ranchi news : झारखंड के छह सपूतों के हस्ताक्षर वाली संविधान की प्रति दरकने लगी, जल्द दुरुस्त नहीं कराया गया, तो अलग हो सकते हैं पन्ने

Updated at : 28 May 2025 9:04 PM (IST)
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ranchi news : झारखंड के छह सपूतों के हस्ताक्षर वाली संविधान की प्रति दरकने लगी, जल्द दुरुस्त नहीं कराया गया, तो अलग हो सकते हैं पन्ने

मेन रोड स्थित स्टेट लाइब्रेरी में रखे संविधान की प्रिंटेड प्रति अब दरकने लगी है. इसकी कवर की पेस्टिंग भी छूट रही है. इसे जल्द दुरुस्त नहीं कराया गया, तो पन्ने अलग हो जायेंगे.

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रांची (राजेश तिवारी). मेन रोड स्थित स्टेट लाइब्रेरी में रखे संविधान की प्रिंटेड प्रति अब दरकने लगी है. इसकी कवर की पेस्टिंग भी छूट रही है. इसे जल्द दुरुस्त नहीं कराया गया, तो पन्ने अलग हो जायेंगे. इस संविधान की प्रति में झारखंड के छह सपूतों के हस्ताक्षर हैं, जो झारखंड के लोगों को गौरव की अनुभूति कराते हैं. हस्ताक्षर करने वाले ये वो लोग हैं, जो संविधान सभा के सदस्य रहे हैं. संविधान का हर पन्ना आकर्षक दिखता है. हर पन्ने पर डिजाइन बनी हुई है. संविधान की प्रति में सबसे पहले भारत का प्रतीक चिह्न है. रंगीन और श्याम-श्वेत चित्र से यह संविधान की प्रति सजी हुई है. संविधान के अंत में नौ पृष्ठों पर सभा के सदस्यों के हस्ताक्षर हैं. इन हस्ताक्षरों में झारखंड की विभूतियों को भी पहचान सकते हैं. प्रति की साइज 12 इंच बाई 16 इंच है. स्टेट लाइब्रेरी में संविधान की प्रिंटेड प्रति को काफी संभाल कर रखा गया है. उसे सफेद तौलिये से बांधकर रखा गया है.

संविधान की प्रति में झारखंड के इनलोगों के हैं हस्ताक्षर

भारतीय संविधान के निर्माण में झारखंड की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. यहां से करीब आठ लोग इस सभा में बतौर सदस्य शामिल थे. इनमें खूंटी के जयपाल सिंह मुंडा, लोहरदगा के बोनीफेस लकड़ा, पश्चिमी सिंहभूम के देवेंद्र नाथ सामंत, हजारीबाग के बाबू रामनारायण सिंह व कृष्ण वल्लभ सहाय, पलामू के यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष, देवघर के विनोदानंद झा. मूूल संविधान की प्रति के अंत में इनके भी हस्ताक्षर हैं. तब जयपाल सिंह अपने नाम के साथ मुंडा नहीं लिखते थे, इसलिए संविधान की प्रति में जयपाल सिंह नाम से ही इनके हस्ताक्षर हैं.

इटैलिक अक्षरों में लिखी गयी है संविधान की मूल प्रति

संविधान की मूल प्रति प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने अपने हाथों से कैलीग्राफी के जरिये इटैलिक अक्षरों में लिखी थी. संविधान की मूल प्रति को नंद लाल बोस व राम मनोहर सिन्हा सहित शांति निकेतन के कलाकारों ने सजाया था. मूल संविधान के हिंदी संस्करण का सुलेखन वसंत कृष्णन वैद्य ने किया था.

खास कागज में लिखा गया है संविधान

संविधान की मूल प्रति में जिस कागज का प्रयोग किया गया है, उसे 1000 सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. साथ ही संविधान में लिखे सभी अक्षरों को पढ़ा भी जा सकता है. इसमें नियमों व कर्तव्यों को समझाने के लिए कई प्रकार के चित्र बनाये गये हैं. इसके कवर पृष्ठ पर स्वर्ण अक्षर अंकित किया गया है.

पहला हस्ताक्षर राजेंद्र प्रसाद का

संविधान सभा के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर भी इसमें देखे जा सकते हैं. संविधान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का हस्ताक्षर सबसे पहले है. राजेंद्र प्रसाद ने हिन्दी और अंग्रेजी में हस्ताक्षर किये हैं जबकि इसके बाद जवाहर लाल नेहरू के हस्ताक्षर हैं. देश भर के अलग-अलग राज्यों से आये नेताओं ने इसमें हस्ताक्षर हिन्दी व अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओं में भी किये हैं.

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