झारखंड के इन तीन दोस्तों ने मिलकर गाड़ियों की सर्विसिंग व मरम्मत को बनाया आसान, सास ऐप के जरिये हुआ संभव

Updated at : 30 Jul 2023 8:39 AM (IST)
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झारखंड के इन तीन दोस्तों ने मिलकर गाड़ियों की सर्विसिंग व मरम्मत को बनाया आसान, सास ऐप के जरिये हुआ संभव

रांची के कडरू निवासी श्रवण कुमार और उनके तीन दोस्तों- धनंजय कुमार, सन्नी सिंह और मृगेंद्र प्रताप ने मिलकर ‘बिजी मेकेनिक्स प्रालि’ के नाम से स्टार्टअप शुरू किया है.

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अभिषेक रॉय, रांची :

लोग व्यस्तता के बीच अपनी गाड़ी खासकर चारपहिया को सर्विसिंग या मरम्मत के लिए वर्कशॉप या गैरेज में ले जाते हैं. हजारों रुपये खर्च करते हैं और घंटों का वक्त भी. इसके बावजूद गाड़ी की कई बार तकनीकी समस्याएं पकड़ में नहीं आती हैं, जिससे भविष्य में और भी परेशानी होती है. ‘डिजिटल गैरेज’ लोगों की इन्हीं परेशानियों को हल कर रही है.

दरअसल, राजधानी के कडरू निवासी श्रवण कुमार और उनके तीन दोस्तों- धनंजय कुमार, सन्नी सिंह और मृगेंद्र प्रताप ने मिलकर ‘बिजी मेकेनिक्स प्रालि’ के नाम से स्टार्टअप शुरू किया है. इसके तहत इन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) आधारित एक मोबाइल ऐपलिकेशन ‘सॉफ्टवेयर एज ए सर्विस (सास)’ तैयार किया है, जो गाड़ियों की सर्विसिंग और मेंटेनेंस को आसान बनाती है.

अब लोग अपनी चारपहिया को सीधे गैरेज ले जाने के बजाय, कंपनी की वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिये ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके बाद चिह्नित मैकेनिक लोकेशन के आधार पर संबंधित गाड़ी मालिक के घर आकर सर्विसिंग, रख-रखाव और मरम्मत करेंगे. समस्या बड़ी हुई और ऑन स्पॉट सर्विस नहीं हो पाया, तो गाड़ी को टोचन कर गैरेज तक ले जाने की सुविधा भी मुहैया करायी जायेगी.

गाड़ी में किसी तरह की भी तकनीकी खामियों को दुरुस्त के बाद मैकेनिक उसका रिकॉर्ड अपने स्तर से ‘सास’ के सर्वर में अपलोड कर देंगे. साथ ही गाड़ी में लगे पार्ट्स, टायर, व्हील बैलेंस, इंजन ऑयल, इंटीरियर-एक्सटीरियर की ड्यूरेबिलिटी (उपायेग की अवधि) भी ‘सास’ में दर्ज रहेगी. भविष्य में दोबारा उस गाड़ी की सर्विसिंग के दौरान इस रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जायेगा.

ऐप के जरिये गाड़ी के मालिक को यह संदेश मिलता रहेगा कि कब उन्हें गाड़ी की सर्विसिंग करानी है और कब कौन सा पार्ट बदलना है. जल्द ही कंपनी अपने प्रिमियम कस्टमर (चुनिंदा ग्राहकों) की गाड़ियों में सेंसर लगाने की तैयारी कर रही है, ताकि ऐप के जरिये गाड़ी मालिक को अपनी गाड़ी की सेहत का पता चलता रहे. मौजूदा दौर की गाड़ियां कंप्यूटर प्रोग्राम आधारित होती हैं, ऐसे में यह काम और भी आसान हो जायेगा.

शहर के कई गैरेज से भी जोड़ा गया :

‘बिजी मेकेनिक्स’ को ई-कॉमर्स वेबसाइट के अलावा शहर के कई गैरेज से भी जोड़ा गया है. इसमें गाड़ियों के पार्ट्स की कीमत व सर्विंसिंग चार्ज का विवरण दर्ज है. इससे गाड़ी मालिक के लिए सर्विस में होनेवाले खर्च का आकलन आसान हो जायेगा. इसके अलावा ऐप में गाड़ी खरीदने और बेचने, किसी भी मॉडल के कार के इंटीरियर और एक्सटीरियर पार्ट को खरीदने, विभिन्न स्टोर से रेट की तुलना करने की भी सुविधा मिलेगी.

शहर के कई गैरेज से भी जोड़ा गया :

जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से 2015 में एमबीए करने के बाद श्रवण नौकरी की जगह खुद का व्यवसाय करने की ठानी. कॉनटैक्ट और रिसर्च तैयार कर 2018 में अपने दोस्त धनंजय के साथ स्टार्टअप की शुरुआत की. 2019 में बिहार स्टार्टअप चैलेंज का हिस्सा बन 10 लाख रुपये की सीड फंडिंग हासिल की. इसके बाद झारखंड स्टार्टअप यात्रा से जुड़े, पर सरकारी सहयोग नहीं मिला. अपने यूनिक आइडिया को लेकर श्रवण एनआइटी पटना पहुंचे. इंक्यूबेशन सेंटर इंचार्ज डॉ भरत गुप्ता ने स्टार्टअप के आइडिया की सराहना की और जुलाई 2019 में इसके प्रोटोटाइपिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी. साथ ही ऐप को तैयार करने में मदद की.

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