चिकित्सालय भवन को बना दिया गोदाम
Updated at : 02 Jul 2017 6:33 AM (IST)
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उदासीनता. छह वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं हुई मनोरोग चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति सरकार की योजना बनती है. योजना पर लाखों खर्च भी किये जाते हैं, लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाता. जनता का पैसा पानी की तरह बरबाद हो जाता है. लाखों खर्च कर भवन तो बना दिया जाता है लेकिन […]
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उदासीनता. छह वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं हुई मनोरोग चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति
सरकार की योजना बनती है. योजना पर लाखों खर्च भी किये जाते हैं, लेकिन इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पाता. जनता का पैसा पानी की तरह बरबाद हो जाता है. लाखों खर्च कर भवन तो बना दिया जाता है लेकिन उसके उद्देश्यों की पूर्ति नहीं हो पाती है.
साहिबगंज : संताल परगना में आदिम जनजाति व आदिवासी की अधिक जनसंख्या रहने के कारण झारखंड सरकार ने 2009 में साहिबगंज जिला सदर अस्पताल परिसर में मानसिक रोग से ग्रसित मरीजों के इलाज के लिए मन: चिकित्सालय खोलने की मंजूरी दी थी. 2010 में मन: चिकित्सालय भवन बनाने का कार्य प्रारंभ हुआ और वह भवन 2011 में बनकर तैयार हो गया.
छह अगस्त 2011 को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू ने बोरियो विधानसभा क्षेत्र के विधायक लोबिन हेंब्रम की उपस्थिति में नवनिर्मित मनोरोग चिकित्सालय भवन का उद्घाटन किया था. उस भवन का उपयोग आज एक गोदाम व गार्ड रूम के रूप में हो रहा है. उस समय मंत्री श्री मुर्मू ने लोगों से कहा था कि एक दो माह के अंदर मनोरोग चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति हो जायेगी. लेकिन छह वर्ष बीत जाने के बावजूद उक्त चिकित्सालय के लिए न तो डॉक्टरों की प्रतिनियुक्त हुई ना ही इलाज शुरू हुआ.
गार्ड रूम के रूप में भी हो रहा उपयोग
मन: चिकित्सालय भवन को पिछले तीन चार वर्षों से स्वास्थ्य विभाग गोदाम बनाकर उपयोग कर रही है. बेयर हाउस निर्माण के समय सिमेंट व छड उक्त भवन में संबंधित ठेकेदार के द्वारा रखा जाता था. वर्तमान समय में मन: चिकित्सालय का भवन होम गार्ड के जवानों का आवास बना हुआ है.
चिकित्सालय का गेट, खिड़की व बिजली वायरिंग क्षतिग्रस्त : 2011 से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा मन: चिकित्सालय उद्घाटन के बाद एक वर्ष तक भवन ठीक-ठाक रहा. उसके बाद से भवन क्षतिग्रस्त होना प्रारंभ हो गया. वर्तमान समय में मन: चिकित्सालय का सभी खिड़की का शीशा, मुख्य द्वार का ग्रिल, बिजली वायरिंग, शौचालय व बाथरूम क्षतिग्रस्त हो गया है. इसके अलावा मुख्य द्वार पर अंकित मन: चिकित्सालय को भी प्रधानमंत्री आगमन के पूर्व भवन का रंग- रोगन करने के क्रम में मन: चिकित्सालय लिखा भी खत्म कर दिया गया है.
2011 में ही तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हेमलाल मुर्मू ने किया था मन: चिकित्सालय का उदघाटन
क्या कहते हैं सीएस
मन: चिकित्सालय में डॉक्टर की प्रतिनियुक्ति नहीं होने के कारण शुरू नहीं हो पाया है. मैं अपने स्तर से कई बार डॉक्टर प्रतिनियुक्ति के लिए सरकार व विभाग को अनुरोध पत्र लिख कर चुका हूं.
डॉ. बी मरांडी, सिविल सर्जन, साहिबगंज
सरकारी लापरवाही के करण ही उद्घाटन के छह वर्ष बीत जाने के बावजूद मन: चिकित्सालय आज तक चालू नहीं हो पाया है.
पीयूष कुमार
जनप्रतिनिधियों को मन: चिकित्सालय को चालू करवाने के लिए आगे आने की जरूरत है. क्योंकि जिले के लोगों को इलाज के लिये बाहर जाना पड़ता है.
जबरा पहाड़िया
मन: चिकित्सालय को चालू हो जाने से जिले के मानसिक रोगियों के अलावा उनके परिवार वालों को बड़ी राहत मिलेगी.
विकास कुमार
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