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गंगा में जलीय प्रजातियों के लिए खतरा पैदा कर रहे प्लास्टिक, शोध में हुआ खुलासा

Updated at : 27 Sep 2025 6:04 PM (IST)
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Plastic Pollution in Ganga Sahibganj Jharkhand

साहिबगंज में गंगा में फेंके गये कचरे.

Plastic Pollution in Ganga: गंगा के डूब क्षेत्र में सबसे अधिक प्रदूषण देखा गया, जहां प्रति वर्ग मीटर घनत्व 6.95 था, जो नदी तटरेखाओं की तुलना में लगभग 28 गुना अधिक था, जहां प्रति वर्ग मीटर घनत्व 0.25 था. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट का स्तर समान था. उच्च और निम्न जनसंख्या घनत्व वाले स्थानों के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं देखा गया.

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Plastic Pollution in Ganga: गंगा नदी के उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण में सर्वाधिक मात्रा पैकेजिंग अपशिष्ट (Packaging Waste) की है. एक नये अध्ययन में यह बात सामने आयी है. इसमें कहा गया है कि क्षेत्र में कई संकटग्रस्त प्रजातियों का आवास है.

साहिबगंज के लाल बथानी और राधानगर में हुआ रिसर्च

झारखंड में साहिबगंज जिले के लाल बथानी और राधानगर के बीच के खंड का चयन इसलिए किया गया, क्योंकि इसमें 34 किलोमीटर का उच्च जैव विविधता वाला क्षेत्र शामिल है, जो गंगा डॉल्फिन और ‘स्मूथ कोटेड ओटर्स’ (दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में पाये जाने वाले ऊदबिलाव की एक प्रजाति) जैसी लुप्तप्राय प्रजातियों का आश्रय स्थल है.

76 किमी क्षेत्र में 37739 मलबे के टुकड़ों का हुआ दस्तावेजीकरण

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के शोधकर्ताओं द्वारा ‘सस्टेनेबिलिटी’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में गंगा के 76 किलोमीटर क्षेत्र में 37,730 मलबे के टुकड़ों का दस्तावेजीकरण किया गया. कुल अपशिष्ट में पैकेजिंग अपशिष्ट का हिस्सा 52.4 प्रतिशत था, जिसमें खाद्य पदार्थों के रैपर, एकल-उपयोग पाउच और प्लास्टिक की थैलियां शामिल थीं.

अपशिष्ट में 23.2 प्रतिशत प्लास्टिक के टुकड़े

प्लास्टिक के टुकड़े 23.3 प्रतिशत के साथ, सर्वाधिक मात्रा में पाया गया दूसरा अपशिष्ट था. इसके बाद तंबाकू से संबंधित कूड़ा 5 प्रतिशत और कप, चम्मच और प्लेट जैसे एकल-उपयोग वाले कटलरी 4.7 प्रतिशत थे. मछली पकड़ने का सामान, कपड़ा और मेडिकल प्लास्टिक भी कम मात्रा में मौजूद थे.

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Plastic Pollution in Ganga: डूब क्षेत्र में सबसे ज्यादा प्रदूषण

डूब क्षेत्र में सबसे अधिक प्रदूषण देखा गया, जहां प्रति वर्ग मीटर घनत्व 6.95 था, जो नदी तटरेखाओं की तुलना में लगभग 28 गुना अधिक था, जहां प्रति वर्ग मीटर घनत्व 0.25 था. ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट का स्तर समान था. उच्च और निम्न जनसंख्या घनत्व वाले स्थानों के बीच कोई बड़ा अंतर नहीं देखा गया.

बाढ़ में बढ़ गये जलीय प्रजातियों के लिए खतरा पैदा करने वाले सामान

मौसमी अंतर नगण्य थे, लेकिन अध्ययन में पाया गया कि मानसून के बाद बाढ़ ने नदी में कचरा लाकर मलबे की भरपाई कर दी. अकेले उच्च जैव विविधता वाले क्षेत्र में, कुल मलबे का 61 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसमें बड़ी मात्रा में फेंके गये मछली पकड़ने के जाल और स्टायरोफोम शामिल थे, जो जलीय प्रजातियों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे.

गंगा में मौजूद मलबे में सबसे ज्यादा 87 प्रतिशत घरेलू कचरा

मलबे में घरेलू कचरे का योगदान 87 प्रतिशत था, जबकि मछली पकड़ने के उपकरण का योगदान 4.5 प्रतिशत और धार्मिक चीजों का योगदान 2.6 प्रतिशत था. संगठित अपशिष्ट संग्रहण और निस्तारण प्रणालियों का न होना प्रदूषण स्तरों के बढ़ने के एक प्रमुख कारक के रूप में पहचाना गया.

2022-2024 के बीच किया गया रिसर्च

यह सर्वेक्षण वर्ष 2022 और वर्ष 2024 के बीच किया गया. इस सर्वेक्षण में प्लास्टिक कचरे को मापने और वर्गीकृत करने के लिए ट्रांसेक्ट-आधारित नमूने (नमूना संग्रहण की एक विधि) का उपयोग किया गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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