सिंदरी के एफसीआईएल कॉलोनी में ‘सांपों का अनोखा डांस’, आप भी देखें वीडियो

सिंदरी के एफसीआईएल आवास परिसर डांस करती सांपों की जोड़ी (लाल घेरों में). फोटो: प्रभात खबर
Sindri Snake Dance: धनबाद के सिंदरी स्थित एफसीआईएल आवास परिसर में सांपों के बढ़ते आतंक से लोग दहशत में हैं. सफाई के अभाव में झाड़ियों में सांपों का बसेरा बन गया है. बुजुर्गों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है और प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की जा रही है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
धनबाद से अजय उपाध्याय की रिपोर्ट
Sindri Snake Dance: झारखंड के धनबाद जिले के सिंदरी स्थित एफसीआईएल आवास परिसर में इन दिनों सांपों का अनोखा डांस देखने को मिल रहा है. हालांकि, बार-बार इनके निकलने से इलाके के लोगों में खौफ भी है. रोडाबांध क्षेत्र के आवास संख्या एफ-107 के आसपास बार-बार सांपों के दिखने से वहां रहने वाले लोग खासकर बुजुर्ग काफी भयभीत हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं.
सफाई के अभाव में बढ़ा खतरा
स्थानीय निवासी और एफसीआईएल के पूर्व पीआरओ सेवा सिंह ने बताया कि फैक्ट्री बंद होने के बाद से कॉलोनी की नियमित सफाई नहीं हो रही है. नगर निगम की ओर से केवल कचरा उठाने का काम किया जाता है, लेकिन आसपास उगी घनी झाड़ियां और जंगल जैसी स्थिति को नजरअंदाज किया जा रहा है. यही कारण है कि सांपों का बसेरा यहां तेजी से बढ़ता जा रहा है.
बुजुर्गों के लिए बनी जान का खतरा
कॉलोनी में अधिकतर बुजुर्ग लोग रहते हैं, जिनके लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक बन चुकी है. सांपों के डर से लोग घर से बाहर निकलने में भी हिचकिचा रहे हैं. रात के समय तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब अंधेरे में सांपों के निकलने का खतरा ज्यादा रहता है.
प्रशासन से लगाई गुहार
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि कॉलोनी की साफ-सफाई कराई जाए और झाड़ियों को हटाया जाए, ताकि सांपों के छिपने के स्थान खत्म हो सकें. साथ ही, नियमित निगरानी और फॉगिंग जैसे उपाय भी किए जाएं, जिससे इस समस्या से राहत मिल सके.
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जरूरी है त्वरित कार्रवाई
एफसीआईएल कॉलोनी की यह स्थिति न केवल लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है. स्थानीय लोग अब प्रशासन की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं कि जल्द ही इस ‘सांपों के तांडव’ से उन्हें राहत मिलेगी.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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