खरसावां. खरसावां के सेंट्रल सिल्क बोर्ड व पायलट प्रोजेक्ट सेंटर की ओर से ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ के तहत 150 किसानों को रोग प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण दिया गया. अभियान के तहत कुचाई प्रखंड के चंपद, खरसावां के टांकोडीह व राजनगर में 50-50 किसानों को तसर की खेती के लिए अर्जुन-आसन के पौधारोपण से लेकर तसर की खेती के दौरान रोग प्रबंधन के तरीके बताए गए. केंद्रीय तसर अनुसंधान व प्रशिक्षण संस्थान(रांची) की वैज्ञानिक डॉ अपर्णा कोप्पारपु ने किसानों को तसर रेशम कीट के रोग प्रबंधन के आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी. किसानों को तकनीक अपनाने की सलाह दी, ताकि समय पर रोग प्रबंधन कर उपज को बढ़ाया जा सके. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से देशभर में 100 व झारखंड के छह जिलों में चलाये जा रहे ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ कार्यक्रम से तसर किसानों को लाभ पहुंचेगा.
प्रोडक्शन बढ़ाने लिए शुरू किया गया अभियान :
अग्र परियोजना पदाधिकारी नीतीश कुमार ने कहा कि रेशम की खेती के दौरान रोग प्रबंधन पर भी ध्यान देने की जरूरत है. फसल को रोग से बचा कर ही अधिक उपज प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि देशभर में रेशम प्रोडक्शन को नयी ऊंचाई देने के लिए ‘मेरा रेशम, मेरा अभिमान’ अभियान की शुरुआत की गयी है. इससे एडवांस टेक्नोलॉजी खेतों तक पहुंचेगी व रेशम क्षेत्र का विस्तार होगा. इस दौरान मुखिया निभाई सोरेन, पंचायत सचिव रोशन पूर्ति, मनोज कुमार, महेन्द्र सिंह सरदार, सुकरा कैवर्त सहित काफी संख्या में किसान व ग्रामीण उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

