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राम से वनबंधुओं को अलग नहीं किया जा सकता, उनके प्राण हैं राम : रघुवर

Updated at : 04 Aug 2020 6:07 AM (IST)
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राम से वनबंधुओं को अलग नहीं किया जा सकता, उनके प्राण हैं राम  : रघुवर

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे़ यह भूमि पूजन स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय होगा़

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रांची/जमशेदपुर : पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे़ यह भूमि पूजन स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय होगा़ यह तो सभी जानते हैं कि वेदों और मर्यादा का पालन करते हुए भगवान राम ने एक सुखी राज्य की स्थापना की थी़ उन्होंने भावनाओं और सुखों से समझौता कर न्याय और सत्य का साम्राज्य स्थापित किया था़

श्री दास ने कहा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम ने संकीर्णताओं को तोड़ते हुए मानव समाज की पुनर्रचना की जो नींव रखी थी, प्रधानमंत्री उस भगवान की जन्मभूमि मंदिर का नींव रख कर संपूर्ण मानव समाज का कल्याण करने जा रहे है़ं यहां भूमि पूजन के लिए देश भर के पवित्र स्थानों से मिट्टी और जल मंगाया गया है़ श्री दास ने कहा कि विडंबना यह है कि कुछ लोग पवित्र स्थानों की मिट्टी को धार्मिक भट्टी में दहकाने की कोशिश कर रहे है़ं

समाज को तोड़ने का काम कर रहे है़ं कितने ही लोगों के पेट में इसलिए दर्द हो रहा है कि शबरी राम के साथ जुड़ी है़ वन-बंधु शबरी के साथ जुड़े होने से उन्हें चिंता हो रही है कि वन बंधु राम के साथ जुड़ जायेंगे़ लाख प्रयत्न करें तो भी देश के वन बंधुओं को राम से अलग नहीं किया जा सकता है़ राम उनके प्राण है़ं जिस दिन वन-बंधुओं के प्राण उनके शरीर से अलग हो जायेंगे, उसी दिन वे राम से अलग हो सकते है़ं

श्री दास ने कहा कि राम के लिए सब अपने थे़ विश्व इतिहास कहता है कि हिंदू समाज मन से सहिष्णु है़ इस देश की जनता भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए वर्षों से राम राज्य की स्थापना की राह ताक रही है़ राम के बिना राम राज्य की कल्पना नहीं की जा सकती है़ इसी उद्देश्य से अयोध्या में प्रभु राम के जन्म स्थल पर भव्य मंदिर बनाने की आवाज उठी, इसके लिए सारे देश में एक स्वर से आंदोलन हुआ था़

लोभ या भय से धर्मांतरण नहीं होना चाहिए : भारत का संविधान समाज के विषय में कहता है कि लोभ-लालच या भय से धर्मांतरण नहीं होना चाहिए. मैंने अपने शासन काल में इसे लागू किया तो कुछ लोग हाय-तौबा मचाने लगे़ हमारे देश के गरीब आदिवासी पूर्वजों ने इस धरती पर आजादी के लिए खून बहाया था़ आजादी दिलाने की लड़ाई का ठेका (गांधी परिवार) लेनेवाले हमारे पूर्व शासकों को क्या इन आदिवासी वनवासियों का बलिदान मंजूर नहीं था़

आजादी के 50-60 वर्षों तक इस सत्य को छुपाने-दबाने की नीति हमारे इन पूर्व शासकों ने लागू की थी़ श्री दास ने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया में शहीद स्मारकों के कीर्तिमान को जीवित रखने की प्रतीज्ञा ली है़ इसी क्रम में भगवान बिरसा मुंडा जेल को शहीद स्मारक का रूप दिया जा रहा है़

Post by : Pritish Sahay

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