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खरसावां : फैशनेबल व कलरफुल हुआ खादी तो बढ़ी डिमांड, युवाओं में दिख रहा है खादी का क्रेज

Updated at : 02 Oct 2024 7:05 AM (IST)
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खरसावां : फैशनेबल व कलरफुल हुआ खादी तो बढ़ी डिमांड, युवाओं में दिख रहा है खादी का क्रेज

गांधी जयंती पर खादी के कपड़ों में मिलेगी 20 से 25 फिसदी तक की छूट मिल रही है. खादी के कपड़े न सिर्फ सादगी लुक देता है, बल्कि इसकी खासियत यह है कि अप इसे किसी भी मौसम में पहन सकते है.

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खरसावां, शचिंद्र दाश : खादी के कपड़े कभी बुजुर्गों के पसंदिदा कपड़े हुआ करते थे. परंतु अब खादी केवल बुजुर्गों की पसंद नहीं रह गयी है. अब युवाओं में भी इसके प्रति क्रेज देखा जा रहा है. कलरफुल व फैशनेबल होने के बाद खादी के कपड़े युवाओं को पसंद आ रहे हैं.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हर घर तक खादी पहुंचाने का देखा था सपना

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने खादी को राष्ट्रीयता की भावना से जोड़ते हुए इसे हर गांव, हर घर तक पहुंचाने का सपना देखा था. हाल के दिनों में युवाओं में भी खादी की मांग बढ़ी है. खादी बोर्ड के खादी इंपोरियम में बड़ी संख्या में युवा खादी के वस्त्रों की खरीदारी करने पहुंच रहे हैं. गांधी जयंती से लेकर दुर्गा पूजा, दीपावली को लेकर खादी के भंडारों में कपड़ों का विशेष कलेक्शन रहता है. बताया जाता है कि खादी के कपड़े न सिर्फ सादगी लुक देता है, बल्कि इसकी खासियत यह है कि अप इसे किसी भी मौसम में पहन सकते है. गर्मी के खादी के कपड़े आरामदायक होते है, तो सर्दी में यह गर्माहट देते है.

हमेशा फैसन ट्रेंड में रहता है खादी, बाजार में मांग के अनुसार बनते हैं कपड़े

खादी में तरह-तरह के डिजाइनर कपड़ों की भरमार है, जिसे हर वर्ग के लोग पसंद कर रहे हैं. इसका क्रेज अब युवाओं में भी देखा जा रहा है. खादी के कपड़ों के लेटेस्ट डिजाइन में शर्ट, कुर्ता, लॉन्ग कुर्ती, प्लाजो, एंकर लेंथ पैंट, लेडिज बंडी की काफी मांग है. साड़ी की बात करें, तो खादी सिल्क में कई वेराइटी उपलब्ध हैं. कहा जाता है कि खादी हमेशा फैसन ट्रेड में रहता है. बाजार में मांग के आधार पर कपड़ों का डीजाइनिंग किया जाता है.

खरसावां, कुचाई व चांडिल में तैयार होता है खादी के कपड़े

खरसावां के आमदा स्थित खादी पार्क तथा चांडिल व कुचाई स्थित उत्पादन केंद्रों में कटिया सिल्क के कपड़े तैयार होते है. यहां खादी के सुती कपड़ों से लेकर सिल्क के कपड़ों की बुनाई होती है. साथ ही डिजाइनिंग व फैब्रिक का काम बाहर में होता है. देवघर के भगैया से लेकर दूश के दूसरे प्रातों में भी खादी के कपड़े तैयार होते है. ये कपड़े भी झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के आउटलेट में उपलब्ध है. बंडी, तसर सिल्क साड़ी, कुर्ता-पायजेमा, महिला कर्ती, स्टॉल, सुट सेट, डोकरा उत्पाद, टेराकोटा उत्पाद आदि खादी के विशिष्ट उत्पाद है.

खादी को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी खादी के कपड़ों पर विशेष छूट

खरसावां : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के मौके झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड अपने कपड़ों पर भारी छूट दे रहा है. कपड़ों पर खादी बोर्ड की ओर से विशेष छूट की घोषण की गयी है. गांधी जयंती पर खादी इंपोरियम में खादी के कपड़ों पर 20 से 25 फिसदी तक की विशेष छूट मिलेगी. रेडिमेड गार्मेंट, सिल्क, बंडी, शर्ट आदि पर 25 फीसदी एवं रेशमी साड़ी, सूती थान, पॉली वस्त्र, कंबल, ऊंची चादर, लुंगी, गमछा, चादर आदि में 20 फीसदी की छूट मिलेगी. खरसावां खादी पार्की के प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि खादी बोर्ड के आउट लेट में 23 सौ से लेकर 14 हजार तक के सिल्क के साढ़ी उपलब्ध है. पहली बार महिलाओं के लिए रेशमी बंडी आई है. यह काफी पसंद की जा रही है. इस पर भी 25 प्रतिशत छूट दी जा रही है. इसके अलावा तसर सिल्क, मोदी बंडी, मोदी कुर्ता, शर्ट आदि का नया रेंज भी है.

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Kunal Kishore

लेखक के बारे में

By Kunal Kishore

कुणाल ने IIMC , नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा की डिग्री ली है. फिलहाल, वह प्रभात खबर में झारखंड डेस्क पर कार्यरत हैं, जहां वे बतौर कॉपी राइटर अपने पत्रकारीय कौशल को धार दे रहे हैं. उनकी रुचि विदेश मामलों, अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और राष्ट्रीय राजनीति में है. कुणाल को घूमने-फिरने के साथ पढ़ना-लिखना काफी पसंद है.

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