मेडिसिन आइसीयू में छह मॉनिटर और दो वेंटिलेटर खराब, गंभीर मरीजों की जान संकट में

आइसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को सामान्य वार्ड की तरह मिल रहीं सुविधाएं. मरीजों को हमेशा बेड, ट्रॉली और व्हीलचेयर के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है.
राजीव पांडेय, रांची. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के मेडिसिन विभाग में राज्य भर से लोग इलाज कराने आते हैं, लेकिन अव्यवस्था के कारण अक्सर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. मरीजों को हमेशा बेड, ट्रॉली और व्हीलचेयर के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है. वहीं, मेडिसिन आइसीयू में लगभग 38 मॉनिटर और तीन वेंटिलेटर हैं. इनमें से पांच से छह मॉनिटर और दो वेंटिलेटर अक्सर खराब रहते हैं. इस कारण मरीजों की जान संकट में पड़ी रहती है. ज्ञात हो कि मेडिसिन ओपीडी में प्रतिदिन 250 से 300 मरीजों को परामर्श दिया जाता है.
वहीं, वार्ड में थर्ड और फोर्थ ग्रेड के स्टाफ भी बहुत कम हैं. इस कारण मरीजों को जांच के लिए ले जाने में काफी समय लगता है. कई बार मरीज के परिजन खुद जांच घर ले जाते हैं. वहीं, मेडिसिन आइसीयू में गंभीर मरीज भर्ती रहते हैं. लेकिन, यहां की व्यवस्थाएं और सुविधाएं भी सामान्य वार्ड की तरह ही हैं. मेडिसिन विभाग में 14 सीनियर डॉक्टरों की टीम है. इनमें चार प्राेफेसर, दो एडिशनल प्रोफेसर, पांच एसोसिएट प्रोफेसर और तीन असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. इसके अलावा मरीजों की देखभाल के लिए तीन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर और 45 पीजी स्टूडेंट भी हैं. विभाग में हर साल 15 पीजी स्टूडेंट का नामांकन होता है.आठ यूनिट में भर्ती रहते हैं 300 से 320 मरीज
मेडिसिन विभाग में आठ वार्ड हैं. एक वार्ड में 38 से 40 बेड है. ऐसे में मेडिसिन विभाग में प्रतिदिन 300 से 320 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जाता है.वार्ड की तीन बड़ी चुनौती
– थर्ड व फाेर्थ ग्रेड के कर्मचारियों की कमी– नर्सिंग स्टाफ कम रहने से मरीजों को समय पर दवा तक नहीं मिलती है- बेड की समस्या, कई बार मरीज को दूसरी यूनिट में करनी पड़ती है भर्तीमेडिसिन विभाग के फैकल्टी
डॉ विद्यापति, विभागाध्यक्ष सह प्रोफेसरडाॅ बिंदे कुमार, प्रोफेसरडॉ संजय सिंह, प्रोफेसर
डॉ अजीत डुंगडुंग, प्रोफेसरडॉ ऋषि तुलिन गुड़िया, एडिशनल प्रोफेसरडॉ मनोज प्रसाद, एडिशनल प्रोफेसरडाॅ डीके झा, एसोसिएट प्रोफेसर
डॉ जी मिंज, एसोसिएट प्रोफेसरडॉ मनोहर लाल, एसोसिएट प्रोफेसरडॉ अभय कुमार, एसोसिएट प्रोफेसरडाॅ रश्मि सिन्हा, एसोसिएट प्रोफेसर
डॉ निलभ कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ सतीश कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसरडॉ सिद्धार्थ कपूर, असिस्टेंट प्रोफेसर
वर्जन
मेडिसिन विभाग के आइसीयू वार्ड को अपग्रेड करने की जरूरत है. यहां कई मॉनिटर और वेंटिलेटर मशीन खराब हैं. इसे दुरुस्त करने की व्यवस्था की जा रही है. थर्ड और फोर्थ ग्रेड के कर्मचारी और नर्स की बहुत कमी है. इससे मरीजों के इलाज और जांच दोनों प्रभावित होते हैं. वहीं, वार्ड के टूटे हुए फर्श को तत्काल दुरुस्त कराने की जरूरत है.डॉ विद्यापति, विभागाध्यक्ष, मेडिसिनB
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