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न्यायपालिका में Corruption वाले चैप्टर पर NCERT ने मांगी माफी, वापस ली किताबें 

Updated at : 10 Mar 2026 11:32 AM (IST)
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NCERT Apology

किताब की सांकेतिक तस्वीर (PC-Freepik)

NCERT Apology: एनसीईआरटी के निदेशक और अन्य सदस्यों ने क्लास 8 की सोशल साइंस की किताब में छपे चैप्टर न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है. संस्था ने कहा कि किताब की सभी कॉपियां वापस ले ली गई हैं.

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NCERT Apology: न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट से लगी फटकार के बाद NCERT ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है. संस्था ने कहा कि पूरी किताब वापस ले ली गई है और अब यह आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है.

NCERT ने X पर दी जानकारी

NCERT ने इस संबंध में ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी. संस्था ने कहा, “हाल ही में क्लास 8 की सोशल साइंस की पुस्तक में Exploring Society: India and Beyond (भाग-2) प्रकाशित की थी, जिसमें चैप्टर-4 का शीर्षक था, हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका. एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्यों ने इस अध्याय को लेकर बिना किसी शर्त के सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी है. साथ ही बताया गया है कि पूरी किताब को वापस ले लिया गया है और अब यह उपलब्ध नहीं है.”

इसी के साथ NCERT ने आगे कहा कि हम इस कारण हुई असुविधा के लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करते हैं और सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं. NCERT शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

कहां से शुरू हुआ पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले टॉपिक के उल्लेख को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था. ये नोटिस 26 फरवरी को NCERT के निदेशक और शिक्षा मंत्रारलय के सचिव के लिए जारी किया गया. कोर्ट ने किताब की सभी कॉपियों को तुरंत बैन कर दिया. साथ ही पूछा कि इस मामले में आपराधिक अवमानना कार्रवाई क्यों न की जाए. यहीं से ये पूरा विवाद शुरू हुआ.

क्या था सुप्रीम कोर्ट का कहना?

सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इसमें न्यायपालिका की गलत या एकतरफा तस्वीर पेश की गई है. सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि इस उम्र में बच्चे जीवन की बारीकियों को समझना शुरू ही करते हैं, ऐसे में उन्हें गलत जानकारी देना उचित नहीं है. कोर्ट का साफ कहना था कि किताब के माध्यम से ये जानकारी स्टूडेंट्स, शिक्षक और माता पिता तक पहुंचेगी. इससे समाज पर प्रभाव पड़ेगा.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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