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बंगाल, यूपी समेत कई राज्यों के आदिवासी कलाकारों ने कैनवस पर दिखाये धरती आबा बिरसा मुंडा के जीवन प्रसंग

Updated at : 08 Feb 2023 9:37 PM (IST)
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बंगाल, यूपी समेत कई राज्यों के आदिवासी कलाकारों ने कैनवस पर दिखाये धरती आबा बिरसा मुंडा के जीवन प्रसंग

आदिवासी कलाकारों की कूचियों से सजे धरती आबा के 35 चित्र जीवंत हो उठे हैं. द्वितीय राष्ट्रीय जनजातीय लोक चित्रकला शिविर में कई राज्यों के आदिवासी और लोक चित्रकारों ने अपनी विभिन्न शैलियों में बहुरंगी इंद्रधनुष सा रच दिया.

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Dharati Aba Birsa Munda: पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और त्रिपुरा समेत कई राज्यों के कला शिक्षकों ने झारखंड में आकर धरती आबा बिरसा मुंडा के जीवन प्रसंगों को अपनी कल्पना के आधार पर कैनवस पर उतार दिया. राजधानी रांची स्थित आड्रे हाउस में लोग ‘धरती आबा’ के जीवन पर आधारित पेंटिंग्स को देखकर धन्य हो रहे हैं.

ये पेंटिंग्स पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन, उत्तर प्रदेश के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भोपाल और त्रिपुरा से भी आदिवासी समुदाय के कला शिक्षक और आचार्य यहां आये थे, जिन्होंने बिरसा मुंडा के विभिन्न जीवन प्रसंगों, भावों को अपनी-अपनी शैली में कैनवस पर उकेरी है.

आदिवासी कलाकारों की कूचियों से सजे धरती आबा के 35 चित्र जीवंत हो उठे हैं. द्वितीय राष्ट्रीय जनजातीय लोक चित्रकला शिविर में कई राज्यों के आदिवासी और लोक चित्रकारों ने अपनी विभिन्न शैलियों में बहुरंगी इंद्रधनुष सा रच दिया.

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इस शिविर में केरल के वायनाड जिले के आदिवासी शैली के चित्रकार आये थे, तो महाराष्ट्र के वारली, गुजरात के राठवा, राजस्थान की मीणा, भील, सहरिया, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के गोंड, ओड़िशा के सउरा, असम के राभा, पूर्वोत्तर के राज्यों नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर,मेघालय, अरुणाचल प्रदेश व त्रिपुरा के आदिवासियों और लोक चित्रकारों ने अपनी कूची से अलग-अलग शैली में चित्रकारी की.

इन कलाकारों ने अपने-अपने समुदाय की कथा, पर्व-त्योहार, अनुष्ठान, मिथक, दर्शन, इतिहास आदि को चित्रों में प्रदर्शित किया है. नेशनल गैलरी फॉर मॉडर्न आर्ट नयी दिल्ली के महानिदेशक अद्वैत गणनायक भी शिविर में उपस्थित हुए थे. उनकी विशिष्ट समकालीन शैली के दो चित्र भी इस प्रदर्शनी में शामिल हैं.

रांची से सटे पतरातू झील के पास 28 जनवरी से 3 फरवरी 2023 तक ‘द्वितीय राष्ट्रीय जनजातीय लोक चित्रकला शिविर’ का आयोजन किया गया था. इसमें केरल से लद्दाख और गुजरात से नगालैंड तक के 70 से अधिक आदिवासी एवं लोक चित्रकारों ने चित्रकारी की.

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नामचीन और समकालीन चित्रकारों के लिए दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु व अन्य आर्ट गैलरियों, आर्ट कॉलेजों के अलावा कॉरपोरेट घराने भी समय-समय पर शिविरों का आयोजन करते रहते हैं. इन शिविरों का उद्देश्य कलाकार को अपनी कला को निखारने का मौका देना है. ऐसे शिविरों में शामिल होने वाले आर्टिट्स विशिष्ट कलाकारों की शैली को समझते हैं और उससे कुछ सीखने की कोशिश करते हैं.

शहरों में कलाकारों के लिए बड़े-बड़े आयोजन होते हैं, लेकिन गांवों के कलाकारों को यह मौका नसीब नहीं होता. इसलिए झारखंड सरकार की संस्था डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान (TRI) ने वर्ष 2020 से परंपरागत चित्रकारों का राष्ट्रीय शिविर आयोजित करने की शुरुआत की.

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इसी क्रम में अलग-अलग राज्यों के आदिवासी कलाकारों ने अपनी चित्रकारी से सबका मन मोह लिया है. इनकी कला देखने के लिए लोग लगातार आड्रे हाउस पहुंच रहे हैं. आदिवासी कलाकारों की चित्रकारी के प्रति लोगों के आकर्षण को देखते हुए इस प्रदर्शनी की अवधि को बढ़ाकर 12 फरवरी 2023 कर दिया गया है.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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