सरायकेला खरसावां जिले में बढ़ा गरमा खेती का दायरा, किसान उत्साहित

Published by : Priya Gupta Updated At : 18 May 2026 10:31 AM

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चौका के पालना डैम के पास हो रही गरमा धान की खेती

Seraikela Kharsawan News: सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष गरमा खेती का दायरा बढ़ा है. 1022 हेक्टेयर में धान सहित कुल 3674 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल आच्छादन हुआ है, जिससे किसान उत्साहित हैं.

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शचिंद्र कुमार दाश की रिपोर्ट 

Seraikela Kharsawan News: सरायकेला खरसावां जिले में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गरमा खेती का दायरा बढ़ा है. गरमा खेती को लेकर किसान भी खासा उत्साहित है. किसानो का रुझान गरमा धान की ओर देखा जा रहा है. जिले में गरमा धान की खेती का लक्ष्य के अनुसार हो रहा है. 1022 हेक्टेयर में गरमा धान की खेती हो रही है. जिले में पिछले वर्ष 955 हेक्येटर में गरमा धान की खेती हुई थी. गरमा धान की खेती में हुई लाभ से उत्साहित किसान इस साल ओर भी वृहद पैमाने पर खेती कर रहे हैं.

धान में आने लगी है बालिया, 15-20 में होगी कटाई

खेतों तैयार धान के बालियों आने लगी है. फसल भी पकने को तैयार हैं. इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. अगले दो-तीन सप्ताह में गरमा धान पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. इससे किसानों को अच्छी आमदानी भी होगी. किसानों ने बताया कि गरमा धान तीन से चार माह में तैयार हो जाता है. 

राजनगर में जल संरक्षण के नये तकनीकों को अपना कर धान की खेती कर रहे है किसान

चांडिल और चौका क्षेत्र में सर्वाधिक हुई है खेती

गरमा धान की खेती सबसे अधिक चांडिल व चौका क्षेत्र में हुई है. चौका के पालना डैम से सिंचाई नहर के कीनारे स्थित पालना, मुसरीबेडा, खूंटी, कुरली, दिरलोंग, झाबरी खेतों के साथ साथ तथा चांडिल डैम से निकलने वाली नहर के स्थित दालग्राम, गांगुडीह, रिमली, रुचाव, पाटा आदि गांवों में गरमा धान की अच्छी खेती हुई है. इसके अलावे खरसावां व कुचाई के पाहाड़ी क्षेत्र में कुछ कुछ स्थानों पर लोग नदी नाला के पानी से गरमा धान की खेती कर रहे है. राजनगर में भी जल संरक्षित कर गरमा धान की खेती की जा रही है.

सिंचाई की व्यवस्था हुई तो बढ़ेगा खेती का दायरा

जिले में गरमा धान समेत अन्य गरमा फसलों की खेती सिर्फ सिंचाई सुविधा उपलब्ध वाले क्षेत्रों में ही हो रही है. पालना व चांडिल डैम के अलावे पाहाड़ी क्षेत्रों में स्थित छोटे छोटे चैक डैम  ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने पर गरमा धान की खेती का दायरा बढ़ सकता है. किसान उद्वह सिंचाई योजना की मांग कर रहे है, ताकि खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच सके. 

सुरु डैम पुरा होते ही खरसावां में बढ़ेगी गरमा खेती 

खरसावां में निर्माणाधीन सुरु जलाशय योजना का कार्य पुरा होते ही क्षेत्र में खेती गरमा की खेती हो पाएगी. डैम का निर्माण कार्य जोरों पर चल रही है. निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद नहर के जरीये करीब एक दर्जन गांवों तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा. इससे गरमा धान की खेती भी हो सकेगी.

इस वर्ष जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा की खेती 

सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जिले में 3674 हेक्टेयर में गरमा की खेती हो रही है. गरमा फसल में अब तक लक्ष्य का 70 फीसदी आच्छादन हो चुका है. जिले में 5190 हेक्टेयर में गरमा की खेती का लक्ष्य रखा गया था.  1022 हेक्टेयर में गरमा धान, 360 हेक्टेयर में गरमा मक्का, 2175 हेक्टेयर में गरमा मुंग की खेती हो रही है. क्षेत्र के किसान गरमा सूर्यमुखी की खेती में दिलचस्पी नहीं ले रहे है. 850 हेक्टेयर में गरमा सूर्यमुखी की खेती का लक्ष्य था, परंतु सिर्फ 117 हेक्टेयर में ही गरमा सूर्यमुखी की खेती हो रही है. 

कुचाई के गोमियाडीह पंचायत में पाहाड़ियों की तलहटी पर जल संरक्षित कर धान की खेती कर रहे है किसान

सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष हुई गरमा धान की खेती की स्थिति

फसल : लक्ष्य (हेक्टयर) : अच्छादन : अच्छादन प्रतिशत

  • धान : 1025 : 1022 : 99.71
  • मक्का : 565 : 360 : 63.72
  • मुंग : 2750 : 2175 : 79.09
  • सूर्यमुखी : 850 : 117 : 1376
  • कुल : 5190 : 3674 : 70.79 

क्या कहते हैं किसान?

पालना के किसान पंचानन महतो कहते हैं कि इस वर्ष जिले में गरमा धान की अच्छी खेती हुई है. धान के बाली आने लगे हैं. अगले 15-20 दिनों में धान की कटाई की जाएगी. किसानों से सरकारी स्तर पर धान खरीद की व्यवस्था हो. 

धुनाडीह (कुचाई) के किसान गुरुलाल मुंडा कहते हैं कि सिंचाई की व्यवस्था हो तो जिले में गरमा फसल का दायरा भी बढ़ेगा. सिंचाई के अभाव में किसान गरमा धान समेत अन्य फसल उगा नहीं पा रहे हैं. सरकार छोटे-छोटे योजनाओं के माध्यम से सिंचाई की व्यवस्था करें.

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प्रिया गुप्ता डिजिटल मीडिया में कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हैं. वह पिछले एक साल से कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. इससे पहले वह नेशनल प्रिंटर और लोकल चैनलों में काम कर चुकी हैं. अभी वह झारखंड की खबरों पर काम करती हैं और SEO के अनुसार कंटेंट लिखती हैं. प्रिया आसान और साफ भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखती हैं. वह ट्रेंडिंग खबरों, झारखंड से जुड़े मुद्दों और लोगों से जुड़ी खबरों पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सही और भरोसेमंद जानकारी सरल शब्दों में मिले.

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