Ranchi News 1972 में खूंटी से शुरू हुई थी महिला हॉकी की ऐतिहासिक यात्रा

Published by : MUNNA KUMAR SINGH Updated At : 16 Jul 2025 10:57 PM

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झारखंड में सिमडेगा जिला को हॉकी की नर्सरी कहा जाता है. इस जिले से कई प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी निकले हैं.

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कोनेरा और गोविंदपुर की महिला टीमों के बीच हुआ था मुकाबला

रांची(प्रवीण मुंडा). झारखंड में सिमडेगा जिला को हॉकी की नर्सरी कहा जाता है. इस जिले से कई प्रतिभाशाली हॉकी खिलाड़ी निकले हैं. पर महिला हॉकी की शुरुआत खूंटी जिला में वर्ष 1972 से हुई थी. पहली बार महिला हॉकी का मैच 14 अगस्त 1972 को खूंटी के कचहरी मैदान में कोनेरा और गोविंदपुर की महिला हॉकी की टीम के बीच हुआ था. कहा जाता है कि मैच देखने के लिए 10 से 15 हजार पहुंचे थे. इस मैच में कोनेरा ने गोविंदपुर की टीम को 1-0 से हराया था. उक्त मैच के आयोजकों में से एक तथा झारखंड में महिला हॉकी पुस्तक के लेखक गुड़िया डीके कोनेरा लिखते हैं यह एक ऐतिहासिक दिन था और बिहार (तत्कालीन) के खेल इतिहास में एक नये युग की शुरुआत भी. इस हॉकी मैच का प्रसारण आकाशवाणी से किया गया था. 17 अगस्त 1972 को इसकी खबर आर्यावर्त में ”बिहार में प्रथम बार महिला हॉकी” शीर्षक से छपी थी.

पहले हॉकी स्टिक को पकड़ना भी अशुभ माना जाता था

डीके कोनेरा लिखते हैं कि उन दिनों महिला हॉकी का आयोजन आसान नहीं था. लड़कियों का हॉकी स्टिक पकड़ना भी अशुभ माना जाता था. हॉकी टीम के लिए रांची, खूंटी, मुरहू के बालिका विद्यालयों से संपर्क किया था, पर कोई भी महिला हॉकी के लिए तैयार नहीं हुआ था. इसके बाद खूंटी में आनंद तोपनो (वकील साहब), सुमनजन तीड़ू, इलियाजर तोपनो, जेम्स पीटर तोपनो, सागेन भेंगरा, सलन गुड़िया, पूरन प्रसाद बरजो, मुकुंद तीड़ू तथा गुड़िया डीके कोनेरा ने बैठक की. लोगों ने काफी प्रयास किया और कोनेरा गांव और गोविंदपुर में लड़कियों को हॉकी खेलने के लिए राजी किया गया. आयोजन के लिए खूंटी के तात्कालिक अनुमंडल पदाधिकारी से संपर्क किया गया और 15 अगस्त 1972 को हॉकी मैच के लिए सहयोग मांगा गया. अनुमंडल पदाधिकारी ने मैच के लिए सहयोग का वादा किया. जो आयोजन समिति बनी, उसमें अनुमंडल पदाधिकारी को ही अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद मैच का 15 अगस्त की जगह 14 अगस्त किया गया. इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है.

जानिए पहली बार महिला हॉकी की टीमों को

कोनेरा की महिला हॉकी टीम की कप्तान प्रीतीवन्ती गुड़िया थी. उनके अलावा टीम में सुसारी आईंद, फिरदा गुड़िया, मरियम गुड़िया, सोसन्ती गुड़िया, प्रेमो सांगा, सलोमी गुड़िया, सुसाना गुड़िया, सेवानी, तबीवा लगुन, प्यारी गुड़िया, सिलमनी, नमलेन, तुरियानो, महिमा, निगोंती शामिल थीं.गोविंदपुर की टीम में लोयानी तोपनो कप्तान थीं. टीम में बहामनी हेरेंज, मरियमस सुरीन, जुबलानी हेंब्रोम, राहिल होरो, रोमनी होरो, बिश्वासी तोपनो, जिलानी होरो, कांती होरो, कांति कोंगाड़ी, निमोंन्तो कोनगाडड़ी, सुलामी होरो और जुलियानी होरो शामिल थीं.

1974-75 से संगठित रूप में हुई महिला हॉकी की शुरुआत

हॉकी पर शाहनवाज कुरैशी ने काफी शोध किया है. वे बताते हैं कि अविभाजित बिहार में 1974-75 से महिला हॉकी की शुरुआत हुई. सरकार ने खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए राज्य खेल परिषद का गठन किया. 1975-76 में राजकीय बालिका उच्च विद्यालय रांची और उर्सुलाइन स्कूल गुमला में लड़कियों के लिए हॉकी प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत हुई. 1983 में बिहार महिला हॉकी संघ की स्थापना की गयी. इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है. भारत की महिला हॉकी टीम में झारखंड की महिला खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा से अलग ही छाप छोड़ी है. सावित्री पूर्ति, सुमराय टेटे, मसीरा सुरीन, एडलिन केरकेट्टा, असुंता लकड़ा ने कामयाबी की लंबी दास्तान लिखी है.

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