गुमला की 'लिटिल वंडर' आरोही: 11 साल की उम्र में लिखी 3 किताबें, जीत चुकी हैं कई खिताबें
आरोही खंडेलवाल को स्कूल में सम्मानित करतीं उनकी शिक्षिका
Gumla Success Story: डीएवी पब्लिक स्कूल गुमला की 11 वर्षीय छात्रा आरोही खंडेलवाल ने अपनी तीसरी किताब 'हर कहानी एक शिक्षा' लिखकर इतिहास रच दिया है, उन्हें कलाम अवॉर्ड से भी नवाजा गया है. अब तक वे 3 किताबें लिख चुकी हैं. पढ़ें, पूरी खबर
गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla Success Story, गुमला : कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती और इस बात को अक्षरशः सच साबित कर दिखाया है गुमला की 11 वर्षीय होनहार बेटी आरोही खंडेलवाल ने. डीएवी पब्लिक स्कूल, गुमला की छात्रा आरोही ने इतनी कम उम्र में अपनी तीसरी पुस्तक ‘हर कहानी एक शिक्षा’ लिखकर एक नया इतिहास रच दिया है. इस नन्ही लेखिका की जादुई कामयाबी पर डीएवी स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती माधवी पांडे ने वंदना सभा (स्कूल असेंबली) में पूरी गरिमा के साथ उसे सम्मानित किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
रोजाना 2-3 लेखन को देती थीं
रूपेश खंडेलवाल और सीमा खंडेलवाल की होनहार पुत्री आरोही ने मात्र 8 साल की मासूम उम्र से ही कलम थाम ली थी. वह अपनी पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ रोजाना 2 से 3 घंटे का समय सिर्फ रचनात्मक लेखन (Writing) को देती हैं. उनकी इसी असाधारण और अद्भुत मेधा के लिए उन्हें देश के कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- ‘एपीजे अब्दुल कलाम अवॉर्ड 2026’
- ‘रेडिएंट बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के तहत अखिल भारतीय प्रतिभा सम्मान
- ‘मैजिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ और सर्वश्रेष्ठ लेखिका का खिताब
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नैतिक शिक्षा और सामाजिक संदेश देती हैं किताबें
आरोही की किताबों की सबसे खास बात यह है कि उनमें बच्चों के लिए बेहद सरल शब्दों में नैतिक शिक्षा (Moral Values) और समाज को प्रेरित करने वाले संदेश छिपे होते हैं. वर्तमान में यह नन्ही लेखिका अपनी चौथी किताब पर भी काम शुरू कर चुकी है. उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व जताते हुए उनके माता-पिता ने कहा, “आरोही ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों और इरादे पक्के, तो उम्र का बंधन कोई मायने नहीं रखता.” वहीं, स्कूल की प्राचार्या ने कहा कि आरोही ने न सिर्फ अपने माता-पिता और स्कूल का, बल्कि पूरे गुमला और झारखंड का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है.
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By Sameer Oraon
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