एक दिन में दस हजार टन कोयला उत्पादन, लक्ष्य के करीब केडीएच
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Feb 2025 5:11 PM
विश्व बैंक संपोशित केडीएच परियोजना ने चालू वित्तीय वर्ष में 25 फरवरी 2025 को 10 हजार टन कोयला उत्पादन कर लक्ष्य को प्राप्त करने का सुखद संकेत दिया है.
डकरा. विश्व बैंक संपोशित केडीएच परियोजना ने चालू वित्तीय वर्ष में 25 फरवरी 2025 को 10 हजार टन कोयला उत्पादन कर लक्ष्य को प्राप्त करने का सुखद संकेत दिया है. यह परियोजना एनके एरिया की सबसे बड़ी परियोजना है, जो कभी अकेले एक साल में 45 लाख टन कोयला उत्पादन करती थी, लेकिन जमीन के अभाव में यह पिछले दस सालों से संघर्ष कर रही है. चालू वित्तीय वर्ष की शुरुआती चार महीने तक यह पूरी तरह बंद था और यहां के मैन पाॅवर को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया था, लेकिन इस परियोजना के हर छोटी-बड़ी समस्याओं से अवगत पीओ अनिल कुमार सिंह ने तत्कालीन महाप्रबंधक सुजीत कुमार और संजय कुमार के सहयोग से जामुनदोहर बस्ती को खाली कराकर अगले दो साल के लिए परियोजना को नया जीवन दिलाया है. 25 फरवरी तक 4 लाख 59 हजार 676 टन कोयला उत्पादन किया जा चुका है और अगले 34 दिनों में कुल 10 लाख टन कोयला निकालना है. 25 फरवरी को छह लाख 316 टन ओबी भी निकाला गया है और अभी तक कुल 20 लाख 86 हजार 196 टन ओबी भी निकाला गया है. फरवरी में एक लाख 63 हजार 496 टन कोयला उत्पादन किया गया है.
डकरा परियोजना उत्पादन लक्ष्य के करीब
एनके एरिया की सबसे पुरानी और 2026-27 में बंद होने वाली सबसे बुढ़ी परियोजना डकरा भी चालू वित्तीय वर्ष के अपने उत्पादन लक्ष्य 5.50 लाख टन के करीब पहुंच गयी है. 25 फरवरी तक डकरा ने 4.62 लाख टन कोयला उत्पादन कर लिया है.रोज दस हजार टन कोयले का उत्पादन : पीओ
डकरा और केडीएच पीओ अनिल कुमार सिंह ने प्रभात खबर को बताया कि केडीएच परियोजना से मेरा भावनात्मक लगाव रहा है और यहां काम करने वाले लोग मेरे परिवार की तरह हैं. बंद के निराश माहौल से उठाकर परियोजना को अब ऐसा तैयार कर दिया गया है कि 31 मार्च तक प्रतिदिन 10 हजार टन कोयला उत्पादन किया जा सकेगा. केडीएच और डकरा दोनों अपना तय लक्ष्य को पूरा करेगी इसमें हर एक मजदूर, कर्मचारी, अधिकारी, श्रमिक नेता, स्थानीय रैयत-विस्थापित परिवार के लोगों का श्रेय है.
निराशा भरे बादल मंडरा रहे हैं :
पिछले एक दशक से प्रतिवर्ष लगातार सैकड़ों करोड़ रुपये घाटे में चल रहा एनके एरिया का चालू वित्तीय वर्ष भले ही कुछ संतोषजनक हो, लेकिन अगले दो-तीन साल का एक्शन प्लान पर कोई काम नहीं होने, अधिकारियों के बीच तालमेल का अभाव होने व कुछ विभागीय प्रमुखों की लापरवाह कार्यशैली आदि कारणों के कारण क्षेत्र में एक निराशा भरे बादल मंडराने लगे हैं. हालत यह है कि यह निराशा कभी भी बगावती रुप में सामने आ सकता है. यह माहौल काम करने वाले अधिकारियों का एक बड़े वर्ग को खलने लगा है. श्रमिक संगठन के प्रतिनिधियों को भी मामले की जानकारी है, लेकिन सभी उत्पादन महीने में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होने से क्षेत्र को बचाने की चिंता में चुप हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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