कौन है भीम राम, जिसने भगताइन के कहने पर विष्णुगढ़ की बच्ची का सिर कुचला

Updated at : 02 Apr 2026 3:58 PM (IST)
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Hazaribagh Murder Case

विष्णुगढ‍़ के कुसुंभा गांव में पत्थर से 12 साल की बच्ची का सिर कुचलने वाला भीम राम. फोटो: प्रभात खबर

Hazaribagh Murder Case: विष्णगुढ़ के कोसुंबा गांव में अंधविश्वास के नाम पर 12 साल की बच्ची की निर्मम हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी भीम राम समेत तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. तंत्र-मंत्र और मानव बलि से जुड़ा यह मामला समाज को झकझोर देने वाला है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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Hazaribagh Murder Case: भीम राम एक नाम है. एक असाधारण आदमी का नाम है. यह नाम उसी आदमी का है, जिसने हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंभा गांव में 12 साल की मासूम की हत्या का मुख्य आरोपी है. यही वह आदमी है, जिसने तथाकथित तंत्र-मंत्र के चक्कर में भगताइन के कहने पर बच्ची के सिर पर पत्थर मारा था. भीम राम ने पहले बच्ची का गला दबाया और छटपटाने पर उसकी मां शांति देवी ने उसका पैर पकड़ा. बच्ची जब अचेत हो गई, तब इसी भीम राम ने बच्ची के सिर पर पत्थर मारकर सिर से खून निकाला था. उसी खून से भगताइन ने जमीन को लीपा था.

भीम राम का चेहरा कुछ, हकीकत कुछ और

भीम राम का नाम पहले एक आम व्यक्ति की तरह सामने आया था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, उसकी असली सच्चाई सामने आने लगी. यही वह व्यक्ति है जिसने तंत्र-मंत्र के नाम पर एक मासूम की हत्या करने में मुख्य भूमिका निभाई. विडंबना यह है कि गिरफ्तारी से पहले भीम राम कई इंटरव्यू में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाता नजर आया था. उसने सरकार को सलाह देते हुए कहा था कि अपराधियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. लेकिन जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, तो उसका यह दोहरा चेहरा उजागर हो गया. अब उसका वही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसकी “नैतिकता” की बातें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं.

भीम राम ने की थी फांसी की मांग

भीम राम ने कई इंटरव्यू में सरकार को नसीहत देते हुए कहा था, ‘अपराधियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो. झारखंड में अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं. मैं हेमंत सोरेन सरकार से यही कहना चाहूंगा कि यहां की बहू-बेटियां सुरक्षित नहीं है. इस घटना का जो भी आरोपी है, उसे फांसी के फंदे पर चढ़ाना चाहिए.’ पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद अब उसके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और उसकी एक्टिंग खूब चर्चा हो रही है.

पुलिस और जांच एजेंसियों का कर था गुमराह

कुछ खबरिया लोकल यूट्यूब चैनलों पर कहा जा रहा है कि भीम राम का बच्ची की मां रेशमी देवी के साथ पिछले 10 सालों से अवैध संबंध था. भीम राम कई तरीकों से पुलिस और झारखंड के नेताओं को गुमराह कर रहा था. हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता में भी इस बात का जिक्र किया है कि भीम राम इस घटना को कई तरह की दिशा देने की कोशिश की. बार-बार वह पुलिस को गुमराह कर रहा था. जांच एजेंसियों को भी गुमराह करने का प्रयास करता रहा.

अंधविश्वास का जाल और भगताइन का बहकावा

इस पूरे मामले की जड़ में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की कुप्रथा है. गांव की एक कथित भगताइन शांति देवी ने इस हत्या की साजिश रची. उसने मृतका की मां रेशमी देवी को यह यकीन दिलाया कि उसके बेटे की परेशानी दूर करने के लिए किसी कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी. रेशमी देवी पिछले एक साल से अपने बेटे की समस्याओं को लेकर शांति देवी के पास जा रही थी. भगताइन ने पहले भी उसके घर पर तंत्र-मंत्र करने का दावा किया था, जिससे महिला का विश्वास और गहरा हो गया. धीरे-धीरे यह विश्वास एक खतरनाक साजिश में बदल गया.

घटना की रात कैसे रची गई खौफनाक साजिश

24 मार्च की रात रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान बच्ची लापता हो गई. उसी रात करीब आठ बजे रेशमी देवी अपनी छोटी बेटी को लेकर शांति देवी के घर पहुंची. भगताइन ने बताया कि रात नौ बजे के बाद “देवास” आएगा और वही बलि का सही समय होगा. इसके बाद भगताइन ने रेशमी देवी से कहा कि वह किसी पुरुष को साथ लाए, ताकि बलि के समय मदद मिल सके. इस पर रेशमी देवी गांव के ही भीम राम को साथ लेकर आई. तीनों ने मिलकर इस घिनौनी साजिश को अंजाम देने की तैयारी की.

इंसानियत को झकझोर देने वाला दृश्य

भगताइन शांति देवी ने अपने घर के पास स्थित मनसा मंदिर में तंत्र-मंत्र शुरू किया. इसके बाद बच्ची को बांसबाड़ी ले जाया गया, जहां कथित तौर पर “भूत बांधने” की बात कही गई. वहां बच्ची को जमीन पर सुलाया गया. भगताइन ने बांस की छड़ी घुमाते हुए मंत्र पढ़े और कहा कि “देवास आ गया है” और उसे कुंवारी लड़की का खून चाहिए. इसके बाद भीम राम ने बच्ची का गला घोंटना शुरू किया. जब बच्ची छटपटाने लगी, तो उसकी मां रेशमी देवी ने खुद उसके पैर पकड़ लिए. जब बच्ची अचेत हो गई, तब भीम राम ने उसके सिर पर पत्थर से वार किया, जिससे उसका सिर फट गया और खून बहने लगा. इस खून का इस्तेमाल भगताइन ने जमीन पर लिपाई-पुताई और पूजा के लिए किया.

अपराधियों तक कैसे पहुंची पुलिस

25 मार्च की सुबह मिडिल स्कूल के पीछे मैदान से बच्ची का शव बरामद हुआ. परिजनों के बयान के आधार पर अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए 26 मार्च को एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया. प्रशिक्षु आईपीएस नागरगोजे शुभम भाउसाहेब के नेतृत्व में बनी इस टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की. जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिससे पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ.

भीम राम की चालबाजी और पुलिस को किया गुमराह

हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन ने प्रेस वार्ता में बताया कि भीम राम लगातार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था. वह घटना को अलग-अलग दिशा देने की कोशिश करता रहा, ताकि जांच भटक जाए. भीम राम का रेशमी देवी के साथ पिछले करीब 10 वर्षों से अवैध संबंध भी था. हालांकि, पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है. यह साफ है कि भीम राम ने न केवल इस अपराध में भाग लिया, बल्कि पूरे सिस्टम को भ्रमित करने की भी कोशिश की.

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सजा दिलाने की होगी कोशिश: पुलिस

एसआईटी ने तीनों आरोपी भीम राम, रेशमी देवी और शांति देवी को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की कोशिश की जाएगी. इस टीम में कई पुलिस अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे, जिन्होंने मिलकर इस जटिल मामले को सुलझाया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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