1960 से हो रही तालझारी में कालीपूजा

Updated at : 27 Oct 2016 11:49 PM (IST)
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1960 से हो रही तालझारी में कालीपूजा

तालझारी : तालझारी स्टेशन के निकट 1960 के पूर्व से काली पूजा होती आ रही है. बुजुर्गों का कहना है कि अंगरेजों के समय से ही तालझारी रेलवे स्टेशन परिसर में काली पूजा होती थी. पूर्व में तिरपाल से ढंककर मां काली की पूजा-अर्चना की जाती थी.1990 में पक्का मंदिर का निर्माण किया गया. काली […]

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तालझारी : तालझारी स्टेशन के निकट 1960 के पूर्व से काली पूजा होती आ रही है. बुजुर्गों का कहना है कि अंगरेजों के समय से ही तालझारी रेलवे स्टेशन परिसर में काली पूजा होती थी. पूर्व में तिरपाल से ढंककर मां काली की पूजा-अर्चना की जाती थी.1990 में पक्का मंदिर का निर्माण किया गया. काली पूजा का आयोजन रेलवे की ओर से किया जाता था.

लगभग 10 वर्ष पूर्व समिति की गठन कर अब समिति के द्वारा काली पूजा किया जा रहा है. इसमें रेलवे द्वारा भी मदद की जाती है. तालझारी में पूजा के दूसरे दिन भव्य मेला का आयोजन किया जाता है. मेले आदिवासी समुदाय के लोग भी मेले का लुप्त उठाते हैं.काली पूजा समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह ने बताया कि इस वर्ष काली पूजा आयोजन में लगभग 80 हजार खर्च होने की संभावना है.

समिति की ओर से भव्य पंडाल बनाने में लगे हैं. वहीं मूर्तिकार मूर्ति को अंतिम रूप देने में लगे हैं. कुंती सिंह ने बताया कि 31 अक्तूबर को रात्री रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा. काली पूजा का सफल संचालन में समिति के अध्यक्ष विनोद सिंह, सोनेलाल ठाकुर, मिठु चौरसिया, राजकिशोर उपाध्याय सहित अन्य जुटे हैं.

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