ranchi news : राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर झारखंड के बच्चों की वैज्ञानिक सोच और मेहनत की कहानी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Feb 2025 12:27 AM
ranchi news : वर्तमान में कई विद्यार्थी विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं.
रांची. हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है. यह दिन महान भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन की खोज ””””रमन प्रभाव”””” के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 1987 से यह दिवस पूरे देश में मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है. वर्तमान में कई विद्यार्थी विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं.
रूपेश कुमार ने सड़क दुर्घटना रोकने के लिए रक्षक मॉडल विकसित किया
रूपेश कुमार ने रक्षक मॉडल बनाकर रोड एक्सीडेंट की घटना रोकने की पहल की है. उनके इस मॉडल को भारत सरकार अपना रहा है. इस मॉडल का पेटेंट भी मिल चुका है. रक्षक एक ऐसा मॉडल है, जिसमें सड़क दुर्घटना होने पर एक मिनट में पुलिस स्टेशन और अस्पताल को एसएमएस द्वारा सूचना मिल जायेगी. इस डिवाइस को बनाने में छह माह का समय लगा. इस मॉडल के लिए नेशनल अवार्ड 2024 भी मिल चुका है. रूपेश ने कहा : शुरू से ही विज्ञान में रुचि रही है, इसलिए कुछ नया बनाते रहता हूं.निखिल ने दिव्यांगों के लिए माइंड नियंत्रित व्हीलचेयर बनायी
रांची के निखिल कुमार कोडरमा से प्लस टू की पढ़ाई कर रहे हैं. निर्मला काॅन्वेंट स्कूल एदलहातु से भी पढ़ाई की है. स्कूलिंग के दौरान इंस्पायर अवार्ड के लिए माइंड कंट्रोल व्हील चेयर बनाया. इस मॉडल को दिल्ली में सराहा गया और सम्मानित भी किया गया. निखिल ने बताया : यह मॉडल दिव्यांगों के लिए तैयार किया, जो अपनी इच्छा से कहीं जा नहीं पाते थे. उनके लिए यह मॉडल काफी कारगर साबित होगा. इसके माध्यम से व्हील चेयर पर बैठे लोग का सिर जिधर घूमेगा, उधर व्हील चेयर घूम जायेगा. इसे बनाने में करीब एक महीने का समय लगा. निखिल ने कहा : मुझे विज्ञान के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना है.अनुष्का ने सरकारी स्कूलों में जगह की समस्या का समाधान निकाला
अनुष्का डीएसपीएमयू से स्नातक कर रही हैं. शुरुआती पढ़ाई एसएस प्लस टू स्कूल कोलेबिरा से हुई. सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए बेंच-डेस्क की कमी होती थी, इसे देखते हुए उन्होंने फ्लाइंग एडजेस्टेबल डेस्क बेंच मॉडल बनाया. इस मॉडल की सराहना सिमडेगा, रांची और भुवनेश्वर में हुई. इस मॉडल के लिए उन्हें जापान भी भेजा गया. वह बताती हैं : पढ़ाई के दौरान बेंच-डेस्क की समस्या को देखते हुए इस मॉडल को बनाया. इसे सरकारी स्कूलों में जगह के हिसाब से एडजस्ट किया जा सकता है. भुवनेश्वर में आयोजित सेलेक्टेड मॉडलों में मेरा चयन हुआ और लैपटॉप दिया गया. इसके अलावा सात दिन के जापान भेजा गया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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