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सरायकेला में चंपाई सोरेन को चुनौती देने के लिए झामुमो उतार सकता है बड़ा चेहरा

Updated at : 20 Oct 2024 9:37 AM (IST)
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भाजपा के चंपाई सोरेन के खिलाफ झामुमो से कौन?

Jhakrhand Politics: झारखंड विधानसभा चुनाव में इस बार झामुमो की पहली रणनीति चंपाई सोरेन को उनके अपने ही गढ़ सरायकेला में हराने पर केंद्रित रहेगी.

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Jhakrhand Politics|Jharkhand Chunav 2024|झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में कोल्हान की सीटों के लिए भाजपा ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है, वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है. अगर इस बार के चुनावी मुकाबले की बात करें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए वर्ष 2019 के मुकाबले 2024 का विधानसभा चुनाव ज्यादा चुनौतीपूर्ण और पेचीदा साबित होने वाला है. इसकी बड़ी वजह यह है कि झारखंड के कद्दावर नेता चंपाई सोरेन झामुमो से अलग होकर इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो चुके हैं.

चंपाई सोरेन को उनके ही गढ़ में हराने की रणनीति बना रहा झामुमो

ऐसे में सरायकेला सीट राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील हो गयी है. इस बार झामुमो की पहली रणनीति चंपाई सोरेन को उनके अपने ही गढ़ सरायकेला में हराने पर केंद्रित रहेगी. चंपाई सोरेन का जनाधार और उनके राजनीतिक कद को देखते हुए झामुमो के लिए यह लड़ाई आसान नहीं होगी. झामुमो से भाजपा में आने के बाद चंपाई सोरेन ने अपने पुराने साथियों और समर्थकों के साथ संपर्क बनाये रखा है. जिससे उनके खिलाफ किसी भी रणनीति को अंजाम देना चुनौतीपूर्ण साबित रहा है.

चंपाई सोरेन के खिलाफ दमदार चेहरे को मैदान में उतारने की तैयारी

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चंपाई सोरेन को चुनौती देने के लिए झामुमो बड़े और दमदार चेहरे को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर चुका है, लेकिन इस पर बेहद सावधानी से कदम उठाने जा रहा है. फिलहाल वह अपने उम्मीदवार के नाम का खुलासा नहीं कर रहा, ताकि चंपाई सोरेन को किसी तरह की रणनीतिक बढ़त न मिल पाये. झामुमो सरायकेला सीट से ऐसा प्रत्याशी उतारने के मूड में है जो चंपाई सोरेन के लिए भारी पड़ जाये. साथ ही चंपाई सोरेन द्वारा 81 सीटों पर आदिवासी बहुल इलाकों में चलाये जाने वाले राजनीतिक गतिविधियों पर भी रोक लग जाये.

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चंपाई सोरेन पहली बार झामुमो से बगावत कर जीते थे चुनाव

सरायकेला विधानसभा सीट से 1991 के उपचुनाव में झामुमो से बगावत कर पहली बार चुनाव में विजयी रहे. इसके 1991 से लेकर 2019 तक एक बार छोड़ कर हर चुनाव में जीत हासिल की. इससे पहले खरसावां राजपरिवार के सदस्य आदित्य प्रताप सिंह देव और नृपंद नारायण सिंह देव भी यहां से विजयी रहे. जबकि 1967 में पहली बार जनसंघ के रुद्र प्रताप षाड़ंगी को जीत मिली. इसके बाद 1985 और 1990 में झामुमो के कद्दावर नेता रहे कृष्णा मार्डी विजयी हुए.

राज्य की राजनीति का केंद्रबिंदु बना सरायकेला

चंपाई सोरेन के भाजपा में शामिल होने से सरायकेला विधानसभा सीट राज्य की राजनीति का भी केंद्र बिंदू बन गया है. इसलिए झामुमो चंपाई सोरेन के जनाधार को चुनौती देने के लिए हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है और भाजपा की हर गतिविधि पर खासा ध्यान दे रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि झामुमो भाजपा के कदावर नेता घाटशिला के पूर्व विधायक लक्ष्मण टुडू, गणेश माहली व रमेश हांसदा समेत अन्य पर भी अपना दांव खेल सकता है.

सरायकेला विधानसभा सीट से प्रत्याशी चुनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत भाजपा परिवार के सभी साथियों को धन्यवाद. इस बार एनडीए दो-तिहाई सीटें जीत कर झारखंड में सरकार बनायेगी.

चंपाई सोरेन, भाजपा प्रत्याशी, सरायकेला

हालांकि, झामुमो की टिकट पर सरायकेला विधानसभा से बास्को बेसरा, डब्बा सोरेन उर्फ भुगलू सोरेन, कृष्णा बास्के, दिकूराम माझी, दशमत सोरेन, उदय बांकिरा समेत अन्य ने दावेदारी पेश की है. बताते चलें कि चंपाई सोरेन के भाजपा में जाने से पहले से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे बीजेपी नेताओं का सपना टूट चुका है. वे अब सरायकेला सीट से चुनावी मैदान पर उतरने के लिए झामुमो के केंद्रीय नेतृत्व के संपर्क हैं. सरायकेला सीट से झामुमो का प्रत्याशी कौन होगा, इसका खुलासा एक या दो दिन के अंदर हो जायेगा.

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कोल्हान की सभी सीट फतह की होगी कोशिश

कोल्हान की सभी 14 सीटों पर कब्जा जमाने के लिए चंपई सोरेन ने ‘हो’ और संताल समाज के साथ अपनी नजदीकी बढ़ायी है. वे हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने के मुद्दे को लेकर हो बहुल क्षेत्रों में काफी सक्रिय रहे हैं. वहीं संताल समाज की स्वशासन व्यवस्था के प्रमुखों से लगातार संपर्क बनाये हुए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा और पूर्व सांसद गीता कोड़ा भी भाजपा के पक्ष में कोल्हान में जोरदार प्रयास कर रहे हैं.

सरायकेला विधानसभा सीट पर मतदाता

पुरुष मतदातामहिला मतदाताथर्ड जेंडर वोटरकुल मतदाता
1,83,4201,85,770053,69,195

1977 से अब तक सरायकेला विधानसभा सीट से जीते प्रत्याशी

चुनाव का वर्षप्रत्याशी का नामपार्टी का नाम
1977कादे माझीजनता पार्टी
1980कादे माझीभाजपा
1985कृष्णा मार्डीझामुमो
1990कृष्णा मार्डीझामुमो
1991चंपाई सोरेनझामुमो
1995चंपाई सोरेनझामुमो
2000अनंत राम टुडूभाजपा
2005चंपाई सोरेनझामुमो
2009चंपाई सोरेनझामुमो
2014चंपाई सोरेनझामुमो
2019चंपाई सोरेनझामुमो

सरायकेला विधानसभा : वर्ष 2019 में चुनाव का परिणाम

उम्मीदवार का नामपार्टी का नामप्राप्त मत
चंपाई सोरेनझामुमो1,11,554
गणेश महलीभाजपा95,887
अनंत राम टुडूआजसू9,956

सरायकेला विधानसभा : 2014 में चुनाव का परिणाम

उम्मीदवार का नामपार्टी का नामप्राप्त मत
चंपाई सोरेनझामुमो94,746
गणेश महलीभाजपा93,631

सरायकेला विधानसभा : वर्ष 2009 में चुनाव का परिणाम

उम्मीदवार का नामपार्टी का नामप्राप्त मत
चंपाई सोरेनझामुमो57,156
लक्ष्मण टुडूभाजपा53,910
कालीपद सोरेनकांग्रेस16,668

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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