रांची निकाय चुनाव में बदला आरक्षण का फॉर्मूला, लेकिन राजनीति में परिवारवाद हावी

एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक स्केच.
Ranchi Civic Polls: झारखंड की राजधानी रांची के निकाय चुनाव में आरक्षण का फॉर्मूला बदलने के बावजूद कई वार्डों में परिवारवाद हावी है. पति-पत्नी, भाई-बहन और रिश्तेदार बारी-बारी से पार्षद बनते रहे हैं. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से उत्तर महतो की रिपोर्ट
Ranchi Civic Polls: रांची निकाय चुनाव के लिए शहर की राजनीति परवान पर है. शहर की राजनीति में परिवार की पकड़ गहरी है. निकाय चुनाव में आरक्षण का फॉर्मूला बदलता रहा है. लेकिन चुनाव में राजनीति कुछ खास परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. एक ही परिवार का दबदबा बना रहा है. पिछले तीन चुनाव में ऐसे कई वार्ड हैं, जो परिवारवाद से बाहर नहीं आ पाए. जनता के प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने वाले कई चेहरे एक ही परिवार से आते रहे हैं.
रोटेशन के साथ बदलते रहे परिवार के चेहरे
रोटेशन के हिसाब से कभी वार्ड सामान्य रहा, तो परिवार के पुरुष सदस्य ने चुनाव जीता. जैसे ही सीट महिला के लिए आरक्षित हुई, तो उसी परिवार की महिला सदस्य मैदान में उतरी और जीत हासिल की. कई जगहों पर तो पति-पत्नी बारी-बारी से पार्षद बनते रहे हैं. कुछ वार्डों में भाभी, तो कहीं पर ननद चुनावी मैदान में उतरी. बताते चलें कि रांची नगर निगम में चौथी बार चुनाव हो रहा है. पहली बार वर्ष 2008 में चुनाव हुआ था. इसके बाद 2013 और 2018 में चुनाव कराये गये. अब 2026 में फिर से चौथी बार नगर निगम का चुनाव हो रहा है.
वार्ड नंबर-21: रोशनी खलखो–सुजीत उरांव, गीता कुमारी
वार्ड नंबर-21 से रोशनी खलखो और उनके पति सुजीत उरांव लगातार जीत दर्ज करते आए हैं. 2008 में सुजीत उरांव यहां से पार्षद बने. 2013 में सीट महिला के लिए आरक्षित हुई तो रोशनी खलखो विजयी रहीं. 2018 में भी रोशनी खलखो ने जीत हासिल की. 2026 में रोशनी फिर से मेयर पद के लिए मैदान में हैं. लेकिन, इस बार उन्होंने अपनी ननद गीता कुमारी को वार्ड 19 से मैदान में उतारा है.
वार्ड नंबर-1: नकुल तिर्की-सुनीता तिर्की
वार्ड नंबर-1 कांके रोड क्षेत्र से नकुल तिर्की और उनकी पत्नी सुनीता तिर्की का दबदबा रहा है. 2008 में नकुल तिर्की पहली बार पार्षद चुने गये. 2013 में सीट महिला के लिए आरक्षित हुई तो सुनीता तिर्की ने जीत दर्ज की. 2018 में आरक्षण बदलने पर नकुल तिर्की फिर पार्षद बने. 2026 में वे चौथी बार मैदान में हैं.
वार्ड नंबर-20: सुनील यादव-निकिता देवी
मामा के नाम से मशहूर सुनील यादव और उनका परिवार पिछले 15 वर्षों से वार्ड नंबर-20 में काबिज है. 2008 में सुनील यादव पार्षद बने. 2013 में सीट महिला के लिए आरक्षित हुई तो उनकी पत्नी निकिता देवी पार्षद चुनी गयीं. 2018 में आरक्षण बदला और सुनील यादव फिर विजयी रहे. 2026 में वे एक बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं.
वार्ड नंबर-22: मो असलम-नाजिया असलम
हिंदपीढ़ी के वार्ड नंबर-22 में मो असलम और उनकी पत्नी नाजिया असलम का वर्चस्व रहा है. 2008 और 2013 में मो असलम विजयी रहे. 2018 में सीट महिला के लिए आरक्षित हुई, तो नाजिया असलम पार्षद बनीं. 2026 में आरक्षण बदलने के बाद मो असलम फिर मैदान में हैं.
वार्ड नंबर-18: भाई-बहन का दबदबा
वार्ड नंबर-18 में भाई-बहन का दबदबा पिछले तीन चुनावों से बना हुआ है. 2008 में सबसे पहले राजेश गुप्ता यहां से पार्षद बने. 2013 में और 2018 में उनकी बहन आशा देवी इस वार्ड से विजयी हुईं. 2026 में आशा देवी एक बार फिर से मैदान में हैं.
वार्ड नंबर 10: पति-पत्नी का रहा जलवा
वार्ड नंबर 10 में 2013 में संगीता देवी पार्षद बनीं. 2018 में उनके पति अर्जुन यादव पार्षद बने. इस वर्ष सीट महिला के लिए आरक्षित है, ऐसे में संगीता देवी फिर मैदान में हैं. वार्ड नंबर 21 में 2013 में सबा नाज पार्षद बनीं. 2018 में उनके पति मो एहतेशाम विजयी रहे. 2026 में मो एहतेशाम फिर से मैदान में हैं.
इसे भी पढ़ें: हजारीबाग में निकाय चुनाव की तैयारी जोरों पर, पोलिंग पार्टी के लिए 250 गाड़ियों की जरूरत
वार्ड नं 29: पत्नी को हटाकर पति मैदान में
वार्ड नं 29 से वर्ष 2018 में सोनी परवीन पार्षद बनी. इस बार सीट सामान्य हुई, तो उनके पति फैयाज वारसी चुनावी मैदान में हैं. वार्ड नं 13 से पूर्व में पूनम देवी पार्षद थी. इस बार सीट सामान्य हुई, तो उनके पति प्रभुदयाल बड़ाइक चुनावी मैदान में हैं. वहीं वार्ड 30 से पूर्व में रीमा देवी पार्षद थी. इस बार इस सीट से उनकी भाभी सोनी देवी चुनावी मैदान में है.
इसे भी पढ़ें: रांची में मेयर पद के दावेदारों ने दिखाया विजन, जनता ने पूछा – कैसे करेंगे विकास?
प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




