आदिवासी दिशोम जाहेरगाढ़ सीनी में मनाया गया बाहा पर्व, डॉ मीरा मुंडा मुख्य अतिथि

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सीनी में बाहा परब पर उपहार देतीं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी डॉ मीरा मुंडा. फोटो: प्रभात खबर

Baha Parab: झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के सीनी स्थित आदिवासी दिशोम जाहेरगाढ़ में बाहा पर्व धूमधाम से मनाया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथियों की उपस्थिति रही और करीब 30 मांझी बाबा को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. 30 गांवों से आए आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य-गीत प्रस्तुत किए. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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सरायकेला से शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट

Baha Parab: सरायकेला के सीनी स्थित आदिवासी दिशोम जाहेरगाढ़ में पारंपरिक आस्था और उल्लास के साथ बाहा पर्व मनाया गया. इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए. लगभग 30 गांवों से आए महिला-पुरुष अपने-अपने नृत्य मंडलों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और पूजा-अर्चना की. यहां पर बाहा परब मनाने आए लोगों ने पारंपरिक तरीके से अपने-अपने कानों पर सरई फूल (सखुआ का फूल) लगाकर सरखोसी की. इससे पूरा परिसर पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य से गूंज उठा.

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मुख्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

बाहा परब के कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी डॉ मीरा मुंडा के बालों में सरई फूल खोंसती महिला. फोटो: प्रभात खबर

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ मीरा मुंडा, देश पारगाना फकीर मोहन टुडू और दुगनी पीठ पारगना दिवाकर सोरेन उपस्थित रहे. वहीं, अति विशिष्ट अतिथियों में सीनी मुखिया जयंती मुर्मू, मोहितपुर मुखिया सूर्यमणि हेंब्रम, ऊपर दुगनी मुखिया वसुंधरा सरदार, मुडकुम मुखिया पारमिला हेम्ब्रम और नवागांव मुखिया जयश्री बोदरा प्रमुख रूप से शामिल हुईं. सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया.

30 मांझी बाबा हुए सम्मानित

सरई फूल के साथ पूजा-अर्चना करते मांझी बाबा

दिशोम जाहेरगाढ़ सीनी समिति की ओर से करीब 30 मांझी बाबा को आदिवासी अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया गया. यह सम्मान आदिवासी परंपरा, संस्कृति और समाज के संरक्षण में उनके योगदान के लिए दिया गया. सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका अभिनंदन किया.

पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम

महिला मंडली के साथ डॉ मीरा मुंडा (बीच में)

बाहा पर्व के अवसर पर पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. युवा और बुजुर्ग सभी ने मिलकर उत्साह के साथ भाग लिया. मांदर और नगाड़ों की थाप पर कलाकारों ने पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया.

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आयोजन में पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका

कार्यक्रम की सफलता में दिशोम जाहेरगाढ़ सीनी के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. मांझी बाबा कान्हुराम माझी, बाबलु मुर्मू (नायके बाबा), कोषाध्यक्ष जगदीश सोरेन, सचिव सीताराम सोरेन, दिकु हांसदा, विवेक मांझी, सोनु सरदार, रेणु सोरेन, रानी मार्डी, अलादी हांसदा, मगली सरदार, तारकनाथ मांझी, सोनिया मांझी और दीपक मांझी ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय योगदान दिया. इस तरह बाहा पर्व का यह आयोजन आदिवासी संस्कृति, एकता और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया.

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