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झारखंडी झुमका और चांदी के गहनों पर फिदा दिल्ली वाले, 25 लाख से अधिक का हुआ कारोबार

Updated at : 22 Sep 2025 8:45 PM (IST)
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Saras Mela Delhi

दिल्ली में आयोजित सरस मेला में झारखंड की महिलाओं ने भी लगाये अपने स्टॉल.

Saras Mela Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित सरस मेला में झारखंड की महिलाओं ने अपने उत्पादों से धूम मचा दी. वो विलुप्त होते गहने हों या झारखंड के प्रसिद्ध व्यंजन. झारखंड के पारंपरिक गहनों के साथ-साथ व्यंजनों ने भी दिल्ली वालों का दिल जीत लिया. झारखंड की महिलाओं ने 25 लाख रुपए का कारोबार किया है, जो बड़ी बात है.

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Saras Mela Delhi: देश की राजधानी नयी दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में 5 से 22 सितंबर तक आयोजित सरस आजीविका मेले में झारखंड की ग्रामीण महिलाओं ने अपनी उद्यमिता और परंपरागत कला से खास पहचान बनायी. पलाश एवं आदिवा ब्रांड के 7 स्टॉल के माध्यम से महिलाओं ने 25 लाख रुपए से अधिक का कारोबार किया. इस दौरान दिल्ली वाले झारखंडी झुमका और चांदी के गहनों पर फिदा नजर आये. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सरस मेला में भाग लेने वाली महिलाओं को झारखंड के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सराहना की.

‘पलाश’ का सरस मेला में रहा शानदार प्रदर्शन

झारखंड की महिलाओं का अपना ब्रांड ‘पलाश’ का सरस आजीविका मेले में शानदार प्रदर्शन रहा. खाद्य उत्पाद जैसे रागी लड्डू, शुद्ध शहद, काले गेहूं का आटा और अरहर दाल के साथ-साथ गैर-खाद्य उत्पाद जैसे साबुन, लेमन ग्रास ऑयल इत्यादि दिल्लीवासियों के बीच बेहद लोकप्रिय रही. पूरे मेले के दौरान इन उत्पादों की कुल बिक्री 25 लाख रुपये से ज्यादा रही, जो ग्रामीण महिलाओं की मेहनत, हुनर और लगन का प्रतीक है.

Saras Mela Delhi पहुंचीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सरस आजीविका मेले का दौरा किया और महिलाओं के स्टॉल पर जाकर पलाश ब्रांड के उत्पादों का अवलोकन किया. उन्होंने कहा कि इन ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और हुनर काबिल-ए-तारीफ है. उन्हें राष्ट्रीय मंच पर अपनी कला और उत्पाद प्रदर्शित करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए. पलाश ब्रांड और सरस मेला इसी दिशा में एक कदम है.

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गोड्डा की सोनी देवी ने सरस मेले में दिखाया हुनर

गोड्डा जिले की सोनी देवी को पहली बार दिल्ली सरस मेले में जाने का मौका मिला. सखी मंडल से जुड़कर अपने गांव में तसर सिल्क की साड़ियां, सूट पीस और दुपट्टे तैयार करने वाली सोनी देवी ने मेले में लगभग 3 लाख रुपए से अधिक का कारोबार किया. उन्होंने बताया कि मेले ने उन्हें सिर्फ बिक्री का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि अन्य राज्यों की महिलाओं से सीखने और अनुभव साझा करने का भी अवसर प्रदान किया.

पलाश मार्ट के उत्पादों के साथ झारखंड की महिला उद्यमी.

आदिवा : झारखंड के पारंपरिक आभूषणों के दीवाने हुए दिल्ली वाले

ग्रामीण महिलाओं द्वारा बनाये गये पारंपरिक आभूषणों को पहचान देने के लिए आदिवा ब्रांड की शुरुआत वर्ष 2021 में हुई थी. आदिवा ब्रांड को राष्ट्रीय पटल पर ले जाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने हरसंभव प्रयास किया और इसी कड़ी में सरस आजीविका मेले में आदिवा ज्वेलरी का प्रदर्शनी सह बिक्री स्टॉल लगाया गया.

आदिवा के गहनों ने बिखेरी चमक

मेले में आदिवा के गहनों की चमक आकर्षण का केंद्र रही. छोटी बच्चियां हों, कॉलेज की लड़कियां या महिलाएं. सभी को हस्तनिर्मित पारंपरिक आभूषण बेहद पसंद आये. आदिवा के स्टॉल पर 200 रुपए के झुमकों से लेकर 5-6 हजार रुपए तक के चांदी के आभूषण उपलब्ध थे. चांदी सहित अन्य धातुओं से बने आभूषण भी दिल्ली के लोगों पसंद आये.

पारंपरिक गहनों के एक स्टॉल पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह.

विलुप्त होती पारंपरिक ज्वेलरी को मिली नयी पहचान

झारखंड की पारंपरिक ज्वेलरी, जो कभी विलुप्त होने के कगार पर थी, देश की राजधानी में आदिवा ब्रांड के तले अपनी पहचान बनाने में सफल रही. लोगों ने पारंपरिक आभूषणों में चांदी की मंढली, झोंपा सीकरी, पछुवा, कंगना, डबल झुमका तथा मेटल से बने अन्य आभूषणों को विशेष रूप से सराहा.

दिल्ली में झारखंडी व्यंजनों का स्वाद रहा हिट, तीसरा पुरस्कार जीता

सरस मेले में झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों ने विशेष पहचान बनायी. सखी मंडल की महिलाओं के धुसका, दाल पीठा और घुघनी ने दिल्लीवासियों का दिल जीत लिया. इन व्यंजनों से महिलाओं ने 3 लाख रुपए से अधिक का कारोबार किया. स्वादिष्ट होने के साथ-साथ ये व्यंजन झारखंड की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति और खान-पान की परंपरा को भी जीवंत रूप से प्रस्तुत कर रहे थे. मेले के अंतिम दिन झारखंड को लाइव फूड श्रेणी में तीसरे पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

नयी दिल्ली के सरस मेला में झारखंडी व्यंजन का लुत्फ उठातीं मंत्री दीपिका पांडेय सिंह.

झारखंड की पत्रकार दीदी ने की ‘सरस आजीविका मेले’ की पूरी रिपोर्टिंग

आयोजन में एक और खास आकर्षण रहीं झारखंड की ‘पत्रकार दीदी’. ग्रामीण विकास मंत्रालय के विशेष आमंत्रण पर सरायकेला की सुनीता ने पूरे मेले की रिपोर्टिंग की. उन्होंने सोशल मीडिया के लिए सामग्री तैयार करने, विभिन्न राज्यों से आयी महिलाओं की कहानियां लिखने और ग्राहकों एवं आयोजकों के अनुभव साझा करने की जिम्मेदारी निभायी. पत्रकार दीदी की इस पहल ने यह साबित किया कि ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ किसी चीज का उत्पादन और बिक्री करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मीडिया और संवाद के क्षेत्र में भी अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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