विवि और उच्च शिक्षक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा के लिए बनायी जा रही गाइडलाइन, जानें क्या है इसमें

Updated at : 26 Oct 2022 11:39 AM (IST)
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विवि और उच्च शिक्षक संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा के लिए बनायी जा रही गाइडलाइन, जानें क्या है इसमें

विवि में छात्राओं की सुरक्षा के लिए यूजीसी गाइडलाइन जारी कर रही है. यूजीसी के सचिव ने सभी विवि के कुलपति के को इससे संबंधित पत्र भेज दिया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं व छात्राओं पर बढ़ रही हिंसा व प्रताड़ना को देखते हुए केंद्र ने नयी शिक्षा नीति के तहत नये दिशा-निर्देश लागू करने को कहा

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रांची: विवि, कॉलेजों सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रही छात्राओं व कार्य कर रही महिलाओं की सुरक्षा व सुविधा देने के लिए नयी गाइडलाइन तैयार की जा रही है. केंद्र के निर्देश पर यूजीसी ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया है. अंतिम रूप देने से पूर्व आम लोगों व संस्थानों से ड्राफ्ट को और अधिक कारगर बनाने के लिए सुझाव मांगे गये हैं. संबंधित सुझाव 14 नवंबर 2022 तक (ssiwach.ugc@nic.in) पर भेज देना है.

यूजीसी के सचिव प्रो रजनीश जैन ने सभी विवि के कुलपति, कॉलेजों के प्राचार्य व संस्थानों के निदेशकों को पत्र भेजा है. प्रो जैन ने कहा है कि महिलाओं व छात्राओं पर बढ़ रही हिंसा व प्रताड़ना को देखते हुए केंद्र ने नयी शिक्षा नीति के तहत नये दिशा-निर्देश लागू करने को कहा है, ताकि संस्थान छात्राओं व महिलाओं को सुरक्षित, हिंसामुक्त वातावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी ले.

क्या है नयी गाइडलाइन में

नामांकन के समय ही छात्राओं को पुस्तिका प्रदान की जायेगी. इसमें उचित आचरण और उनसे अपेक्षित व्यवहार के संबंध में नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी होगी. इसमें एंटी रैंगिंग सेल, छात्र सलाहकार, प्रॉक्टर कार्यालय, वीमेंस सेल, चिकित्सा व्यवस्था, आपात स्थिति, स्वास्थ्य केंद्र, कैंटीन और विवि अधिकारियों के हेल्पलाइन नंबरों की सूची होगी.

इसके अलावा छात्राओं के मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक चिंताओं को दूर करने के लिए परिसर में व्यावसायिक परामर्श सेवाएं उपलब्ध करायी जायेगी. परिसर को महिला अनुकूल भी बनाना होगा. परिसर में स्वच्छता के साथ-साथ छात्राओं व महिलाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट होंगे, जिसमें 24 घंटे नल के पानी की आपूर्ति, साबुन, ढंके हुए कूड़ेदान, सैनिटरी पैड निपटान डिब्बे और सभी में वेंडिंग मशीन होंगे.

परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अच्छी रोशनी की व्यवस्था करनी होगी. खेल और अन्य खेल के मैदानों और सार्वजनिक पार्कों में फ्लड लाइट लगाने होंगे. परिसर की सभी सड़कों और गलियों, मुख्य/केंद्रीय पुस्तकालय, छात्रावासों और पार्किंग स्थलों के आसपास के क्षेत्रों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग होनी चाहिए. परिसर में कहीं भी अंधेरा नहीं होना चाहिए. छात्राओं के लिए परिवहन सुविधाएं होंगी, जिनकी सेवाएं देर तक होंगी.

सभी भवन, परिवहन, टॉयलेट, फुटपाथ, प्रवेश और निकास सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं विशेष रूप से विकलांग छात्राओं के लिए अनुकूल हो. विश्वसनीय सुरक्षा फर्मों से पर्याप्त संख्या में महिला सुरक्षा गार्ड रखने होंगे. परिसर में एक एंबुलेंस सुविधा रहेगी. चहारदीवारी जरूरी होगी. परिसर में बाहरी लोगों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक रहेगी.

परिसर में सीसीटीवी लगाना जरूरी होगा. छात्रावास में पर्याप्त बिजली, सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट सहित वाशिंग मशीन, वाई-फाई, लाउंज, इनडोर गेम्स और रीडिंग रूम की व्यवस्था करनी होगी. कैंटीन व मेस में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने होंगे. नियमित रूप से खाने की खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा जांच करानी होगी.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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