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Seraikela News : चौका में आदिम जनजाति पहाड़िया के 27 परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित, नाले का पानी पीते हैं, बीमार को कंधे पर ले जाते हैं अस्पताल, 10 किमी दूर से लाते हैं राशन

Updated at : 04 Dec 2024 12:23 AM (IST)
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Seraikela News : चौका में आदिम जनजाति पहाड़िया के 27 परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित, नाले का पानी पीते हैं, बीमार को कंधे पर ले जाते हैं अस्पताल, 10 किमी दूर से लाते हैं राशन

गांव में जाने का रास्ता नहीं, बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा से वंचित, 21वीं सदी में भी आदिम युग की जिंदगी जीने को विवश हैं 27 परिवार, नक्सल प्रभावित क्षेत्र गुंगुकोचा के पहाड़िया जीने के लिए कर रहे संघर्ष

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हिमांशु गोप/संजय महतो

सरकारी दावों व योजनाओं के बाद भी विलुप्त होती आदिम जनजाति नारकीय जिंदगी जीने को विवश हैं. सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत मातकामडीह पंचायत के रायडीह गांव स्थित गुंगुकोचा टोला की आदिम जनजाति पहाड़िया के 27 परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. गांव में जाने के लिए रास्ता नहीं है. लोग नाले का पानी पीने को विवश हैं. गांव तक रास्ता नहीं होने के कारण चापाकल गाड़ने की गाड़ी नहीं पहुंच पाती है. गांव में एक भी चापाकल नहीं है. आदिम जनजाति के लोग जंगल से निकलने वाले नाला का पानी पीते हैं. गर्मी में नाला सूखने पर कुआं से पानी लेते हैं. गांव तक पहुंचने के लिए खेत की मेड़ से आना-जाना करना पड़ता है. गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंचती है. बीमार व गर्भवती महिला को खटिया की डोली में ढाई किमी दूर रायडीह गांव की सड़क तक ले जाया जाता है.

10 किमी दूर जाकर राशन उठाव करते हैं

ग्रामीणों ने बताया कि गांव के आधा से अधिक परिवारों का बिरसा आवास नहीं मिला है. डीलर डाकिया योजना से राशन नहीं पहुंचाता हैं. लोगों को करीब 10 किमी दूर तुलग्राम गांव में जाकर राशन उठाव करना पड़ता है. इसमें दिनभर का समय लग जाता है. गांव में बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है. गांव में उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय है.

…सासंद-विधायक व प्रशासन ने नहीं दिया ध्यान…

पंचायत में लगे जनता दरबार में प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को कई बार आवेदन दिया. गांव तक सड़क बनाने की मांग की, लेकिन आजतक नहीं बनी.

लंबू पहाड़िया, गुंगुकोचा.

खेत की मेड़ से आना-जाना करना पड़ता है. बरसात में परेशानी होती है. बीमार को खटिया पर डोली बनाकर कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ता है.

योगेश्वर पहाड़िया, गुंगुकोचा.

गांव में वाहन नहीं पहुंचता है. लोगों को राशन लेने डीलर के पास करीब 10 किमी दूर जाना पड़ता है. इसमें दिनभर समय लग जाता है.

कमला पहाड़िया, गुंगुकोचा.

गांव में एक भी चापाकल नहीं है. जंगल से निकलने वाले नाला का पानी पीने के विवश हैं. गर्मी में कुआं का पानी सहारा रहता है.

सोबनी पहाड़िया, गुंगुकोचा.B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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