सरायकेला-खरसावां में 16 माह में 271 नवजात की मौत

Updated at : 01 Sep 2017 5:37 AM (IST)
विज्ञापन
सरायकेला-खरसावां में 16 माह में 271 नवजात की मौत

सरायकेला : सरकार संस्थागत प्रसव व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए करोड़ों खर्च करने के साथ कई स्वास्थ्य योजनाएं चला रही है. इसके बावजूद जमीनी हकीकत भयावह है. गर्भवती माताओं की देखरेख से प्रसव तक की स्वास्थ्य योजनाएं हवा-हवाई साबित हो रही है. पिछले 16 माह में जिले (सरायकेला-खरसावां) में नवजात से पांच […]

विज्ञापन

सरायकेला : सरकार संस्थागत प्रसव व शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए करोड़ों खर्च करने के साथ कई स्वास्थ्य योजनाएं चला रही है. इसके बावजूद जमीनी हकीकत भयावह है. गर्भवती माताओं की देखरेख से प्रसव तक की स्वास्थ्य योजनाएं हवा-हवाई साबित हो रही है. पिछले 16 माह में जिले (सरायकेला-खरसावां) में नवजात से पांच वर्ष तक के 271 बच्चों की मौत हुई है. वहीं 42 गर्भवती माताएं असमय काल के गाल में समा गयीं. 271 नवजात में अधिकांश की मौत सांस लेने में तकलीफ व निमोनिया के कारण बताया गया है.

सदर अस्पताल में नहीं है पेडियाट्रिक आइसीयू : जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल में हर माह करीब 300 गर्भवती माताओं का संस्थागत प्रसव होता है. अस्पताल में पेडियाट्रिक आइसीयू नहीं रहने से नवजात को रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल में पेडियाट्रिक आइसीयू का नहीं होना नवजात की मौत का एक बड़ा कारण माना जाता है. पेडियाट्रिक आइसीयू में प्री मैच्योर शिशु, कम वजन वाले नवजात व संक्रमित नवजातों का बेहतर इलाज होता है.
कुचाई में हुई सर्वाधिक मौत : वर्ष 2016-17 में सर्वाधिक नवजात की मौत सुदूरवर्ती कुचाई प्रखंड में हुई. यहां 58 नवजात की मौत हुई है. कुचाई व चांडिल प्रखंड में सर्वाधिक आठ माताओं की मौत हुई है. वहीं वर्ष 2017-18 में जुलाई तक सर्वाधिक कुचाई में सर्वाधिक 19 नवजात की मौत हुई है. खरसावां में सर्वाधिक पांच गर्भवती माताओं की मौत हुई है. कुचाई प्रखंड में चिकित्सकों व एएनएम के केन्द्र पर नहीं पहुंचने के आरोप लगते रहे हैं. चार माह में 8209 गर्भवती माताओं का संस्थागत प्रसव हुआ, जबकि जननी सुरक्षा योजना के तहत 10831 गर्भवती माताओं का निबंधन हुआ. इसमें सरकारी अस्पतालों में 4488 गर्भवती माताओं का प्रसव हुआ है. वहीं 9536 बच्चों का नियमित टीकाकरण हुआ है.
जिले में 170 बच्चे हुए कुपोषण मुक्त : बीते चार माह में 170 कुपोषित बच्चों का कुपोषण केंद्र में इलाज किया गया. इन बच्चों को विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कुपोषण केन्द्र भेजा गया. जिले में तीन कुपोषण केंद्र सदर अस्पताल सरायकेला, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजनगर व चांडिल में चल रहा है.
अधिकतर नवजात बच्चों की मौत कुपोषण से होती है. कुपोषण से रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है. गर्भवती माताएं अपनी स्वास्थ्य व खान-पान पर ध्यान नहीं देती हैं. इसका असर गर्भवती माता व नवजात पर पड़ता है. नवजात बच्चों की ज्यादातर मौत इंफेक्शन से होती है. गर्भवती माता में खून व आयोडिन की कमी का असर नवजात पर पड़ता है. अस्पताल सीमित संसाधनों में हर संभव बेहतर इलाज करता है.
डॉ एपी सिन्हा, सिविल सर्जन, सरायकेला-खरसावां
जिले के किसी सरकारी अस्पताल में पेडियाट्रिक आइसीयू नहीं
वर्ष 2016-17 में प्रखंडवार नवजात की हुई मौत
प्रखंड 0-24 घंटे 1-28 दिन एक-पांच वर्ष माताओं की मौत
चांडिल 03 18 10 08
गम्हरिया 00 13 05 01
ईचागढ़ 02 02 04 02
खरसावां 02 11 13 03
कुचाई 05 21 32 08
नीमडीह 01 00 04 01
राजनगर 11 04 03 04
सरायकेला 02 19 07 03
वर्ष 2017 18 (जुलाई तक) की स्थिति
प्रखंड 0-24 घंटे 1-28 दिन 1-12 माह 1-5 वर्ष माताओं की मौत
चांडिल 02 06 01 03 02
गम्हरिया 06 06 00 01 00
ईचागढ़ 01 00 02 02 00
खरसावां 01 04 01 03 05
कुचाई 02 04 10 03 03
नीमडीह 00 01 00 00 00
राजनगर 04 05 00 00 01
सरायकेला 03 02 03 03 01
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola