News of Rameshwar Rail Bridge : वर्टिकल रेल ब्रिज, जो शिप को रास्ता देने ऊपर उठ जायेगा

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पूरे देश से तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम धाम आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है. मंडपम रेलवे स्टेशन को पंबन रेलवे स्टेशन से जोड़नेवाले रेलवे ब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है. इस पर रेल यातायात शुरू करने के लिए उद्घाटन का इंतजार है.

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रामेश्वरम से राजेश झा. पूरे देश से तमिलनाडु स्थित रामेश्वरम धाम आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अच्छी खबर है. मंडपम रेलवे स्टेशन को पंबन रेलवे स्टेशन से जोड़नेवाले रेलवे ब्रिज का निर्माण पूरा हो चुका है. इस पर रेल यातायात शुरू करने के लिए उद्घाटन का इंतजार है. उसके बाद लोग मंडपम से पंबन रेलवे स्टेशन होते हुए रामेश्वरम रेलवे स्टेशन तक मात्र 20 मिनट में पहुंच जायेंगे. यह भारत का पहला वर्टिकल रेलवे ब्रिज है, जो पुराने पंबन ब्रिज के बगल में ही बनाया गया है. पुराना पंबन पुल 104 वर्ष का होने के कारण जर्जर हो गया था. इस कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से वर्ष 2022 से ही इस पर ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया है. यात्री फिलहाल ट्रेन से मंडपम रेलवे स्टेशन तक ही जा पा रहे हैं. इसके बाद उन्हें सड़क मार्ग से होकर रामेश्वरम जाना पड़ रहा है.

कई मायनों में बेहद खास है यह पुल

पंबन ब्रिज के रेजीडेंट इंजीनियर अलवेल्लेगन ने बताया कि नवनिर्मित पुल कई मायनों में बेहद खास है. उन्होंने कहा कि हर साल लाखों तीर्थयात्री रामेश्वरम में विश्व प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं. नये पुल के शुरू होने से पंबन और रामेश्वरम के बीच रेल यातायात बढ़ेगा. नये पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2019 में शुरू हुआ और नवंबर 2024 तक यह बनकर तैयार हो गया. नये ब्रिज पर दो रेल पटरियां बिछायी गयी हैं. 2.1 किलोमीटर लंबे इस नये पुल में 101 पिलर हैं और हर पिलर की गहराई 35 मीटर है. पुराने ब्रिज पर ट्रेन की अधिकतम गति 10 किमी प्रतिघंटा थी, जबकि नये ब्रिज पर ट्रेन की अधिकतम गति सीमा 75 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी.

आसानी से पुल के नीचे से गुजर सकेंगे समुद्री जहाज

रेजीडेंट इंजीनियर ने बताया कि नये पुल के शुरू होने के बाद से समुद्री जहाजों को श्रीलंका का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. जब भी जहाज पुल के नीचे से गुजरेंगे, इसके एक हिस्से यानी स्पैन को 5:30 मिनट में 17 मीटर ऊपर उठाया जा सकेगा. इसे इतना उठाया जा सकेगा, जिससे समुद्री जहाज आसानी से इसके नीचे से गुजर सकेगा.

पुल में लगा है इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंट्रोल्ड सिस्टम

यह पुल ‘इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंट्रोल्ड सिस्टम’ से ऑपरेट किया जा रहा है. इसे ट्रेन के कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा गया है. यदि 58 मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, तो ऑटोमेटिक अलर्ट सिग्नल जारी हो जायेगा और ट्रेन रुक जायेगी. यदि कोई मैनुअल तरीके से ट्रेन का रास्ता क्लियर भी कर देता है, तब भी ट्रेन को खतरे का सिग्नल मिल जायेगा.

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