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रांची के बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में झारखंड की संस्कृति का सबसे बड़ा महोत्सव ‘झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024’

Updated at : 09 Aug 2024 5:15 AM (IST)
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रांची में झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024 आज से.

World Tribal Day: झारखंड की राजधानी रांची में विश्व आदिवासी दिवस पर ‘झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024’ में झारखंड का सबसे बड़ा महोत्सव होगा. जानें क्या है खास.

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World Tribal Day: विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा स्मृति पार्क में झारखंड की संस्कृति का सबसे बड़े महोत्सव ‘झारखंड आदिवासी महोत्सव’ का शुक्रवार (9 अगस्त) को आगाज होगा. महोत्सव का उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे. वही कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं.

शिबू सोरेन होंगे झारखंड आदिवासी महोत्सव के विशिष्ट अतिथि

राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन इस महोत्सव के विशिष्ट अतिथि होंगे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे . दो दिवसी. आयोजन की तैयारी पूरी हो चुकी है. महोत्सव में झारखंड समेत अन्य राज्यों के कलाकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे.

मिजोरम और ओडिशा समेत कई राज्यों के कलाकार देंगे प्रस्तुति

झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024 में मिजोरम, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, असम, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों से कलाकारों की प्रस्तुति होगी. मंच के पीछे झारखंड में आदिवासियों के ग्रामीण दर्शन को उकेरा गया है. झारखंड एवं अन्य राज्यों से आये चित्रकार, चित्रकला के माध्यम से झारखंड की आदिवासी संस्कृति और सभ्यता को कैनवास पर उकेर रहे हैं.

झारखंड आदिवासी महोत्सव 2024 में होंगे कई रंगारंग कार्यक्रम

उद्घाटन सत्र का आगाज सांस्कृतिक कार्यक्रम से होगा. महोत्सव में कला-शिल्प प्रदर्शनी, रीझ-रंग शोभा यात्रा, आदिवासी व्यंजन प्रतियोगिता, आदिवासी पुस्तक मेला, आदिवासी कवि सम्मेलन, वृत्तचित्र स्क्रीनिंग, झारखंड की चित्रकला शैलियां, फैशन शो, लेजर शो सहित आदिवासी खेल गतिविधियां होंगी.

एलईडी स्क्रीन, गुणवत्तापूर्ण साउंड सिस्टम और वाटरप्रूफ पंडाल

आमजनों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं. कार्यक्रम स्थल पर एलईडी स्क्रीन एवं गुणवत्तापूर्ण साउंड सिस्टम की व्यवस्था की गई है. मुख्य मंच की सजावट, अन्य साज-सज्जा, आगंतुकों के आने-जाने एवं उनके बैठने की व्यवस्था, फूड सेंटर, सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी पूरी हो चुकी है. बारिश की संभावना को देखते हुए पूरा पंडाल वाटरप्रूफ बनाया गया है.

आगंतुकों की सुविधा के लिए कार्यक्रम स्थल का बना है पूरा मैप

आगंतुक, आमजनों, एवं मीडिया के प्रतिनिधियों की सुविधा के लिए मैप के माध्यम से कार्यक्रम स्थल को दर्शाया गया है, ताकि लोगों को कोई असुविधा ना हो. अतिथियों के इंट्री और एग्जिट प्वाइंट भी मैप के माध्यम से दिखाए गए हैं.

महोत्सव में ये लोग भी होंगे शामिल

कार्यक्रम स्थल तक आने वाले वाहनों के लिए मार्ग निर्धारित किया गया है तथा पार्किंग स्थलों की व्यवस्था भी की गई है. इस अवसर पर मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण एवं अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी.

विश्व आदिवासी दिवस कब मनाया जाता है?

विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है. पूरे विश्व में इस दिन अलग-अलग आयोजन होते हैं.

झारखंड में कहां मनाया जाता है विश्व आदिवासी दिवस?

झारखंड के अलग-अलग हिस्से में विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है. मुख्य कार्यक्रम राजधानी रांची में होता है, जिसमें मुख्यमंत्री खुद शामिल होते हैं. इस बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उनकी पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन और राज्यसभा सांसद एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन भी शामिल हुए.

झारखंड आदिवासी महोत्सव क्या है?

विश्व आदिवासी दिवस पर झारखंड की राजधानी रांची में कई आयोजन किए गए हैं. भगवान बिरसा मुंडा की याद में बने बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसका नाम ‘झारखंड आदिवासी महोत्सव’ रखा गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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