 2025 से 13 अप्रैल तक आगजनी की कुल 85 घटनाएं दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं में जिला अग्निशमन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए समय पर मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और बड़े नुकसान को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. विभाग की सक्रियता से कई जान-माल की रक्षा संभव हो सकी.

अग्निशमन सेवा सप्ताह 14 से 20 अप्रैल तक

अग्निशमन विभाग की ओर से 14 अप्रैल से 20 अप्रैल तक अग्निशमन सेवा सप्ताह मनाया जाएगा. इस दौरान विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. अग्निशमन पदाधिकारी ऋषि तिवारी ने बताया कि यह सप्ताह लोगों को आग से सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और आपात स्थिति में सही कदम उठाने की जानकारी देने के लिए समर्पित है.

अग्निशमन सेवा दिवस का ऐतिहासिक महत्व

ऋषि तिवारी ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 14 अप्रैल को अग्निशमन सेवा दिवस मनाया जाता है. यह दिन 1944 में मुंबई के विक्टोरिया डॉक (फोर्ट स्टिकाइन जहाज) में हुए भीषण विस्फोट में शहीद हुए 66 अग्निशामकों की स्मृति में मनाया जाता है. यह घटना देश के अग्निशमन इतिहास में एक दुखद और प्रेरणादायक अध्याय है.

जिले में सात दमकल वाहन तैनात

सरायकेला-खरसावां जिले में कुल सात अग्निशमन वाहन तैनात हैं. इनमें सरायकेला जिला मुख्यालय में दो, आदित्यपुर में तीन और चांडिल में दो वाहन शामिल हैं. ये सभी वाहन किसी भी आगजनी या आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहते हैं. इन वाहनों के माध्यम से जिले में आपातकालीन सेवाएं प्रभावी ढंग से दी जा रही हैं.

प्रशिक्षित दमकलकर्मियों की अहम भूमिका

अग्निशमन विभाग में उच्च स्तर के तकनीकी रूप से प्रशिक्षित कर्मी कार्यरत हैं, जो अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान और संपत्ति बचाते हैं. आग जैसी भयावह स्थिति में ये कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण पाने का प्रयास करते हैं. उनकी तत्परता और साहस के कारण कई बड़े हादसों को टाला जा सका है.

जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम

अग्निशमन सेवा सप्ताह के दौरान स्कूल, कॉलेज, कंपनियों और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. लोगों को आग से बचाव के उपाय, आपात स्थिति में क्या करना चाहिए और अग्निशमन यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी जाएगी. इससे आम नागरिकों की सुरक्षा क्षमता को मजबूत किया जाएगा.

शहीद अग्निशामकों को श्रद्धांजलि कार्यक्रम

14 अप्रैल को अग्निशमन सेवा दिवस पर विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस दौरान मुंबई बंदरगाह पर शहीद हुए अग्निशामकों को याद किया जाएगा. यह कार्यक्रम अग्निशमन कर्मियों के बलिदान और सेवा भावना को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा.

आग लगने के प्रमुख कारण और चेतावनी

अग्निशमन पदाधिकारी ऋषि तिवारी ने बताया कि अधिकतर आगजनी की घटनाएं लोगों की लापरवाही के कारण होती हैं. बंद स्थानों पर आतिशबाजी, जलती बीड़ी-सिगरेट को सूखी घास या कचरे में फेंकना जैसी लापरवाहियां बड़ी घटनाओं का कारण बनती हैं. उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और आग के प्रति जागरूक रहने की अपील की है.

विभाग के मुख्य कार्य और जिम्मेदारियां

अग्निशमन विभाग केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई महत्वपूर्ण कार्य हैं. इसमें आग लगने पर त्वरित प्रतिक्रिया, बचाव कार्य, इमारत ढहने या सड़क दुर्घटनाओं में सहायता, और खतरनाक परिस्थितियों में राहत कार्य शामिल हैं. इसके अलावा विभाग जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित जीवन जीने की जानकारी भी देता है.

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आपदा प्रबंधन में बहुआयामी भूमिका

अग्निशमन विभाग बहुआयामी भूमिका निभाता है. यह केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा आपात स्थिति, रासायनिक रिसाव, जल आपदा और अन्य आपदाओं में भी सक्रिय भूमिका निभाता है. विभाग की यह व्यापक भूमिका जिले की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाती है और लोगों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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